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April 08 2026 11:27 pm

बिहार में अब मिनटों में सुलझेंगे पेचीदा केस प्रदेश में खुलेंगी 13 नई फॉरेंसिक लैब, अब पटना में ही होगा डीएनए टेस्ट

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News India Live, Digital Desk: बिहार की कानून व्यवस्था और अपराध अनुसंधान (Investigation) को हाईटेक बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने एक क्रांतिकारी कदम उठाया है। बिहार के पुलिस महानिदेशक (DGP) विनय कुमार ने घोषणा की है कि प्रदेश में जल्द ही 13 नई क्षेत्रीय फॉरेंसिक साइंस लैब (RFSL) शुरू की जाएंगी। सबसे बड़ी राहत की बात यह है कि अब गंभीर अपराधों की गुत्थी सुलझाने के लिए डीएनए (DNA) सैंपल्स को दिल्ली या हैदराबाद भेजने की जरूरत नहीं पड़ेगी; पटना में ही विश्वस्तरीय डीएनए टेस्टिंग की सुविधा शुरू होने जा रही है।

13 जिलों में फॉरेंसिक लैब का जाल: जांच में नहीं होगी देरी

डीजीपी विनय कुमार के अनुसार, वर्तमान में फॉरेंसिक रिपोर्ट आने में होने वाली देरी के कारण कई महत्वपूर्ण मामलों के ट्रायल में बाधा आती है। इसी समस्या को दूर करने के लिए बिहार के 13 प्रमुख जिलों में नई फॉरेंसिक लैब स्थापित की जा रही हैं। इन लैब्स के शुरू होने से हत्या, लूट, और अन्य आपराधिक वारदातों के साक्ष्यों (Evidence) की जांच जिला स्तर पर ही तेजी से हो सकेगी। इससे पुलिस को चार्जशीट दाखिल करने और दोषियों को सजा दिलाने में लगने वाले समय में भारी कमी आएगी।

डीएनए टेस्ट के लिए अब नहीं भटकना होगा बाहर

अब तक बिहार में जटिल मामलों, जैसे अज्ञात शवों की पहचान या दुष्कर्म के मामलों में डीएनए टेस्ट के लिए सैंपल्स को दूसरे राज्यों की लैब्स में भेजा जाता था, जिसकी रिपोर्ट आने में महीनों लग जाते थे। डीजीपी ने साफ किया कि पटना स्थित मुख्य फॉरेंसिक लैब में अत्याधुनिक डीएनए यूनिट को पूरी तरह सक्रिय किया जा रहा है। इसके अलावा, राज्य के अन्य हिस्सों में भी मोबाइल फॉरेंसिक वैन की संख्या बढ़ाई जाएगी ताकि क्राइम सीन से साक्ष्यों को सुरक्षित तरीके से उठाया जा सके।

भ्रष्टाचार पर वार: साक्ष्यों के साथ नहीं होगी छेड़छाड़

नई फॉरेंसिक नीति के तहत साक्ष्यों के संग्रहण और जांच की प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी बनाया जा रहा है। डीजीपी विनय कुमार ने कहा कि फॉरेंसिक जांच में मानवीय हस्तक्षेप कम होने से भ्रष्टाचार और साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ की गुंजाइश खत्म हो जाएगी। उन्होंने बताया कि इन लैब्स के लिए विशेषज्ञों और वैज्ञानिकों की भर्ती प्रक्रिया भी तेज कर दी गई है, ताकि तकनीकी स्टाफ की कमी न रहे।

अपराधियों में खौफ, पुलिस को मिलेगी मजबूती

फॉरेंसिक इंफ्रास्ट्रक्चर के इस विस्तार से बिहार पुलिस की कार्यप्रणाली में बड़ा बदलाव आने की उम्मीद है। विशेषज्ञों का मानना है कि वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर कोर्ट में केस मजबूत होंगे, जिससे 'कनविक्शन रेट' (सजा दर) में सुधार होगा। डीजीपी ने जोर देकर कहा कि तकनीक का सहारा लेकर बिहार पुलिस अब अपराधियों तक पहुंचने में पहले से कहीं अधिक सक्षम और तेज होगी।