ईरान में नोबेल विजेता नरगिस मोहम्मदी को फिर 7 साल की जेल भूख हड़ताल के बीच कोर्ट का कड़ा फैसला
News India Live, Digital Desk : ईरान में मानवाधिकारों और महिलाओं के हक की आवाज बुलंद करने वाली नोबेल शांति पुरस्कार विजेता नरगिस मोहम्मदी (Narges Mohammadi) की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। पहले से ही जेल में बंद 53 वर्षीय कार्यकर्ता को ईरान की एक अदालत ने शनिवार को साढ़े सात साल (7.5 years) की अतिरिक्त जेल की सजा सुनाई है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब नरगिस अपनी 'अवैध हिरासत' के खिलाफ जेल में भूख हड़ताल पर बैठी थीं।
किन आरोपों में मिली नई सजा?
नरगिस मोहम्मदी के वकील मुस्तफा नीली के अनुसार, अदालत ने उन्हें दो अलग-अलग आरोपों में सजा सुनाई है:
षड्यंत्र और मिलीभगत: राष्ट्रीय सुरक्षा के खिलाफ अपराध करने के इरादे से इकट्ठा होने के लिए 6 साल की कैद।
दुष्प्रचार (Propaganda): सरकार के खिलाफ प्रोपेगेंडा फैलाने के आरोप में डेढ़ साल की अतिरिक्त सजा।
इसके अलावा, कोर्ट ने उन पर 2 साल का यात्रा प्रतिबंध लगाया है और रिहाई के बाद उन्हें दक्षिण खुरासान प्रांत के खोसफ शहर में 2 साल के आंतरिक निर्वासन (Internal Exile) में रहने का आदेश दिया है।
भूख हड़ताल और गिरता स्वास्थ्य
नरगिस मोहम्मदी ने 2 फरवरी 2026 से अपनी हिरासत की स्थितियों और वकीलों से बात न करने देने के विरोध में भूख हड़ताल शुरू की थी। उनके समर्थकों और 'नरगिस फाउंडेशन' ने उनके स्वास्थ्य को लेकर चिंता जताई है। बताया जा रहा है कि जेल में उन्हें गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है, जिसके लिए उनके वकील ने जमानत की मांग भी की है।
कौन हैं नरगिस मोहम्मदी?
नरगिस मोहम्मदी को 2023 में नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। उन्होंने दशकों तक ईरान में महिलाओं के उत्पीड़न, मृत्युदंड और मानवाधिकारों के हनन के खिलाफ लड़ाई लड़ी है। उन्हें अब तक 13 बार गिरफ्तार किया जा चुका है और वह बीते कई वर्षों से अपने परिवार और जुड़वा बच्चों से दूर जेल की सलाखों के पीछे हैं।
वैश्विक प्रतिक्रिया: एमनेस्टी इंटरनेशनल और कई मानवाधिकार संगठनों ने इस सजा को 'अन्यायपूर्ण' बताते हुए उनकी तत्काल रिहाई की मांग की है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह सजा ईरान में उठ रही असहमति की आवाजों को