ईरान का परमाणु ढांचा पूरी तरह खत्म करो, अमेरिका को नेतन्याहू की दो टूक, क्या ट्रंप मानेंगे इजराइल की शर्त
News India Live, Digital Desk : मध्य पूर्व (Middle East) में एक बार फिर कूटनीतिक हलचल तेज हो गई है। इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अमेरिका और ईरान के बीच संभावित परमाणु समझौते को लेकर बेहद सख्त रुख अपनाया है। जेनेवा में होने वाली दूसरे दौर की बातचीत से ठीक पहले, नेतन्याहू ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को स्पष्ट संदेश दिया है कि इजराइल किसी भी ऐसे समझौते को स्वीकार नहीं करेगा जो ईरान के परमाणु कार्यक्रम को केवल 'रोकता' हो, बल्कि वह उसे पूरी तरह 'जड़ से खत्म' होते देखना चाहते हैं।
नेतन्याहू की 5 'रेड लाइन्स': समझौता तभी होगा जब...
यरूशलेम में प्रमुख अमेरिकी यहूदी संगठनों के सम्मेलन को संबोधित करते हुए नेतन्याहू ने अपनी पांच प्रमुख शर्तें रखी हैं, जिन्हें उन्होंने इजराइल और दुनिया की सुरक्षा के लिए अनिवार्य बताया है:
यूरेनियम का खात्मा: ईरान के पास मौजूद सारा संवर्धित यूरेनियम (Enriched Uranium) देश से बाहर भेजा जाना चाहिए।
ढांचागत विनाश: केवल संवर्धन रोकना काफी नहीं है, बल्कि उन मशीनों और इंफ्रास्ट्रक्चर को पूरी तरह नष्ट किया जाए जो संवर्धन की क्षमता रखते हैं।
मिसाइल प्रोग्राम पर लगाम: ईरान की बैलिस्टिक मिसाइलों की रेंज को 300 किमी के भीतर सीमित किया जाए।
आतंकी नेटवर्क पर नकेल: क्षेत्र में सक्रिय ईरानी समर्थक प्रॉक्सी समूहों और 'आतंक के धुरे' को पूरी तरह खत्म किया जाए।
सख्त निरीक्षण: ईरान के परमाणु ठिकानों की 'बिना किसी पूर्व सूचना' के प्रभावी और वास्तविक जांच होनी चाहिए।
ट्रंप और नेतन्याहू के बीच 'सहमति' या 'टकराव'?
रिपोर्ट्स के अनुसार, पिछले हफ्ते वाशिंगटन में डोनाल्ड ट्रंप और नेतन्याहू के बीच हुई मुलाकात में ईरान को लेकर लंबी चर्चा हुई। जहां ट्रंप कूटनीति और समझौते के जरिए समाधान निकालने के पक्ष में दिख रहे हैं, वहीं नेतन्याहू ने स्पष्ट कर दिया है कि वह समझौते की सफलता को लेकर "बेहद संशय में (Skeptical)" हैं। उनका मानना है कि ईरान बातचीत की आड़ में केवल समय खरीदता है और दुनिया को 'धोखा' देता है।
ईरान पर मंडरा रहा है युद्ध का खतरा?
यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति ने ईरान के पास अपने युद्धपोत और फाइटर जेट्स तैनात कर दिए हैं। हालांकि ट्रंप ने बातचीत को एक मौका देने की बात कही है, लेकिन सीबीएस (CBS) की रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने नेतन्याहू को आश्वासन दिया है कि यदि समझौता विफल होता है, तो अमेरिका ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल प्रोग्राम पर इजरायली हमलों (Israeli Strikes) का समर्थन करेगा।
बदलते समीकरण: 'सहायता से साझेदारी' की ओर
दिलचस्प बात यह भी है कि नेतन्याहू ने अमेरिका से मिलने वाली सैन्य सहायता को अगले 10 वर्षों में 'जीरो' करने का प्रस्ताव दिया है। वह चाहते हैं कि इजराइल अब केवल सहायता लेने वाला देश न रहे, बल्कि अमेरिका का एक स्वतंत्र रक्षा भागीदार (Partnership) बने और अपना घरेलू रक्षा उद्योग विकसित करे।