NEET for BPT & BOT: अब फिजियोथेरेपिस्ट बनना नहीं होगा आसान BPT और BOT में एडमिशन के लिए NEET अनिवार्य, बिना कट-ऑफ नहीं मिलेगी सीट

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News India Live, Digital Desk: मेडिकल की दुनिया में करियर बनाने वाले छात्रों के लिए केंद्र सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है। अब बैचलर ऑफ फिजियोथेरेपी (BPT) और बैचलर ऑफ ऑक्यूपेशनल थेरेपी (BOT) जैसे कोर्सेज में एडमिशन लेने के लिए NEET-UG परीक्षा को अनिवार्य कर दिया गया है। नेशनल कमीशन फॉर एलाइड एंड हेल्थकेयर प्रोफेशन्स (NCAHP) के इस नए निर्देश के बाद अब बिना नीट स्कोर के इन कोर्सेज में दाखिला लेना नामुमकिन होगा।

क्या है नया नियम और कट-ऑफ का चक्कर?

अब तक कई राज्यों और निजी कॉलेजों में BPT और BOT के लिए डायरेक्ट एडमिशन या अलग प्रवेश परीक्षाएं होती थीं, लेकिन अब नियम पूरी तरह बदल गए हैं:

NEET अनिवार्य: अब छात्रों को नीट परीक्षा में बैठना ही होगा।

मिनिमम कट-ऑफ: केवल परीक्षा देना काफी नहीं है, बल्कि NCAHP द्वारा निर्धारित न्यूनतम कट-ऑफ पर्सेंटाइल हासिल करना भी जरूरी होगा।

सेंट्रलाइज्ड काउंसलिंग: एडमिशन की प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी बनाने के लिए काउंसलिंग के जरिए ही सीटें आवंटित की जाएंगी।

क्यों लिया गया यह फैसला?

सरकार का उद्देश्य पैरामेडिकल और एलाइड हेल्थकेयर सेक्टर में शिक्षा की गुणवत्ता (Quality of Education) को सुधारना है। NCAHP का मानना है कि फिजियोथेरेपी और ऑक्यूपेशनल थेरेपी जैसे क्षेत्र सीधे तौर पर मरीजों की रिकवरी से जुड़े हैं, इसलिए इन कोर्सेज में केवल योग्य और प्रतिभावान छात्रों को ही प्रवेश मिलना चाहिए। इस कदम से देशभर के संस्थानों में एक समान मानक (Standardization) लागू हो सकेंगे।

छात्रों पर क्या होगा असर?

इस फैसले का सबसे बड़ा असर उन छात्रों पर पड़ेगा जो नीट की कठिन प्रतिस्पर्धा से बचने के लिए सीधे इन कोर्सेज का रुख करते थे।

प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी: अब नीट के लाखों अभ्यर्थियों के बीच इन कोर्सेज के लिए भी होड़ मचेगी।

कोर्स की वैल्यू: विशेषज्ञों का मानना है कि इस नियम से BPT और BOT कोर्सेज की वैल्यू एमबीबीएस और बीडीएस के समकक्ष बढ़ेगी।

तैयारी का नया नजरिया: अब छात्रों को अपनी तैयारी का स्तर नीट के सिलेबस के अनुसार ही रखना होगा।