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April 02 2026 10:42 pm

नौ रातें... नौ दिन... जब इन भजनों के बिना अधूरी है माँ की हर पूजा!

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शारदीय नवरात्रि का त्योहार शुरू हो चुका है और हर तरफ़ एक भक्ति और उल्लास का माहौल है। घरों में माँ दुर्गा की चौकी सज चुकी है, पंडालों में माँ की ख़ूबसूरत मूर्तियां विराज चुकी हैं, और हवा में एक ख़ास तरह की पवित्रता घुल गई है। नवरात्रि सिर्फ़ व्रत और पूजा-पाठ का ही नाम नहीं है, यह माँ के करीब आने का, उनके गुण गाने का और संगीत की लहरियों में डूबकर अपनी सारी चिंताएं भूल जाने का भी त्योहार है।

माँ की पूजा और आरती उनके भजनों और गीतों के बिना पूरी नहीं होती। संगीत में वो जादू है जो हमारे मन को सीधे ईश्वर से जोड़ देता है। तो इस नवरात्रि जब आप माँ की आराधना करें, तो इन 5 खास भजनों और कीर्तनों को अपनी प्लेलिस्ट में शामिल करना न भूलें। यकीन मानिए, आपकी पूजा का अनुभव दोगुना हो जाएगा।

1. "तूने मुझे बुलाया शेरावालिये"

यह सिर्फ़ एक भजन नहीं, एक भाव है। नरेंद्र चंचल जी की आवाज़ में इस भजन को सुनते ही मन में भक्ति की ऐसी लहर दौड़ जाती है कि ऐसा लगता है मानो पहाड़ों वाली माँ सचमुच हमें बुला रही हों। यह भजन दशकों से नवरात्रि का 'गान' रहा है। इसके बिना तो मानो माँ की चौकी ही शुरू नहीं होती।

2. "चलो बुलावा आया है, माता ने बुलाया है"
यह गीत एक और क्लासिक है जो सिनेमा के पर्दे से निकलकर हर घर के पूजा घर में बस गया है। इसे सुनते ही वैष्णो देवी के पहाड़ों का नज़ारा आँखों के सामने आ जाता है। इस गीत की सरलता और भक्ति मन को मोह लेती है और ऐसा लगता है मानो सचमुच देवी माँ का बुलावा आ गया हो।

3. "मैं बालक तू माता शेरावालिये"
ज़ुबिन नौटियाल द्वारा गाया गया यह भजन आज की युवा पीढ़ी की जुबान पर भी चढ़ गया है। यह भजन एक बच्चे के अपनी माँ से अपनी गलतियों के लिए क्षमा माँगने और उनकी शरण में आने जैसा है। इसके बोल इतने गहरे और हृदयस्पर्शी हैं कि इसे सुनते ही आँखें नम हो जाती हैं।

4. "प्यारा सजा है तेरा द्वार भवानी"
यह भजन नवरात्रि के दौरान हर तरफ दिखाई देने वाली खुशी और उल्लास का वर्णन करता है। लखबीर सिंह लाखा की जोशीली आवाज़ में यह गीत हमें नाचने पर मजबूर कर देता है। पंडालों में इसे सुनना एक अलग ही अनुभव है, जहाँ माँ के दरबार की सजावट देखकर हर कोई भक्ति में खो जाता है।

5. दुर्गा अमृतवाणी (अनुराधा पौडवाल)
यह एक भजन से कहीं बढ़कर, एक ध्यान है। अनुराधा पौडवाल जी की मधुर और शांत वाणी में 'दुर्गा अमृतवाणी' सुनने से मन को गहरी शांति और सुकून मिलता है। सुबह या शाम की आरती के समय इसे बजाने से घर का पूरा माहौल सकारात्मक और भक्तिमय हो जाता है।

तो इस नवरात्रि, अपनी पूजा की थाली के साथ संगीत की सूची भी तैयार रखें और माँ की भक्ति के इन मनमोहक धुनों में खो जाएँ। जय माता दी!

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