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March 26 2026 04:38 pm

Nitish Kumar Controversy : पिता अपनी बेटी को नहीं टोक सकता? मांझी ने CM का बचाव करते हुए पूछा तीखा सवाल

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News India Live, Digital Desk : बिहार की राजनीति में कब क्या हो जाए, कोई नहीं बता सकता। यहाँ मुद्दे बाद में आते हैं, 'बवाल' पहले मच जाता है। अभी ताज़ा मामला मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (Nitish Kumar) और उनके एक कथित इशारे से जुड़ा है, जिसे 'हिजाब विवाद' का नाम दिया जा रहा है। सोशल मीडिया से लेकर सड़कों तक विपक्ष ने इस मुद्दे पर सीएम को घेर रखा है।

लेकिन अब इस अखाड़े में 'हम' पार्टी के मुखिया और केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी (Jitan Ram Manjhi) की एंट्री हो गई है। और भाई साहब, मांझी जी ने अपनी स्टाइल में ऐसा जवाब दिया है कि विपक्ष बगलें झांकने पर मजबूर हो जाए।

"वो कोई 20 साल के लड़के नहीं हैं"

दरअसल, नीतीश कुमार ने एक कार्यक्रम में कथित तौर पर एक महिला से नकाब या चेहरा ढकने वाले कपड़े को हटाने का इशारा किया था। इस पर बवाल मच गया। विपक्ष, खासकर तेजस्वी यादव ने इसे महिलाओं का अपमान बता दिया।

इस पर मांझी जी का गुस्सा फूट पड़ा। उन्होंने साफ़ शब्दों में कहा— "अरे भाई, नीतीश कुमार की उम्र 73-74 साल है। वो कोई 20 साल के 'लौंडे' (लड़के) थोड़े ही हैं जो किसी लड़की को बुरी नज़र से देखेंगे?"

मांझी का कहना है कि लोग बात का बतंगड़ बना रहे हैं। नीतीश कुमार एक अभिभावक, एक पिता और एक गार्जियन (Guardian) की तरह हैं। अगर कोई बड़ा-बुजुर्ग अपनी बच्ची या बेटी से यह कह दे कि "चेहरा हटाओ, ज़रा हम भी तो देखें", तो इसमें 'सेकशुअल' या अपमानजनक क्या है?

तेजस्वी की 'सोच' पर वार

मांझी ने आरजेडी (RJD) और तेजस्वी यादव पर सीधा हमला बोला। उन्होंने कहा कि जिनकी खुद की सोच "घटिया" होती है, उन्हें हर चीज़ में बुराई ही नज़र आती है। मांझी ने तर्क दिया कि अगर एक बाप अपनी बेटी को कोई सलाह देता है या टोकता है, तो उसे 'छेड़खानी' नहीं कहते। यह तो प्यार और आशीर्वाद का तरीका है।

उन्होंने यह भी याद दिलाया कि नीतीश कुमार वही नेता हैं जिन्होंने बिहार की लड़कियों को साइकिल दी, पोशाक दी और उन्हें घर की चारदीवारी से निकालकर स्कूल-कॉलेज भेजा। ऐसे नेता पर 'मर्यादा' तोड़ने का आरोप लगाना बेवकूफी है।

मामला क्या था?

जो लोग नहीं जानते, उन्हें बता दें कि बांका (Banka) में एक कार्यक्रम के दौरान नीतीश कुमार ने एक महिला को चेहरा कवर न करने का इशारा किया था। उनका शायद मतलब था कि नकाब की ज़रूरत नहीं है, खुलकर सामने आओ। लेकिन विपक्ष ने इसे 'हिजाब' से जोड़ दिया और इसे महिला सम्मान पर चोट बता दिया।

अब मांझी के बयान के बाद यह लड़ाई 'पिता समान नेता' बनाम 'युवा विपक्ष' की हो गई है। खैर, बिहार में चुनाव नजदीक हैं तो ऐसे बयान और विवाद तो अभी 'ट्रेलर' मात्र हैं, पिक्चर अभी बाकी है।