बंगाल में अब बनेगी बाबरी मस्जिद? 6 दिसंबर को नींव रखने का ऐलान, TMC विधायक ने दिया खुला चैलेंज
News India Live, Digital Desk : पश्चिम बंगाल की राजनीति और ‘विवाद’ इन दोनों का चोली-दामन का साथ है। लेकिन इस बार मामला कुछ ज्यादा ही संवेदनशील है। जहां पूरा देश अयोध्या में राम मंदिर बनने के बाद आगे बढ़ चुका है, वहीं बंगाल से एक ऐसी खबर आई है जिसने पुराने जख्मों को कुरेद दिया है।
तृणमूल कांग्रेस (TMC) के एक विधायक ने एलान कर दिया है कि वह पश्चिम बंगाल में "बाबरी मस्जिद" (Babri Masjid) का निर्माण करेंगे। और तो और, इसकी नींव रखने के लिए तारीख भी 6 दिसंबर (Babri Demolition Day) चुनी गई है वही दिन जब अयोध्या में बाबरी ढांचा गिराया गया था।
इस बयान के बाद से बीजेपी ने ममता सरकार पर चौतरफा हमला बोल दिया है। आइए समझते हैं कि आखिर विधायक जी ने क्या कहा और इसके मायने क्या हैं।
विधायक का "शपथ पत्र" (The Announcement)
यह बयान दिया है टीएमसी के विधायक मोसीदुर रहमान (Mosiur Rahaman) ने। उनका कहना है कि बाबरी मस्जिद सिर्फ़ एक ढांचा नहीं थी, बल्कि एक इमोशन थी। उन्होंने दावा किया कि वे कोलकाता के पास हबरा इलाके में (या राजा बाजार, जैसा कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया है) बिल्कुल वैसी ही बाबरी मस्जिद बनवाएंगे।
विधायक ने साफ कहा, "6 दिसंबर को हम शहीद दिवस मनाएंगे और बाबरी मस्जिद के निर्माण के लिए आधारशिला (Foundation Stone) रखेंगे।" उन्होंने यह भी कहा कि "देश भर में लाखों मस्जिदें तोड़ दी जाएं, लेकिन हम बाबरी की याद ज़िंदा रखेंगे।"
तारीख 6 दिसंबर ही क्यों?
सियासत समझने वाले जानते हैं कि 6 दिसंबर भारत के इतिहास की वो तारीख है जो हमेशा संवेदनशील रहती है। ऐसे में ठीक उसी दिन, मस्जिद निर्माण का शिलान्यास करना सीधे तौर पर एक समुदाय की भावनाओं को उभारने और 'ध्रुवीकरण' (Polarization) की कोशिश माना जा रहा है। इसे 2026 के बंगाल विधानसभा चुनावों से भी जोड़कर देखा जा रहा है।
बीजेपी ने कहा- "बंगाल को जिहादी बना रहे हो"
जैसे ही यह खबर बाहर आई, बीजेपी नेताओं का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया।
बंगाल बीजेपी का कहना है कि ममता बनर्जी की सरकार तुष्टिकरण (Appeasement) की राजनीति में इतनी गिर गई है कि वह समाज में नफरत फैलाना चाहती है।
विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी ने तंज कसते हुए कहा कि टीएमसी नेता बंगाल को देश से अलग रास्ते पर ले जा रहे हैं। बीजेपी ने इसे "कम्युनल टेंशन" पैदा करने वाला बयान बताया है।
ममता बनर्जी की चुप्पी
हैरानी की बात यह है कि अभी तक टीएमसी के शीर्ष नेतृत्व यानी ममता बनर्जी या अभिषेक बनर्जी की तरफ से इस पर कोई सफाई नहीं आई है। सवाल उठता है क्या यह विधायक का निजी बयान है या पार्टी की सोची-समझी रणनीति?
क्या वाकई बंगाल में बाबरी मस्जिद का प्रतीक खड़ा किया जाएगा या यह सिर्फ़ चुनाव से पहले वोट बैंक पक्का करने का एक 'स्टंट' है? जो भी हो, 6 दिसंबर आने वाला है और बंगाल का सियासी पारा अभी से हाई हो गया है। जनता सब देख रही है कि विकास की बात कब होगी और धर्म की आड़ में राजनीति कब तक चलेगी।