Nipah Virus Alert: कोरोना से भी ज्यादा खतरनाक है 'निपाह' वायरस! दिमाग पर करता है सीधा हमला; जानें लक्षण और बचाव के तरीके

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नई दिल्ली/कोलकाता। भारत में जब भी संक्रामक बीमारियों की चर्चा होती है, तो डेंगू और मलेरिया का नाम जुबान पर आता है, लेकिन चिकित्सा जगत में 'निपाह वायरस' (Nipah Virus) को सबसे घातक खतरों में से एक माना जाता है। ताज़ा रिपोर्ट्स के अनुसार, पश्चिम बंगाल में संक्रमण के मामलों ने एक बार फिर चिंता बढ़ा दी है, जिसके बाद पड़ोसी देशों जैसे थाईलैंड और नेपाल ने हवाई अड्डों पर यात्रियों की थर्मल स्क्रीनिंग सख्त कर दी है। निपाह की सबसे डरावनी बात इसकी मृत्यु दर (Fatality Rate) है, जो कई मामलों में 70% से भी अधिक हो सकती है।

क्या है निपाह वायरस और यह कैसे फैलता है?

निपाह एक 'ज़ूनोटिक वायरस' है, यानी यह जानवरों से इंसानों में फैलता है।

मुख्य वाहक: इसके फैलने का सबसे बड़ा कारण 'फ्रूट बैट्स' (Fruit Bats) या फल खाने वाले चमगादड़ हैं।

संक्रमण का जरिया: चमगादड़ की लार, मूत्र या उनके द्वारा जूठे किए गए फलों के संपर्क में आने से यह वायरस इंसानों तक पहुँचता है।

खजूर का रस: भारत और बांग्लादेश में कच्चे खजूर के रस (Date Palm Sap) का सेवन संक्रमण का एक प्रमुख कारण रहा है, क्योंकि चमगादड़ अक्सर इन पेड़ों पर अपना बसेरा बनाते हैं।

इंसान से इंसान: संक्रमित व्यक्ति के निकट संपर्क में रहने वाले लोग भी आसानी से इसकी चपेट में आ सकते हैं।

मस्तिष्क पर 'निपाह' का सर्जिकल स्ट्राइक

सीके बिड़ला हॉस्पिटल (CMRI) के न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. दीप दास के अनुसार, यह वायरस शरीर की रक्त वाहिकाओं (Blood Vessels) में गंभीर सूजन पैदा करता है।

"यह सूजन वायरस को शरीर के 'ब्लड-ब्रेन बैरियर' को पार करने और सीधे मस्तिष्क तक पहुँचने में मदद करती है। इससे मस्तिष्क में भारी सूजन आ जाती है, जिसे मेडिकल भाषा में एन्सेफलाइटिस (Encephalitis) कहा जाता है।"

लक्षण: बुखार से लेकर कोमा तक का सफर

निपाह के लक्षण बहुत तेजी से बदलते हैं और मरीज की स्थिति बिगड़ने में देर नहीं लगती:

शुरुआती संकेत: तेज बुखार, सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द और सांस लेने में तकलीफ।

गंभीर स्थिति: मानसिक भ्रम (Confusion), सुस्ती, दौरे पड़ना और बेहोशी।

घातक परिणाम: मस्तिष्क में सूजन के कारण शरीर सांस लेने और हृदय गति जैसे महत्वपूर्ण कार्यों पर नियंत्रण खो देता है, जिससे मरीज कोमा में जा सकता है या उसकी मृत्यु हो सकती है।

बचाव ही एकमात्र उपचार: डॉ. दीप दास की सलाह

चूंकि निपाह के लिए अभी तक कोई सटीक टीका (Vaccine) या इलाज उपलब्ध नहीं है, इसलिए सावधानी ही सबसे बड़ा हथियार है:

फलों की जांच: जमीन पर गिरे हुए या पक्षियों द्वारा कुतरे गए फलों को बिल्कुल न छुएं और न ही खाएं।

पेय पदार्थ: कच्चे खजूर के रस के सेवन से पूरी तरह बचें।

साफ-सफाई: नियमित रूप से साबुन से हाथ धोएं और संक्रमित क्षेत्रों में जाने से बचें।

त्वरित कार्रवाई: यदि बुखार के साथ मानसिक भ्रम जैसे लक्षण दिखें, तो तुरंत अस्पताल जाएं और मरीज को आइसोलेशन में रखें।