सिर्फ आराम ही नहीं, ये मीठा ज़हर भी है ,जानिये कैसे आपका आलस आपको चुपके से डायबिटीज़ का मरीज़ बना रहा है
News India Live, Digital Desk: आज के दौर में हम सबकी लाइफ ऐसी हो गई है कि हमें लगता है, बस सारा काम सोफे या बेड पर लेटे-लेटे ही हो जाए। घर का सामान मंगाना हो या ऑफिस की मीटिंग सब कुछ स्क्रीन पर सिमट गया है। लेकिन क्या आपने कभी गौर किया है कि जो शरीर चलने-फिरने और मेहनत करने के लिए बना था, जब वह घंटों एक ही जगह जड़ हो जाता है, तो उसके अंदर क्या होता है?
हम जिसे प्यार से 'मीठा आलस' कहते हैं, हकीकत में वह कई गंभीर बीमारियों का बुलावा है। डॉक्टर्स और हेल्थ एक्सपर्ट्स का मानना है कि 'आलस' कोई मानसिक स्थिति नहीं, बल्कि एक जानलेवा लाइफस्टाइल बन चुका है।
इंसुलिन और आलस का गहरा नाता
जब हम बिल्कुल भी शरीर नहीं हिलाते, तो हमारे शरीर का 'मेटाबॉलिज्म' गहरी नींद में सो जाता है। हमारा शरीर ग्लूकोज़ को ठीक से प्रोसेस नहीं कर पाता। जब मांसपेशियां इस्तेमाल नहीं होतीं, तो वे खून से शुगर (Glucose) सोखना कम कर देती हैं। यहीं से शुरुआत होती है टाइप-2 डायबिटीज़ की। धीरे-धीरे शरीर में इंसुलिन का असर कम होने लगता है और देखते ही देखते शुगर लेवल नियंत्रण से बाहर चला जाता है।
आलस: सिर्फ मोटापे तक सीमित नहीं
ज्यादातर लोग सोचते हैं कि "मैं मोटा नहीं हूँ, तो मैं आलसी हो सकता हूँ।" लेकिन यह एक गलतफहमी है। बाहर से फिट दिखने वाले लोग भी अगर फिजिकली एक्टिव नहीं हैं, तो उन्हें 'थििन-फैट' (Thin-Fat) की कैटेगरी में रखा जाता है। यानी बाहर से तो पतले, लेकिन अंगों के पास जमी चर्बी और बढ़ता कोलेस्ट्रॉल उन्हें ब्लड प्रेशर और हार्ट की बीमारियों के करीब ले जाता है।
सुस्ती का चक्र: एक बार फंसे तो निकलना मुश्किल
आलस की सबसे बड़ी बुराई ये है कि यह और ज्यादा सुस्ती पैदा करता है। जब आप मेहनत नहीं करते, तो आपका एनर्जी लेवल गिर जाता है, और जब एनर्जी कम होती है, तो आपका मन कुछ और न करने का होता है। यह एक ऐसा घेरा है जो धीरे-धीरे आपको थकावट, तनाव और चिड़चिड़ेपन की ओर धकेलता है।
क्या है बचने का रास्ता? (महंगे जिम की ज़रूरत नहीं)
इसका हल किसी बड़े जिम या महंगे प्रोटीन पाउडर में नहीं है। बस अपनी दिनचर्या में छोटे बदलाव करें:
- हर 45 मिनट के काम के बाद 5 मिनट की चहल-कदमी करें।
- लिफ्ट की जगह सीढ़ियों का चुनाव करें।
- दिन में कम से कम 20 मिनट तेज पैदल चलें (Brisk Walking)।
- स्क्रीन टाइम कम करें और खुद को किसी न किसी काम में व्यस्त रखें।
याद रखिये, आपका शरीर एक मशीन की तरह है। अगर यह एक जगह पड़ा रहा तो इसमें 'जंग' लग जाएगा, लेकिन अगर यह चलता रहा, तो आपको सालों-साल दवाइयों से दूर रखेगा। अपनी सेहत को अपनी पहली प्राथमिकता बनाएं, क्योंकि बीमारियां भी उसी दरवाजे पर दस्तक देती हैं जहाँ लोग हिलने-डुलने से कतराते हैं!