North Korea Election 2026: तानाशाह किम जोंग उन की 'बंपर' जीत! 99.93% वोट पाकर रचा इतिहास, पहली बार 'विरोध' में भी पड़े वोट
प्योंगयांग/नई दिल्ली। उत्तर कोरिया के तानाशाह किम जोंग उन ने एक बार फिर अपनी सत्ता पर पकड़ की ताकत दुनिया को दिखा दी है। साल 2026 के संसदीय चुनावों में किम जोंग उन की 'वर्कर्स पार्टी ऑफ कोरिया' ने अपने सहयोगियों के साथ मिलकर क्लीन स्वीप किया है। सरकारी मीडिया 'योनहाप' और KCNA की रिपोर्टों के अनुसार, किम की पार्टी को 99.93 प्रतिशत वोट मिले हैं, जिसके साथ ही उन्होंने संसद की सभी सीटों पर कब्जा जमा लिया है। हालांकि, इस बार के चुनाव परिणामों में एक ऐसी बात सामने आई है जिसने पूरी दुनिया के विशेषज्ञों को हैरान कर दिया है।
15 मार्च को हुआ मतदान, हर सीट पर सिर्फ एक उम्मीदवार
यह चुनाव 15 मार्च को सुप्रीम पीपल्स असेंबली (संसद) के 15वें कार्यकाल के सदस्यों को चुनने के लिए आयोजित किया गया था। उत्तर कोरिया की चुनावी प्रक्रिया दुनिया के अन्य लोकतांत्रिक देशों से बिल्कुल अलग है। यहां हर निर्वाचन क्षेत्र में केवल एक ही उम्मीदवार मैदान में होता है, जिसे किम जोंग उन की सरकार पहले ही मंजूरी दे चुकी होती है। मतदाताओं के पास कोई दूसरा विकल्प नहीं होता, उन्हें केवल उस इकलौते उम्मीदवार को 'हां' या 'ना' में चुनना होता है।
0.07% लोगों ने दिखाया 'ना' का दम, 1957 के बाद पहली बार स्वीकार किया विरोध
इस चुनाव की सबसे चौंकाने वाली खबर यह है कि किम जोंग उन की सरकार ने पहली बार आधिकारिक तौर पर यह स्वीकार किया है कि कुछ लोगों ने उनके उम्मीदवारों के खिलाफ वोट दिया है। आंकड़ों के मुताबिक, 0.07 प्रतिशत मतदाताओं ने आधिकारिक उम्मीदवारों को 'अस्वीकार' किया। उत्तर कोरिया के इतिहास में 1957 के बाद यह पहली बार है जब सरकारी मीडिया ने सार्वजनिक रूप से "नहीं" वोटों (Negative Votes) की मौजूदगी को स्वीकार किया है। जानकारों का मानना है कि यह किम सरकार द्वारा दुनिया को अपनी 'पारदर्शिता' दिखाने की एक कोशिश हो सकती है।
मतदान का रिकॉर्ड: समुद्र में होने के कारण कुछ नहीं डाल सके वोट
आधिकारिक रिकॉर्ड बताते हैं कि पंजीकृत मतदाताओं में से लगभग सभी ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। रिपोर्ट के अनुसार, केवल 0.0037 प्रतिशत मतदाता ऐसे थे जो विदेश में होने या समुद्र में ड्यूटी पर होने के कारण वोट नहीं दे सके। वहीं, मतदान से दूरी बनाने वाले लोगों की संख्या न के बराबर (0.00003 प्रतिशत) रही।
687 प्रतिनिधि चुने गए, संविधान संशोधन से और मजबूत हुए किम
देश के चुनाव कानूनों के तहत, श्रमिकों, किसानों, बुद्धिजीवियों और सैन्य कर्मियों सहित कुल 687 प्रतिनिधियों को सर्वोच्च जनसभा के लिए चुना गया है। बता दें कि 2011 में अपने पिता किम जोंग इल की मृत्यु के बाद सत्ता संभालने वाले किम जोंग उन ने 2019 में संविधान में बड़े बदलाव किए थे। इन बदलावों के बाद किम को आधिकारिक तौर पर राष्ट्राध्यक्ष घोषित किया गया और सरकार, सेना तथा सभी राज्य संस्थानों पर उनका एकाधिकार "एकल" और अटूट बना दिया गया।