निवेश का नया युग: बैंक जमा में गिरावट, शेयर बाजार और म्यूचुअल फंड में उछाल

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निवेश का नया दौर: भारत में निवेशकों के नज़रिए में बड़ा बदलाव आ रहा है। कभी बैंक डिपॉजिट और फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) निवेश के सबसे लोकप्रिय साधन हुआ करते थे, लेकिन अब लोग शेयर बाज़ार और म्यूचुअल फंड जैसे ज़्यादा रिटर्न वाले विकल्पों की ओर आकर्षित हो रहे हैं। रेटिंग एजेंसी क्रिसिल की एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, बैंक डिपॉजिट में गिरावट आ रही है, जो बैंकिंग सिस्टम के लिए चिंता का विषय हो सकता है।

क्रिसिल की एक रिपोर्ट के अनुसार, बैंक जमा में घरेलू क्षेत्र की हिस्सेदारी मार्च 2020 के 64% से घटकर मार्च 2025 में 60% रह गई है। यह गिरावट दर्शाती है कि निवेशक अब पारंपरिक जमाओं के बजाय पूंजी बाजार और म्यूचुअल फंड में निवेश करना पसंद कर रहे हैं। खास तौर पर, सावधि जमा और चालू एवं बचत खातों (CASA) में जमा राशि में गिरावट आई है।

यह बदलाव मध्यम से लंबी अवधि में बैंकों के लिए चुनौतियाँ खड़ी कर सकता है। क्रिसिल के अनुसार, जमा स्थिरता में कमी के कारण बैंकों को नकदी की कमी का सामना करना पड़ सकता है। इसके अलावा, बैंकों को जमाकर्ताओं को आकर्षित करने के लिए ऊँची ब्याज दरें देनी पड़ सकती हैं, जिससे उनकी उधारी लागत बढ़ जाएगी।

वित्त मंत्रालय ने भी इस मुद्दे पर चिंता व्यक्त की है और बैंकों को नकद जमा बढ़ाने और एमएसएमई व कृषि क्षेत्रों को ऋण बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। इन उपायों से बैंकों को अर्थव्यवस्था के महत्वपूर्ण क्षेत्रों को सहारा देने में मदद मिलेगी।

यह नया रुझान भारतीय अर्थव्यवस्था की परिपक्वता को दर्शाता है, लेकिन यह बैंकिंग प्रणाली की स्थिरता के लिए चुनौतियाँ भी पेश करता है। निवेशकों की एक नई पीढ़ी अब ज़्यादा जोखिम और ज़्यादा मुनाफ़े की ओर बढ़ रही है, जो भारत के वित्तीय बाज़ारों के भविष्य को नया आकार दे सकता है।

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