त्योहारों में चमका UPI: हर दिन ट्रांसफर हुए ₹1 लाख करोड़ से ज्यादा, अक्टूबर में ₹31.53 लाख करोड़ का नया ऐतिहासिक रिकॉर्ड
त्योहारी सीजन में भारतीय उपभोक्ताओं ने खरीदारी और लेन-देन के पारंपरिक तरीकों को पीछे छोड़ते हुए डिजिटल भुगतान में एक नया ऐतिहासिक कीर्तिमान स्थापित कर दिया है। नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) द्वारा जारी ताजा आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, अक्टूबर के महीने में यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस यानी यूपीआई (UPI) के जरिए कुल ₹31.53 लाख करोड़ का भारी-भरकम लेन-देन दर्ज किया गया। भारत के डिजिटल भुगतान इतिहास में यह पहला मौका है जब किसी एक महीने में यूपीआई के जरिए होने वाला लेन-देन ₹31 लाख करोड़ के आंकड़े को पार कर गया है। पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में ट्रांजैक्शन वैल्यू में 16 प्रतिशत की ठोस सालाना वृद्धि (YoY) देखी गई है। इस उछाल का सबसे अहम पहलू यह रहा कि पूरे महीने के दौरान प्रतिदिन औसतन ₹1 लाख करोड़ से अधिक की धनराशि यूपीआई के जरिए ट्रांसफर की गई, जिसने कैशलेस इकोनॉमी की ताकत को पूरी दुनिया के सामने साबित कर दिया है।
25.47 अरब ट्रांजैक्शन: रोजाना औसतन 82 करोड़ से अधिक भुगतान
अक्टूबर माह में केवल ट्रांजैक्शन की रकम ही नहीं बढ़ी, बल्कि लेन-देन की कुल संख्या (Volume) में भी अभूतपूर्व तेजी दर्ज की गई। पूरे महीने के दौरान यूपीआई नेटवर्क पर रिकॉर्ड 25.47 अरब (25.47 Billion) सफल ट्रांजैक्शन प्रोसेस किए गए, जो पिछले साल के मुकाबले 23 प्रतिशत की जोरदार बढ़त को दर्शाता है। दैनिक स्तर पर विश्लेषण करें तो भारत में प्रतिदिन औसतन 82.2 करोड़ (822 Million) ट्रांजैक्शन किए गए। इसका मतलब यह हुआ कि देश में हर एक सेकंड में 9,500 से अधिक भुगतानों का सुचारू निपटान हुआ। स्थानीय किराना दुकानों, बड़े शॉपिंग मॉल्स से लेकर ऑनलाइन ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स तक पर यूपीआई ही भुगतान का सबसे पसंदीदा और त्वरित माध्यम बना रहा।
त्योहारी खरीदारी, ई-कॉमर्स सेल और गोल्ड बुकिंग ने भरी रफ्तार
इस रिकॉर्डतोड़ उछाल के पीछे प्रमुख कारण शारदीय नवरात्रि, दशहरा और दिवाली-धनतेरस की पूर्व तैयारियों के दौरान बाजारों में उमड़ी भारी भीड़ रही। आमतौर पर यूपीआई का उपयोग छोटे भुगतानों (Micro-transactions) के लिए अधिक किया जाता था, लेकिन इस त्योहारी सीजन में बड़े टिकट साइज (Higher Value Transactions) के लेन-देन में भारी वृद्धि देखी गई। प्रमुख ई-कॉमर्स कंपनियों की फेस्टिव सेल, इलेक्ट्रॉनिक्स, होम अप्लायंसेज, कपड़े, होटल बुकिंग और ट्रैवल टिकटिंग के लिए उपभोक्ताओं ने यूपीआई को प्राथमिकता दी। इसके साथ ही सर्राफा बाजार में धनतेरस के लिए सोने-चांदी के सिक्कों और आभूषणों की अग्रिम बुकिंग के लिए भी ग्राहकों ने सीधे बैंक खातों से यूपीआई भुगतान का सहारा लिया, जिससे प्रति ट्रांजैक्शन औसत मूल्य में बड़ा इजाफा हुआ।
मर्चेंट पेमेंट्स में जबरदस्त पैठ: छोटे दुकानदारों से लेकर बड़े शोरूम तक क्यूआर कोड
अक्टूबर के आंकड़ों से यह भी स्पष्ट होता है कि पर्सन-टू-मर्चेंट (P2M यानी ग्राहक से दुकानदार को भुगतान) की हिस्सेदारी में लगातार विस्तार हो रहा है। देश के टियर-2, टियर-3 शहरों और ग्रामीण कस्बों तक साउंडबॉक्स और क्यूआर कोड (QR Code) की पहुंच ने फुटकर विक्रेताओं के बीच नकदी की निर्भरता को लगभग समाप्त कर दिया है। 95 प्रतिशत से अधिक पी2एम लेन-देन पूरी तरह मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) से मुक्त रहने के कारण छोटे व्यापारियों ने बिना किसी अतिरिक्त लागत के खुले दिल से डिजिटल पेमेंट स्वीकार किया। इसके अलावा क्रेडिट कार्ड को यूपीआई से लिंक करने की सुविधा (RuPay Credit Card on UPI) ने भी ग्राहकों की क्रय शक्ति को बढ़ाया, जिससे त्योहारी खरीदारी में अतिरिक्त बूस्ट देखने को मिला।
मजबूत डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और वैश्विक पटल पर धाक
25 अरब से अधिक मासिक ट्रांजैक्शन के भारी ट्रैफिक के बावजूद भारतीय बैंकिंग और यूपीआई का तकनीकी इंफ्रास्ट्रक्चर पूरी तरह स्थिर और लचीला बना रहा। सर्वर डाउनटाइम या ट्रांजैक्शन फेलियर की दर नगण्य स्तर पर रही, जिससे उपभोक्ताओं का भरोसा और मजबूत हुआ। घरेलू बाजार में नए कीर्तिमान स्थापित करने के साथ-साथ यूपीआई अब अंतरराष्ट्रीय सीमाओं को भी तेजी से पार कर रहा है और 11 से अधिक देशों में भारतीय यात्रियों के लिए स्वीकार्य हो चुका है। आर्थिक विशेषज्ञों का अनुमान है कि दिवाली, भाईदूज और आने वाले वेडिंग सीजन के चलते नवंबर में भी डिजिटल भुगतानों की यह आंधी इसी रफ्तार से जारी रहेगी, जो चालू वित्त वर्ष में भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूत खपत और उपभोग क्षमता का स्पष्ट संकेत देती है।