अब ऊंचे पहाड़ों और गहरे जंगलों में भी आएगा फुल नेटवर्क, ज्योतिरादित्य सिंधिया ने बता दी वो खास तारीख
News India Live, Digital Desk: आपने अक्सर ग्रामीण इलाकों में रहने वाले दोस्तों या रिश्तेदारों से ये सुना होगा कि—"रुको भाई, फोन नहीं लग रहा, छत पर या ऊँची पहाड़ी पर जाकर बात करता हूँ।" आज के समय में जब हम और आप 5G और हाई-स्पीड फाइबर की बातें करते हैं, तो भारत के हज़ारों गाँव आज भी एक स्थिर 4G Connection के लिए तरस रहे हैं। लेकिन अब शायद वो दिन लदने वाले हैं, जब सिग्नल पकड़ने के लिए घर से दूर जाना पड़ता था।
संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने हाल ही में एक ऐसी 'मेगा अपडेट' साझा की है, जो न सिर्फ़ तकनीक बल्कि लाखों सपनों को रफ़्तार देगी। उन्होंने एक बहुत ही आत्मविश्वास के साथ ये साफ किया कि भारत सरकार का 'मिशन 4G' अब अपनी अंतिम मंज़िल की ओर है।
कब तक होगा काम पूरा? (दिए गए समय की सुगबुगाहट)
सिंधिया का लक्ष्य बिलकुल सीधा और साफ़ है—साल 2024 के अंत या 2025 के शुरुआती महीनों तक देश के उन आखिरी गाँवों तक भी 4G सर्विस पहुँचा देनी है जहाँ अब तक मोबाइल टावर का सिर्फ़ इंतज़ार था। यानी बापू का सपना कि "भारत गाँवों में बसता है", अब इंटरनेट के साथ और भी सशक्त होगा। इसमें खास तौर पर छत्तीसगढ़ के बस्तर, उत्तर-पूर्व (North-East) के ऊंचे इलाकों और बॉर्डर के करीब बसे गाँवों पर फोकस है।
सिर्फ़ विदेशी तकनीक नहीं, अब अपना 'स्वदेशी 4G'
इस मिशन की सबसे खास और दिलचस्प बात ये है कि भारत इसमें अपनी ख़ुद की बनी तकनीक (Indigenous technology) का इस्तेमाल कर रहा है। BSNL और घरेलू कंपनियों के सहयोग से तैयार किया गया यह 4G नेटवर्क यह साबित करता है कि हम सिर्फ़ दूसरों से मांग नहीं रहे, बल्कि खुद अपना भविष्य लिख रहे हैं।
क्या होगा इसका असर?
जरा सोचिये, जब बस्तर के एक छोटे से गाँव में रहने वाला बच्चा बिना किसी बफरिंग के अपनी ऑनलाइन क्लास ले सकेगा, या किसी गाँव की महिला अपने बनाए हस्तशिल्प को पूरी दुनिया को बेच पाएगी तब असल में 'डिजिटल इंडिया' का मकसद पूरा होगा। ई-कॉमर्स हो या डिजिटल पेमेंट, ये छोटा सा बदलाव ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए इंजन का काम करेगा।
चुनौतियां कम नहीं हैं, लेकिन रास्ता साफ़ है
हजारों नए मोबाइल टावर लगाना और वह भी मुश्किल इलाकों में, कोई मामूली काम नहीं है। सिंधिया ने यह भी इशारा किया कि इस योजना पर अरबों रुपये खर्च किए जा रहे हैं ताकि देश के आखिरी नागरिक तक नेटवर्क पहुँचे। अब वह दिन दूर नहीं जब भारत का कोना-कोना पूरी दुनिया से जुड़ा होगा।
उम्मीद है कि जल्द ही वो दिन आएगा जब गाँव-गाँव में 'स्मार्टफोन्स की रिंग' गूँजेगी और कनेक्टिविटी की दूरी खत्म हो जाएगी। सच ही तो है, नेटवर्क है तो अवसर है!