राष्ट्रपति संग सख्त ड्यूटी और शादी की पाबंदी! अचानक रिटायर हुए मेजर ऋषभ सिंह सांब्याल ने खोले सेना के सीक्रेट राज

राष्ट्रपति संग सख्त ड्यूटी और शादी की पाबंदी! अचानक रिटायर हुए मेजर ऋषभ सिंह सांब्याल ने खोले सेना के सीक्रेट राज

भारतीय सेना (Indian Army) में देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद यानी राष्ट्रपति के साथ बतौर एडीडीसी (Aide-de-Camp - ADC) तैनात रहना किसी भी युवा सैन्य अधिकारी के लिए सबसे गौरवशाली और प्रतिष्ठित पलों में से एक माना जाता है, लेकिन इस चमक-धमक और प्रोटोकॉल के पीछे का सच बेहद कड़ा और अनुशासन से भरा होता है। हाल ही में सेना की नौकरी से अचानक और समय से पहले सेवानिवृत्ति (Early Retirement) लेने वाले मेजर ऋषभ सिंह सांब्याल ने राष्ट्रपति भवन के अंदर की दुनिया और एडीसी की नौकरी से जुड़े कई हैरान करने वाले और अनसुने राज दुनिया के सामने खोले हैं। मेजर ऋषभ सिंह सांब्याल ने अपने साक्षात्कारों और खुलासों में बताया है कि कैसे राष्ट्रपति के साथ 24 घंटे की इस बेहद सख्त और संवेदनशील ड्यूटी के दौरान अधिकारियों को अपने व्यक्तिगत जीवन, परिवार और यहां तक कि शादी जैसे अहम फैसलों तक को ताक पर रखना पड़ता है, जो आम आदमी की कल्पना से परे है।

क्या होती है राष्ट्रपति की एडीसी (ADC) की भूमिका और क्यों है यह देश की सबसे कठिन नौकरी

भारतीय सशस्त्र बलों में राष्ट्रपति के एडीसी (Aide-de-Camp) का चयन थल सेना, नौसेना और वायुसेना के सबसे बेहतरीन, कुशाग्र और अनुशासित युवा अधिकारियों में से बेहद कड़ी चयन प्रक्रिया के बाद किया जाता है। एडीसी का मुख्य काम देश के राष्ट्रपति के साए की तरह साथ रहना, उनके आधिकारिक दौरों, विदेशी मेहमानों के स्वागत, बैठकों और प्रोटोकॉल का प्रबंधन करना होता है। राष्ट्रपति चूंकि तीनों सेनाओं के सुप्रीम कमांडर होते हैं, इसलिए उनके साथ तैनात रहने वाले एडीसी को अपनी वर्दी, फिटनेस, शिष्टाचार और सतर्कता का स्तर हमेशा सर्वोच्च रखना पड़ता है। इस पद पर रहने वाले अधिकारी को एक मिनट की भी ढील देने की अनुमति नहीं होती है, क्योंकि वह सीधे तौर पर देश के प्रथम नागरिक की सुरक्षा और प्रतिष्ठा से जुड़े होते हैं।

शादी न करने की अनकही पाबंदी और व्यक्तिगत जीवन पर लगने वाले कड़े पहरे

मेजर ऋषभ सिंह सांब्याल ने अपने खुलासों में सबसे चौंकाने वाली बात यह बताई कि राष्ट्रपति भवन में एडीसी के रूप में तैनात रहने वाले अधिकारियों के लिए सेवाकाल के दौरान कई तरह की मानसिक और व्यावहारिक बंदिशें होती हैं, जिनमें व्यक्तिगत स्वतंत्रता बेहद सीमित हो जाती है। हालांकि लिखित रूप से विवाह पर पूर्ण प्रतिबंध का कोई कठोर नियम नहीं है, लेकिन व्यावहारिक रूप से इस उच्च-संवेदनशील और चौबीसों घंटे की ड्यूटी में रहते हुए वैवाहिक जीवन या परिवार संभालना लगभग असंभव हो जाता है। राष्ट्रपति के साथ तैनात एडीसी को अपना पूरा ध्यान केवल और केवल अपनी ड्यूटी और राष्ट्रपति के प्रोटोकॉल पर केंद्रित रखना पड़ता है। एक अधिकारी के रूप में उन्हें अपनी पर्सनल लाइफ, परिवार के सुख-दुख और सामाजिक जीवन को पूरी तरह से पीछे छोड़ना पड़ता है, क्योंकि देश सेवा और राष्ट्रपति की सुरक्षा उनके लिए सर्वोपरि होती है।

अचानक समय से पहले रिटायरमेंट का फैसला और मेजर ऋषभ सिंह सांब्याल के आगे के कदम

मेजर ऋषभ सिंह सांब्याल द्वारा सेना से समय से पहले रिटायरमेंट (Premature Retirement - Vridhi/PMR) लेने के फैसले ने रक्षा हलकों में खासी चर्चा छेड़ दी है। देश के सबसे प्रतिष्ठित और ग्लैमरस माने जाने वाले सैन्य पद को छोड़कर अचानक सामान्य जीवन की ओर लौटने के उनके इस फैसले के पीछे उनके व्यक्तिगत लक्ष्य, मानसिक शांति और जीवन की नई प्राथमिकताएं जुड़ी हुई हैं। सेना में सालों तक असाधारण सेवा देने और राष्ट्रपति के करीब रहकर देश का प्रतिनिधित्व करने के बाद, अब वे अपने करियर के एक नए अध्याय की शुरुआत कर रहे हैं। उनके इस खुलासे ने न केवल आम जनता को बल्कि सेना की तैयारी कर रहे युवाओं को भी यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि देश की वर्दी पहनने वाले सैनिक अपने निजी जीवन और खुशियों का कितना बड़ा बलिदान देकर हमारी सुरक्षा और देश की शान को बनाए रखते हैं।

राष्ट्रपति भवन के अंदर की दुनिया और सैन्य अनुशासन की मिसाल

राष्ट्रपति भवन के गलियारों में चलने वाली हर गतिविधि और हर प्रोटोकॉल के पीछे इन युवा एडीसी अधिकारियों का अदम्य साहस, रात-दिन की मेहनत और अटूट देशभक्ति छिपी होती है। मेजर ऋषभ सिंह सांब्याल के इन बेबाक खुलासों से यह साबित होता है कि भारतीय सेना के भीतर अनुशासन का पालन किस चरम स्तर पर किया जाता है, जहाँ व्यक्तिगत इच्छाओं का कोई स्थान नहीं होता। चाहे वह देश के भीतर का कोई दौरा हो या फिर किसी विदेशी राष्ट्राध्यक्ष का स्वागत समारोह, एडीसी हमेशा अपनी परफेक्शन और सतर्कता के लिए जाने जाते हैं। यह घटना हमें यह याद दिलाती है कि हमारे देश के वीर सैनिक और अधिकारी अपने निजी जीवन की तमाम पाबंदियों और कठिनाइयों को हंसते हुए स्वीकार करते हैं ताकि हमारा देश और हमारे सर्वोच्च पद की गरिमा हमेशा सुरक्षित बनी रहे।