पाकिस्तान में कुदरत का कहर जारी, खैबर पख्तूनख्वा में बाढ़ से मरने वालों की संख्या 340 के पार, लाखों बेघर

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हमारे पड़ोसी देश पाकिस्तान से इस वक्त दिल दहला देने वाली और भयावह तस्वीरें सामने आ रही हैं। मूसलाधार मानसूनी बारिश के बाद आई विनाशकारी बाढ़ ने देश के कई हिस्सों में 'जल प्रलय' जैसे हालात पैदा कर दिए हैं, लेकिन सबसे ज़्यादा तबाही और मौत का तांडव खैबर पख्तूनख्वा (Khyber Pakhtunkhwa) प्रांत में देखने को मिल रहा है। यहां अचानक आई बाढ़ (Flash Flood) के कारण स्थिति इतनी भयावह हो चुकी है कि मरने वालों का आधिकारिक आंकड़ा 340 को पार कर गया , और यह संख्या लगातार बढ़ती जा रही है।

नदियां अपने रौद्र रूप में हैं और गांव के गांव पानी में समाते जा रहे हैं। हजारों घर ताश के पत्तों की तरह ढह गए हैं, पुल और सड़कें बह गई हैं, और लाखों लोग अपना सब कुछ खोकर बेघर हो गए हैं। यह पाकिस्तान के इतिहास की सबसे भीषण प्राकृतिक आपदाओं में से एक बन गई , जिसने एक गंभीर मानवीय संकट को जन्म दिया है।

 

तबाही का खौफनाक मंजर: हर तरफ सिर्फ पानी और बर्बादी

खैबर पख्तूनख्वा, जो कि एक पहाड़ी प्रांत , इस बाढ़ से सबसे बुरी तरह प्रभावित हुआ । भारी बारिश के कारण नदियों का जलस्तर अचानक कई गुना बढ़ गया, जिससे निचले इलाकों में पानी घुस गया और लोगों को संभलने तक का मौका नहीं मिला।

  • बढ़ता मौत का आंकड़ा: बचाव कार्य जैसे-जैसे आगे बढ़ रहा है, मलबे और पानी से और शव बरामद हो रहे हैं, जिससे मृतकों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा । इनमें बड़ी संख्या में महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं, जो बाढ़ के तेज बहाव में बह गए।
  • हजारों घर जमींदोज: प्रांत के कई जिलों में हजारों मिट्टी और कंक्रीट के घर पानी के तेज बहाव को झेल नहीं पाए और ढह गए। लोग खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं।
  • बुनियादी ढांचे का विनाश: बाढ़ ने प्रांत को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ने वाले कई महत्वपूर्ण पुलों, सड़कों और कम्युनिकेशन लाइनों को नष्ट कर दिया है। इससे बचाव और राहत कार्यों में भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा । कई इलाके पूरी तरह से कट गए हैं, जहां पहुंचना लगभग नामुमकिन हो गया है।
  • लाखों लोग विस्थापित: अनुमान अकेले खैबर पख्तूनख्वा में लाखों लोगों को अपना घर-बार छोड़कर सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन करना पड़ा । इन लोगों के पास न तो खाने को कुछ  और न ही पीने का साफ पानी।

 

क्यों बन रहे हैं ऐसे विनाशकारी हालात? (जलवायु परिवर्तन का एंगल)

हालांकि पाकिस्तान में मानसून के दौरान बाढ़ आना कोई नई बात नहीं है, लेकिन पिछले कुछ सालों में इन घटनाओं की तीव्रता और विनाशकारी क्षमता बहुत बढ़ गई । पर्यावरण विशेषज्ञ और वैज्ञानिक इसके पीछे जलवायु परिवर्तन (Climate Change) और ग्लोबल वार्मिंग को एक बड़ा कारण मान रहे हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण मौसम का पैटर्न अनियमित हो गया है। अब कम समय में बहुत अधिक बारिश हो रही है , जिसे संभालने की क्षमता न तो नदियों में  और न ही दशकों पुराने इंफ्रास्ट्रक्चर में। यह सिर्फ एक मौसमी घटना नहीं, बल्कि एक बड़ी चेतावनी ਹੈ कि अगर प्रकृति के साथ खिलवाड़ बंद नहीं हुआ तो भविष्य में इससे भी भयानक परिणाम देखने को मिल सकते हैं।

 

सरकार की प्रतिक्रिया और बचाव अभियान

तबाही के इस मंजर के बीच, पाकिस्तानी सेना, राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) और स्थानीय बचाव दल युद्ध स्तर पर राहत और बचाव कार्यों में जुटे हुए हैं।

  • आपातकाल की घोषणा: प्रांत में आपातकाल (Emergency)  की घोषणा कर दी गई है और अंतरराष्ट्रीय सहायता के लिए भी अपील की जा रही है।
  • बचाव कार्य में चुनौतियां: टूटी सड़कों और पुलों के कारण बचाव दल को प्रभावित इलाकों तक पहुंचने में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा । लोगों को हेलीकॉप्टरों की मदद से एयरलिफ्ट किया जा रहा है और उन तक खाने-पीने का सामान पहुंचाया जा रहा है।
  • बीमारियों का खतरा: बाढ़ के बाद अब प्रभावित इलाकों में हैजा, डायरिया, डेंगू और मलेरिया जैसी पानी से होने वाली बीमारियों के फैलने का गंभीर खतरा मंडराने लगा है।

यह आपदा पाकिस्तान के लिए एक बड़ी परीक्षा की घड़ी है। आने वाले दिन बाढ़ पीड़ितों के लिए और भी मुश्किल भरे हो सकते हैं, क्योंकि असली चुनौती बाढ़ का पानी उतरने के बाद शुरू होगी, जब पुनर्वास और पुनर्निर्माण का विशाल कार्य सामने होगा।

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