झारखंड में माफिया राज पर कोर्ट का शिकंजा, हाईकोर्ट की चेतावनी के बाद सोरेन सरकार की बढ़ी मुश्किलें

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News India Live, Digital Desk: झारखंड, जिसे हम कुदरत और खनिजों का गहना कहते हैं, आज वहां की ज़मीन को अवैध खनन (Illegal Mining) की दीमक धीरे-धीरे खोखला कर रही है। लंबे समय से चल रहे इस खेल पर अब झारखंड हाईकोर्ट ने बहुत सख्त रुख अख्तियार किया है। अदालत के ताज़ा रुख से साफ लग रहा है कि अब लीपापोती से काम नहीं चलने वाला।

दरअसल, झारखंड में अवैध पत्थर और कोयला खनन की शिकायतें नई नहीं हैं, लेकिन मामला तब और गंभीर हो गया जब कोर्ट ने देखा कि सख्त आदेशों के बावजूद जमीन पर स्थितियां नहीं बदल रही हैं। हाईकोर्ट ने इस पर गहरी नाराजगी जाहिर करते हुए हेमंत सोरेन सरकार से जवाब तलब किया है। कोर्ट ने सीधा सवाल पूछा है कि आखिर प्रशासन की नाक के नीचे ये सब कैसे फल-फूल रहा है?

हाईकोर्ट की सुनवाई के दौरान जो बातें सामने आईं, वे वाकई डराने वाली हैं। पहाड़ों को बेतरतीब तरीके से काटा जा रहा है, नदियों का स्वरूप बिगड़ रहा है और इन सबके पीछे कुछ सफेदपोश लोग और माफियाओं का बड़ा हाथ बताया जा रहा है। कोर्ट ने साफ कर दिया है कि उसे केवल कागजों पर कार्रवाई नहीं चाहिए, बल्कि जमीन पर बदलाव दिखना चाहिए।

देखा जाए तो यह मामला सिर्फ झारखंड की राजनीति का नहीं, बल्कि वहां की आम जनता और पर्यावरण के भविष्य का भी है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और उनकी सरकार के लिए अब यह बड़ी चुनौती है कि वे कोर्ट को कैसे संतुष्ट करते हैं और खनन माफियाओं पर लगाम कसने के लिए क्या ठोस कदम उठाते हैं। अक्सर बड़े मामलों में फाइलें इधर-बचा उधर घूमती रहती हैं, लेकिन इस बार हाईकोर्ट के 'कड़े तेवर' देख कर लगता है कि लापरवाह अधिकारियों पर गाज गिरनी तय है।

अब सबकी नज़रें राज्य सरकार के जवाब पर टिकी हैं। क्या वाकई अब अवैध उत्खनन रुक पाएगा? या फिर हमेशा की तरह कुछ छोटे लोगों पर कार्रवाई करके मामला शांत कर दिया जाएगा? फिलहाल तो हाईकोर्ट की सख्ती ने सत्ता के गलियारों में हलचल ज़रूर पैदा कर दी है।