सुप्रीम कोर्ट का पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने से इनकार: दिल्ली-NCR में दिवाली पर केवल ग्रीन पटाखों को सशर्त मंजूरी, जानें समय और नियम
दिवाली से ठीक पहले दिल्ली-एनसीआर में बढ़ते वायु प्रदूषण के बीच सुप्रीम कोर्ट ने पटाखों के उपयोग पर एक अहम और संतुलित फैसला सुनाया है। शीर्ष अदालत ने पटाखों पर पूरी तरह से 'ब्लैंकेट बैन' (पूर्ण प्रतिबंध) लगाने की मांग वाली याचिकाओं पर कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया कि अदालत न तो पटाखों पर पूर्ण पाबंदी लगाएगी और न ही 24 घंटे लगातार आतिशबाजी की बेलगाम छूट देगी। जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और जस्टिस प्रसन्ना बी. वराले की पीठ ने कहा कि त्योहारों की धार्मिक परंपराओं, जनभावनाओं और नागरिकों के स्वच्छ हवा व स्वास्थ्य के मौलिक अधिकार के बीच एक व्यावहारिक संतुलन बनाना बेहद आवश्यक है। अदालत ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में केवल वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित 'ग्रीन क्रैकर्स' (हरित पटाखे) को निर्धारित समय-सीमा के भीतर जलाने की सशर्त अनुमति दी है।
पटाखे जलाने की तय टाइमिंग: सुबह और शाम केवल निर्धारित घंटे
सर्वोच्च न्यायालय ने प्रदूषण नियंत्रण और सार्वजनिक शांति को ध्यान में रखते हुए आतिशबाजी के लिए कड़े समय स्लॉट निर्धारित किए हैं। आदेश के अनुसार, लोग मनमाने समय पर पटाखे नहीं जला सकेंगे। अनुमत दिनों में केवल निम्नलिखित तय समय पर ही ग्रीन पटाखे जलाए जा सकेंगे:
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सुबह का समय: प्रातः 06:00 बजे से सुबह 07:00 बजे तक (कुल 1 घंटा)
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शाम और रात का समय: रात 08:00 बजे से रात 10:00 बजे तक (कुल 2 घंटे)
(नोट: अदालत ने साफ निर्देश दिया है कि रात 10:00 बजे के बाद और सुबह 6:00 बजे से पहले किसी भी तरह की आतिशबाजी पर पूर्ण रोक रहेगी। तय समय-सीमा का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ स्थानीय पुलिस को तुरंत एफआईआर और जब्ती की कार्रवाई करने का अधिकार दिया गया है)।
केवल 'प्रमाणित ग्रीन क्रैकर्स' को ही अनुमति, बेरियम वाले पटाखों पर प्रतिबंध जारी
अदालत के निर्देशानुसार, सामान्य या पारंपरिक पटाखों की बिक्री और इस्तेमाल पर पाबंदी पूरी तरह बरकरार रहेगी। केवल वही पटाखे वैध माने जाएंगे जो वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (CSIR-NEERI) और पेट्रोलियम तथा विस्फोटक सुरक्षा संगठन (PESO) द्वारा अधिकृत फॉर्मूले से तैयार किए गए हैं।
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हानिकारक रसायनों पर रोक: पटाखों में बेरियम नाइट्रेट, लिथियम, आर्सेनिक, लेड और मरकरी जैसे अत्यधिक विषैले भारी रसायनों के उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध जारी रहेगा।
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कम धुआं और कम शोर: ग्रीन क्रैकर्स सामान्य पटाखों की तुलना में 30% से 35% कम पर्टिकुलेट मैटर (PM 2.5 और PM 10) उत्सर्जित करते हैं और इनमें धूल व धुएं को दबाने वाले विशेष एडिटिव्स मौजूद होते हैं।
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क्यूआर कोड अनिवार्य: प्रत्येक वैध ग्रीन पटाखे के डिब्बे पर नीरी (NEERI) का आधिकारिक हरा लोगो और एक स्कैन करने योग्य 'क्यूआर कोड' (QR Code) होना अनिवार्य है, जिसे स्कैन करके कोई भी ग्राहक उसकी प्रामाणिकता जांच सकता है।
'साइलेंट जोन' में पटाखों पर पूर्ण रोक और ऑनलाइन बिक्री पर पाबंदी
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि आवासीय व वाणिज्यिक क्षेत्रों के अलावा कुछ संवेदनशील इलाकों को पूरी तरह 'नो-क्रैकर जोन' (No-Cracker Zones) घोषित किया गया है।
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संवेदनशील क्षेत्र: अस्पतालों, नर्सिंग होम, स्वास्थ्य केंद्रों, शैक्षणिक संस्थानों (स्कूल-कॉलेज), अदालतों और धार्मिक स्थलों के 100 मीटर के दायरे में किसी भी समय पटाखा जलाने की सख्त मनाही रहेगी।
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ऑनलाइन ई-कॉमर्स पर प्रतिबंध: अमेज़न, फ्लिपकार्ट या अन्य किसी भी ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म या सोशल मीडिया के जरिए पटाखों की ऑनलाइन बिक्री और डिलीवरी पर सख्त कानूनी रोक रहेगी।
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लाइसेंसी दुकानें: पटाखों की बिक्री केवल स्थानीय प्रशासन और पुलिस द्वारा आवंटित अस्थायी खुले मैदानों और अधिकृत लाइसेंसी दुकानों से ही की जा सकेगी। अनधिकृत फेरीवालों या अवैध भंडारण पर पुलिस छापेमारी कर माल तुरंत जब्त करेगी।
निर्देशों का उल्लंघन हुआ तो अधिकारियों पर होगी अवमानना की कार्रवाई
अदालत ने पुलिस और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB/DPCC) को चेतावनी दी है कि वे अपने पिछले आदेशों का मजाक न बनने दें। कोर्ट ने निर्देश दिया है कि संबंधित थाना क्षेत्रों के एसएचओ (SHO) अपने-अपने इलाकों में पटाखों के नियमों का अनुपालन सुनिश्चित कराने के लिए व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार होंगे। यदि किसी क्षेत्र में प्रतिबंधित पटाखों की खुली बिक्री या निर्धारित समय के बाद बड़े पैमाने पर आतिशबाजी पाई जाती है, तो अदालत संबंधित प्रशासनिक व पुलिस अधिकारियों के खिलाफ न्यायालय की अवमानना (Contempt of Court) के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई करेगी।