बिहार में 'हिजाब पर नया सियासी घमासान, ज्वेलरी शॉप के नियम पर जेडीयू नेता ने कह दी ये बड़ी बात

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News India Live, Digital Desk : राजनीति में अक्सर छोटी सी चिंगारी कब एक बड़ी आग का रूप ले लेती है, पता ही नहीं चलता। पिछले कुछ समय से बिहार के एक शहर में एक ज्वेलरी की दुकान पर लगे पोस्टर को लेकर खूब शोर मचा हुआ है। खबर आई थी कि वहां सुरक्षा का हवाला देकर बुर्के या हिजाब में एंट्री को लेकर कुछ नियम बनाए गए थे। देखते ही देखते ये खबर टीवी और सोशल मीडिया की हेडलाइन बन गई।

अब इस पूरे मामले पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू (JDU) की तरफ से बड़ा बयान सामने आया है। जेडीयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव रंजन ने साफ़ तौर पर कहा है कि यह "सरकार का फैसला नहीं है।"

मामला आखिर शुरू कहाँ से हुआ?
दरअसल, बिहार की कुछ बड़ी दुकानों या शो-रूम में अक्सर चोरी या सुरक्षा के लिहाज से नियम बनाए जाते हैं। ऐसी ही एक खबर उड़ी कि वहां हिजाब या चेहरे को ढकने वाले नकाब को हटाकर ही प्रवेश की बात कही गई है। विपक्ष ने इसे तुरंत सरकार के रवैये और अल्पसंख्यकों की भावनाओं से जोड़कर सवाल उठाने शुरू कर दिए।

राजीव रंजन ने क्या दी सफाई?
आज 8 जनवरी 2026 है, और माहौल की संवेदनशीलता को देखते हुए राजीव रंजन ने स्थिति साफ की। उन्होंने साफ़ शब्दों में कहा कि सरकार ने किसी भी समुदाय या धर्म के खिलाफ कोई पाबंदी नहीं लगाई है। यह पूरी तरह से एक निजी संस्थान (Private Establishment) का फैसला हो सकता है। जेडीयू नेता का कहना है कि उनकी सरकार समावेशी है और सबको साथ लेकर चलने में विश्वास रखती है। ऐसे में निजी फैसलों को 'सरकारी फरमान' मान लेना गलत होगा।

सुरक्षा बनाम धार्मिक भावना
अक्सर देखा गया है कि ज्वैलर्स या बैंक जैसे सुरक्षित संस्थानों में लोग सुरक्षा (Security Measures) की दुहाई देकर सीसीटीवी कैमरे में पहचान के लिए चेहरे को खुला रखने की शर्त रखते हैं। लेकिन जब यही बात हिजाब या धार्मिक पहचान से जुड़ जाती है, तो मामला काफी संवेदनशील हो जाता है। लोग सवाल पूछ रहे हैं कि—क्या सुरक्षा के नाम पर किसी की धार्मिक परंपरा पर पाबंदी लगाना सही है? और अगर यह किसी की निजी दुकान है, तो वहां किसके कानून चलेंगे?

हमारी राय:
राजीव रंजन का यह बयान उन कयासों को विराम देने के लिए काफी है, जो सरकार पर उंगली उठा रहे थे। राजनीति अपनी जगह है, लेकिन ऐसी घटनाओं को सांप्रदायिक चश्मे से देखने के बजाय यह समझना जरूरी है कि नियम कानून का दायरा क्या है। जेडीयू ने अपनी तरफ से गेंद उन लोगों के पाले में डाल दी है जो इस पर अनावश्यक राजनीति कर रहे थे।

अब देखना यह होगा कि दुकानदार और ग्राहक इस मामले में किस तरह का आपसी तालमेल बिठाते हैं, जिससे न तो सुरक्षा में कोई समझौता हो और न ही किसी के सम्मान को ठेस पहुंचे।