मुझसे ज़्यादा इस अवॉर्ड का हकदार कोई नहीं ,नोबेल पर डोनाल्ड ट्रंप के बयान ने दुनिया को चौंकाया
News India Live, Digital Desk: अक्सर डोनाल्ड ट्रंप अपने बयानों के लिए खबरों में रहते हैं, लेकिन इस बार उन्होंने एक ऐसी बात कही है जिसने न केवल अमेरिका, बल्कि भारत और पाकिस्तान में भी लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। ट्रंप का मानना है कि उन्हें 'नोबेल शांति पुरस्कार' मिलना चाहिए था और इसके पीछे उन्होंने एक ऐसी वजह बताई है, जिस पर सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में जमकर चर्चा हो रही है।
वो बड़ा दावा क्या है?
एक कार्यक्रम के दौरान डोनाल्ड ट्रंप ने बड़े आत्मविश्वास के साथ कहा कि उन्होंने एक बहुत बड़ा युद्ध होने से रोक दिया था। उनके मुताबिक, भारत और पाकिस्तान के बीच स्थिति बेहद तनावपूर्ण थी और अगर उन्होंने दखल न दिया होता, तो शायद लाखों लोग मारे जाते। ट्रंप का कहना है कि इसी ऐतिहासिक कोशिश की वजह से वे नोबेल शांति पुरस्कार के असली हकदार हैं।
युद्ध और शांति का वह दौर
अगर हम कुछ समय पीछे मुड़कर देखें, तो भारत और पाकिस्तान के बीच कुछ मौकों पर कूटनीतिक तनाव काफी बढ़ा था। हालाँकि, ट्रंप के इस दावे पर दोनों ही देशों की ओर से कोई आधिकारिक मुहर नहीं लगी है, लेकिन ट्रंप अक्सर यह कहते रहे हैं कि उनके विदेशी नेताओं के साथ अच्छे व्यक्तिगत रिश्तों ने दुनिया में कई बार 'धमाकों' को शांत किया है। उनके समर्थकों का मानना है कि ट्रंप की 'अनप्रिडिक्टेबल' शैली कभी-कभी बड़े संकटों को टालने में मदद करती है।
"मुझसे ज़्यादा कौन डिज़र्व करता है?"
ट्रंप अक्सर इस बात पर नाराज़गी जताते रहे हैं कि पूर्व राष्ट्रपति ओबामा को तो आते ही नोबेल मिल गया, लेकिन उनके (ट्रंप) प्रयासों को उस तरह से नहीं सराहा गया। उन्होंने साफ़ कहा, "कोई भी नोबेल का उतना हकदार नहीं है जितना मैं हूँ।" यह पहली बार नहीं है जब ट्रंप ने खुद की तुलना महान शांतिदूतों से की हो, लेकिन इस बार भारत-पाक के नाम का सहारा लेकर उन्होंने मामले को दिलचस्प बना दिया है।
लोगों का क्या कहना है?
जैसे ही यह बयान आया, सोशल मीडिया पर चर्चाओं का बाज़ार गर्म हो गया। कुछ लोग इसे उनकी राजनीतिक शैली का हिस्सा मान रहे हैं, तो कुछ लोग सवाल उठा रहे हैं कि क्या हकीकत में परदे के पीछे ऐसा कुछ हुआ था जिसका श्रेय अब ट्रंप मांग रहे हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि अंतरराष्ट्रीय रिश्तों में शांति बनाए रखने के लिए कई देशों के आपसी प्रयास होते हैं, जिसे ट्रंप सिर्फ अपनी 'पर्सनल जीत' की तरह पेश कर रहे हैं।