बंगाल की खाड़ी से उठे भीषण चक्रवात मुरासु का आंध्र तट पर तांडव शुरू

बंगाल की खाड़ी से उठे भीषण चक्रवात मुरासु का आंध्र तट पर तांडव शुरू

बंगाल की खाड़ी में तेजी से गहराए कम दबाव के क्षेत्र ने विकराल रूप धारण करते हुए गंभीर चक्रवाती तूफान 'मुरासु' (Severe Cyclonic Storm Murasu) का रूप ले लिया और मंगलवार तड़के इसने दक्षिणी आंध्र प्रदेश के तट पर भीषण दस्तक दे दी। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, तूफान के लैंडफॉल की प्रक्रिया आधी रात के बाद करीब 1:00 बजे शुरू हुई और तड़के 3:30 से 5:30 बजे के बीच तूफान का मुख्य केंद्र नेल्लोर और नरसापुर के बीच, प्रकाशम जिले के ओंगोल के निकट तट को पार कर गया। तट से टकराते समय हवा की निरंतर गति 100 से 110 किलोमीटर प्रति घंटा दर्ज की गई, जबकि तूफानी झोंकों (गस्टिंग) की रफ्तार 120 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच गई। तेज हवाओं और मूसलाधार बारिश के प्रचंड प्रहार से समुद्र में 1 से 1.5 मीटर ऊंची तूफानी लहरें उठी हैं, जिससे निचले तटीय इलाकों में पानी भर गया और पेड़ व बिजली के खंभे उखड़ने से तटीय जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है। पिछले सप्ताह आए चक्रवात 'अर्नब' के बाद पूर्वी समुद्र तट पर सात दिनों के भीतर यह दूसरा बड़ा चक्रवाती हमला है, जिसने प्रशासनिक तंत्र को हाई अलर्ट पर ला खड़ा किया है।

आंध्र प्रदेश के तटीय जिलों में रेड अलर्ट और राहत-बचाव का महाअभियान

मौसम विभाग ने चक्रवात मुरासु के सीधे प्रभाव को देखते हुए दक्षिण तटीय आंध्र प्रदेश के बापटला, प्रकाशम, नेल्लोर और कृष्णा जिलों में अत्यधिक भारी बारिश के लिए 'रेड अलर्ट' जारी किया है। तूफान के केंद्र ओंगोल और कोठापट्टनम बीच के आसपास समुद्री हवाओं ने भारी तबाही मचाई है, जहां कई कच्चे मकानों की छतें उड़ गईं और कई प्रमुख मार्गों पर विशालकाय वृक्ष गिरने से संपर्क कट गया। आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण और सभी तटीय जिला कलेक्टरों के साथ आपातकालीन समीक्षा बैठक की है। राज्य सरकार ने तटीय और बाढ़ संभावित बस्तियों से हजारों नागरिकों को सुरक्षित निकालकर राहत शिविरों में स्थानांतरित कर दिया है। आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) और राज्य आपदा मोचन बल (SDRF) की दर्जनों टीमों को ग्राउंड जीरो पर तैनात किया गया है, जो पेड़ हटाने और बिजली ग्रिड की तुरंत बहाली के काम में जुटी हुई हैं।

ओडिशा के 5 दक्षिणी जिलों में स्कूल बंद और 1.6 लाख से अधिक लोग सुरक्षित शिफ्ट

चक्रवात मुरासु का व्यापक असर पड़ोसी राज्य ओडिशा पर भी पड़ा है, जहां दक्षिणी जिलों में भारी बारिश और भूस्खलन की आशंका जताई गई है। स्थिति की संवेदनशीलता को देखते हुए ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी और विशेष राहत आयुक्त (SRC) ने हाई-लेवल बैठक के बाद पांच दक्षिणी जिलों—गंजम, गजपति, कंधमाल, कोरापुट और मलकानगिरी में सभी सरकारी व निजी स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों को बंद रखने का आदेश दिया है। चक्रवात 'अर्नब' से पहले ही प्रभावित रहे इन जिलों में जमीन में नमी अधिक होने के कारण भूस्खलन का खतरा सबसे ज्यादा है। ओडिशा प्रशासन ने फुर्ती दिखाते हुए संवेदनशील पहाड़ी और निचले इलाकों से 1.60 लाख से अधिक लोगों को सुरक्षित चक्रवात आश्रय स्थलों (Cyclone Shelters) में पहुंचा दिया है। राहत शिविरों में भोजन, शुद्ध पेयजल और दवाओं के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं, जबकि नबरंगपुर और आसपास के जिलों में 5 नवंबर तक सरकारी कर्मचारियों की छुट्टियां रद्द कर दी गई हैं।

हवाई उड़ानों और रेल सेवाओं पर ब्रेक, जनजीवन थमा

चक्रवात मुरासु के लैंडफॉल और खराब दृश्यता के चलते पूर्वी तट पर परिवहन सेवाएं बुरी तरह चरमरा गई हैं। एहतियाती कदम उठाते हुए विजयवाड़ा, विशाखापट्टनम, तिरुपति और चेन्नई हवाई अड्डों से संचालित होने वाली 30 से अधिक उड़ानों को रद्द या डायवर्ट कर दिया गया है। केवल विजयवाड़ा एयरपोर्ट से ही इंडिगो की कई प्रमुख उड़ानें निरस्त की गईं। वहीं, दक्षिण मध्य रेलवे और पूर्व तट रेलवे ने तटीय रूटों पर चलने वाली 9 से अधिक एक्सप्रेस व पैसेंजर ट्रेनों को रद्द किया है, जबकि दर्जनों ट्रेनों को नियंत्रित गति से या वैकल्पिक मार्गों से चलाया जा रहा है। रेलवे ने स्टेशनों पर यात्रियों की मदद के लिए हेल्पडेस्क स्थापित किए हैं और पटरियों पर पानी भरने की स्थिति में त्वरित जल निकासी के लिए पंपिंग सेट तैनात किए हैं।

तमिलनाडु और तेलंगाना तक दिखा असर, समुद्र में जाने पर पाबंदी

मुरासु चक्रवात का प्रभाव केवल आंध्र और ओडिशा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उत्तरी तमिलनाडु, पुडुचेरी और तेलंगाना के कई हिस्सों में भी गरज-चमक के साथ मूसलाधार बारिश का दौर शुरू हो गया है। चेन्नई और तिरुवल्लूर के तटीय इलाकों में तेज हवाओं के साथ बारिश जारी है। मौसम विज्ञान केंद्र ने चेतावनी दी है कि चक्रवात जमीन के भीतर प्रवेश करने के बाद धीरे-धीरे कमजोर होकर गहरे दबाव (Deep Depression) में तब्दील होगा, लेकिन इसके असर से अगले 24 से 48 घंटों तक तेलंगाना और रायलसीमा के कई इलाकों में अचानक बाढ़ (Flash Floods) की स्थिति बन सकती है। मछुआरों को 4 नवंबर की शाम तक बंगाल की खाड़ी के मध्य और पश्चिमी तटीय जलक्षेत्र में न जाने की सख्त चेतावनी दी गई है, क्योंकि समुद्र में ऊंची लहरें और अशांत मौसम का खतरा लगातार बना हुआ है।

युद्ध के नगाड़े के नाम पर पड़ा 'मुरासु' नाम

उल्लेखनीय है कि इस चक्रवाती तूफान का नाम 'मुरासु' भारत द्वारा सुझाया गया है, जो उत्तरी हिंद महासागर क्षेत्र के चक्रवातों की नामकरण सूची का हिस्सा है। तमिल संस्कृति में 'मुरासु' प्राचीन काल में बजने वाले पारंपरिक युद्ध के नगाड़े (War Drum) को कहा जाता है, जो किसी बड़े संकट या युद्ध की घोषणा का प्रतीक होता था। मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि समुद्र की सतह का अत्यधिक तापमान (करीब 29 डिग्री सेल्सियस) और अनुकूल वायुमंडलीय परिस्थितियों के चलते यह तूफान तेजी से तीव्र हुआ और तट से टकराते वक्त विनाशकारी साबित हुआ। प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों के नागरिकों से अपील की है कि वे पक्के मकानों में शरण लें, बिजली के टूटे तारों और जलभराव वाले रास्तों से दूर रहें और किसी भी आपात स्थिति में राज्य हेल्पलाइन 112 या 1070 पर तुरंत संपर्क करें।