नीतीश कुमार के उत्तराधिकारी बनेंगे निशांत कुमार? संजय झा के बयान ने बिहार की सियासत में मचाया हड़कंप
News India Live, Digital Desk: बिहार की राजनीति में पिछले कई दशकों से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का दबदबा रहा है, लेकिन अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि उनके बाद 'जेडीयू' (JDU) और उनकी राजनीतिक विरासत की कमान कौन संभालेगा? इस बीच, जेडीयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा के एक ताजा बयान ने कयासों के बाजार को गर्म कर दिया है। चर्चाएं तेज हो गई हैं कि क्या नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार राजनीति में एंट्री करने वाले हैं और क्या वे अपने पिता के असली उत्तराधिकारी बनेंगे?
संजय झा के बयान से शुरू हुई चर्चा
एक निजी कार्यक्रम के दौरान जब संजय झा से नीतीश कुमार के उत्तराधिकारी को लेकर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने कुछ ऐसे संकेत दिए जिससे राजनीतिक गलियारों में खलबली मच गई। उन्होंने कहा कि पार्टी और नेतृत्व का फैसला समय आने पर होगा, लेकिन निशांत कुमार एक सुशिक्षित और शालीन व्यक्तित्व के धनी हैं। हालांकि उन्होंने सीधे तौर पर किसी नाम का ऐलान नहीं किया, लेकिन निशांत का जिक्र करना ही बिहार की राजनीति में एक बड़े बदलाव का संकेत माना जा रहा है।
कौन हैं निशांत कुमार और क्या है उनकी भूमिका?
नीतीश कुमार के इकलौते बेटे निशांत कुमार अब तक राजनीति की चकाचौंध से पूरी तरह दूर रहे हैं। पेशे से इंजीनियर निशांत को सादगी और आध्यात्मिक स्वभाव के लिए जाना जाता है। वह सार्वजनिक कार्यक्रमों में बहुत कम नजर आते हैं। लेकिन हाल के दिनों में पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं ने मांग उठाई है कि निशांत कुमार को राजनीति में सक्रिय होना चाहिए ताकि नीतीश कुमार की विरासत को सुरक्षित रखा जा सके।
विपक्ष ने साधा निशाना, परिवारवाद पर छिड़ी जंग
निशांत कुमार के नाम की चर्चा होते ही विपक्षी दलों ने एक बार फिर 'परिवारवाद' का मुद्दा उछाल दिया है। आरजेडी और अन्य दलों का कहना है कि जो नीतीश कुमार हमेशा परिवारवाद के खिलाफ बोलते रहे हैं, क्या अब वे भी अपने बेटे को राजनीति में आगे बढ़ाने की तैयारी कर रहे हैं? वहीं, जेडीयू समर्थकों का तर्क है कि अगर कोई अपनी योग्यता और कार्यकर्ताओं की इच्छा पर आगे आता है, तो उसे परिवारवाद नहीं कहना चाहिए।
क्या 2025 चुनाव से पहले होगा बड़ा ऐलान?
बिहार में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव को देखते हुए जेडीयू के भीतर नेतृत्व परिवर्तन की चर्चा काफी अहम है। राजनीतिक पंडितों का मानना है कि नीतीश कुमार अपनी पार्टी को एकजुट रखने के लिए किसी ऐसे चेहरे को आगे ला सकते हैं, जिस पर सभी की सहमति हो। क्या निशांत कुमार वह चेहरा होंगे या पार्टी किसी अनुभवी नेता पर दांव लगाएगी, यह आने वाले कुछ महीनों में साफ हो जाएगा। फिलहाल, संजय झा के बयान ने इस बहस को नया मोड़ दे दिया है।