संसद का नंबर गेम: मॉनसून सत्र में क्या संविधान संशोधन बिल ला पाएगी NDA, जानें दोनों सदनों का ताजा गणित
18 जुलाई से शुरू हो रहे संसद के मॉनसून सत्र के साथ ही राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। चर्चा है कि सरकार एक बार फिर संविधान संशोधन बिल लाने की दिशा में कदम बढ़ा सकती है। हालांकि आधिकारिक तौर पर पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन संसद में अंकों का गणित ही इस बड़े फैसले की सफलता तय करेगा। संविधान संशोधन के लिए दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता होती है, जो सत्तारूढ़ NDA के लिए एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।
लोकसभा में क्या है NDA की स्थिति
लोकसभा में कुल 543 सीटें हैं, जिनमें से तीन सीटें (बशीरहाट, शिलॉन्ग और नौगांव) अभी खाली हैं। इस स्थिति में दो-तिहाई बहुमत का आंकड़ा 360 होता है। 2024 के परिणामों के बाद NDA के पास 293 सीटें थीं, लेकिन अब कुछ अन्य दलों के समर्थन के बाद यह संख्या बढ़कर 319 तक पहुंच गई है। यदि महत्वपूर्ण समय पर DMK जैसी पार्टियां वोटिंग से दूर रहती हैं, तो बहुमत का जादुई आंकड़ा 342 तक सिमट सकता है। फिर भी, NDA के लिए यह आंकड़ा अभी भी लक्ष्य से कुछ दूर नजर आता है।
संसद के टॉप-10 दलों का सीट शेयर
संख्याबल के लिहाज से लोकसभा और राज्यसभा में दलों की स्थिति इस प्रकार है:
| पार्टी | लोकसभा सीटें | राज्यसभा सीटें |
| भाजपा | 240 | 114 |
| कांग्रेस | 98 | 30 |
| समाजवादी पार्टी | 37 | 4 |
| टीएमसी | 28 | 10 |
| डीएमके | 22 | 8 |
| टीडीपी | 16 | 4 |
| जेडीयू | 12 | 4 |
| शिवसेना (शिंदे) | 7 | - |
| एनसीपी (शरद पवार) | 8 | 4 |
| शिवसेना (यूबीटी) | 9 | - |
राज्यसभा में NDA की मजबूती और चुनौती
उच्च सदन (राज्यसभा) में वर्तमान में 242 सांसद हैं। यहां संविधान संशोधन के लिए 164 सीटों की आवश्यकता है। राज्यसभा में NDA लोकसभा के मुकाबले अधिक मजबूत स्थिति में है, फिर भी दो-तिहाई बहुमत के लिए उसे अन्य दलों के सहयोग की दरकार है। भाजपा के पास यहां 114 सदस्य हैं, जो इसे सदन का सबसे बड़ा दल बनाता है, लेकिन बहुमत के लिए गणित बिठाना अभी भी चुनौतीपूर्ण है।
बागियों पर फैसला और विपक्ष की नई रणनीति
मानसून सत्र शुरू होने से पहले लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के सामने टीएमसी और शिवसेना (यूबीटी) के बागी सांसदों को अयोग्य ठहराने का मुद्दा अहम है। कानूनी विशेषज्ञों के साथ विचार-विमर्श जारी है ताकि कोई भी फैसला संवैधानिक रूप से ठोस हो। वहीं, तमिलनाडु में बदलते समीकरणों के बीच DMK ने संसद में कांग्रेस से अलग बैठने का अनुरोध किया है, जो इंडिया गठबंधन में आई दरार को और स्पष्ट करता है। सत्र के दौरान इन सभी घटनाक्रमों का सीधा असर विधायी कार्यों पर पड़ना तय है।