निशु आजाद मामला: CJP के 72 घंटे के अल्टीमेटम के बाद दिल्ली पुलिस का एक्शन, बुलंदशहर से स्वतंत्र भारद्वाज हिरासत में
राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए एक बड़े प्रदर्शन के दौरान छात्र कार्यकर्ता निशु आजाद के पिता के साथ हुई कथित मारपीट और हिंसा के मामले में दिल्ली पुलिस को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। इस सनसनीखेज मामले के मुख्य आरोपी और खुद को हिंदुत्व एक्टिविस्ट बताने वाले सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर स्वतंत्र भारद्वाज को उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर से हिरासत में ले लिया गया है। यह कार्रवाई कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) द्वारा दिए गए कड़े 72 घंटे के अल्टीमेटम और पुलिस स्टेशन पर किए गए जोरदार प्रदर्शन के तुरंत बाद की गई है, जिसने राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में हलचल मचा दी है।
CJP का 72 घंटे का अल्टीमेटम और संसद मार्ग थाने का घेराव
इस पूरे घटनाक्रम ने तूल तब पकड़ा जब कॉकरोच जनता पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं ने आक्रामक रुख अपनाते हुए दिल्ली पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। शुक्रवार को CJP का एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल सीधे संसद मार्ग पुलिस थाने पहुंचा और पुलिस अधिकारियों से मिलकर आरोपी की तुरंत गिरफ्तारी की मांग की। इस प्रतिनिधिमंडल में पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता सौरव दास और प्रमुख नेता आशुतोष रांका विशेष रूप से शामिल रहे। नेताओं ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी थी कि यदि पुलिस तय समय सीमा के भीतर सख्त कानूनी कदम नहीं उठाती है, तो पार्टी राज्य स्तर पर बड़े पैमाने पर आंदोलन करेगी। इस बढ़ते दबाव के बीच पुलिस हरकत में आई और तकनीकी सर्विलांस के आधार पर आरोपी स्वतंत्र भारद्वाज को बुलंदशहर से दबोच लिया।
क्या था जंतर-मंतर का पूरा मामला और वायरल पॉडकास्ट विवाद
यह पूरा विवाद जंतर-मंतर पर आयोजित एक विरोध प्रदर्शन के दौरान भड़का था। CJP द्वारा आयोजित इस प्रदर्शन के दौरान छात्र कार्यकर्ता निशु आजाद के 38 वर्षीय पिता संजय कुमार के साथ कथित तौर पर लाठी-डंडों और हाथापाई के बीच गंभीर मारपीट की गई थी। मामला तब और अधिक गंभीर हो गया जब सोशल मीडिया पर स्वतंत्र भारद्वाज से जुड़ा एक पॉडकास्ट तेजी से वायरल होने लगा। इस वायरल वीडियो क्लिप में भारद्वाज कथित तौर पर डींगें हांकते हुए यह कहते नजर आ रहे थे कि उन्होंने प्रदर्शन के दौरान संजय कुमार की 'खोपड़ी फोड़ दी थी' और इतनी बड़ी घटना को अंजाम देने के बावजूद वे कानून की पकड़ से आसानी से बाहर निकल आए। इस अहंकारी और बेखौफ बयान के सामने आने के बाद सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक भारी आक्रोश फैल गया और आम जनता ने भी आरोपी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग शुरू कर दी।
दिल्ली पुलिस का पक्ष और मेडिकल रिपोर्ट पर उठे सवाल
एक तरफ जहां पीड़ित पक्ष और राजनीतिक संगठन आरोपी पर हत्या के प्रयास और गंभीर धाराओं के तहत कार्रवाई की मांग कर रहे थे, वहीं दूसरी तरफ दिल्ली पुलिस ने इस मामले में एक नया बयान जारी कर स्थिति को स्पष्ट करने का प्रयास किया। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि प्रारंभिक जांच और मेडिकल परीक्षण के अनुसार 38 वर्षीय संजय कुमार को झड़प के दौरान सिर पर केवल साधारण चोटें आई थीं। पुलिस ने उन तमाम दावों को सिरे से खारिज कर दिया जिनमें पीड़ित की खोपड़ी में गंभीर फ्रैक्चर होने की बात कही जा रही थी। इसके अलावा, पुलिस ने स्पष्ट किया कि घटना के तुरंत बाद स्वतंत्र भारद्वाज और एक अन्य आरोपी सूरज कुमार को मौके से हिरासत में लिया गया था, जिनसे पूछताछ करने के बाद नियमानुसार नोटिस जारी किए गए थे। पुलिस का यह भी दावा है कि मामले की वैज्ञानिक और निष्पक्ष जांच अंतिम चरण में है और साक्ष्यों के आधार पर जल्द ही अदालत में मजबूत चार्जशीट दाखिल की जाएगी।
स्वतंत्र भारद्वाज की सफाई और आत्मरक्षा का दावा
पुलिस हिरासत में आने से पहले और विभिन्न बयानों के माध्यम से आरोपी स्वतंत्र भारद्वाज ने अपने ऊपर लगे सभी गंभीर आरोपों को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। भारद्वाज का पक्ष रखते हुए उनके करीबियों और समर्थकों का कहना है कि सोशल मीडिया पर वायरल हो रही पॉडकास्ट क्लिप को पूरी तरह से तोड़-मरोड़कर और गलत संदर्भ में पेश किया गया है। उनका दावा है कि उस पॉडकास्ट में की गई टिप्पणियां केवल राजनीतिक व्यंग्य या मजाकिया लहजे में थीं। अपनी सफाई में स्वतंत्र भारद्वाज ने दावा किया कि जंतर-मंतर पर उन्हें करीब 10 से 15 लोगों की उग्र भीड़ ने अचानक घेर लिया था, जिसके कारण उन्हें अपनी जान का भारी खतरा महसूस हुआ। उन्होंने कहा कि उन्होंने जो भी किया वह केवल अपनी जान बचाने के लिए की गई आत्मरक्षा की प्रतिक्रिया थी, न कि किसी पर जानबूझकर किया गया हमला।
निशु आजाद के गंभीर आरोप और दुष्कर्म की धमकियों का मामला
दूसरी ओर, पीड़ित छात्र कार्यकर्ता निशु आजाद ने स्वतंत्र भारद्वाज के इन तमाम तर्कों और सफाई को झूठ का पुलिंदा बताते हुए खारिज कर दिया है। निशु आजाद ने आरोप लगाया है कि आरोपी और उसके अंध समर्थकों ने न केवल उनके पिता के साथ अमानवीय मारपीट की, बल्कि उन्हें व्यक्तिगत रूप से भी लगातार प्रताड़ित किया और गंभीर दुष्कर्म की धमकियां तक दीं। इन सनसनीखेज और डरावनी धमकियों के खिलाफ निशु ने दिल्ली के संबंधित थाने में अलग से एक स्वतंत्र प्राथमिकी (FIR) भी दर्ज कराई है। CJP नेता आशुतोष रांका ने भी कड़ा रोष व्यक्त करते हुए कहा कि जब जंतर-मंतर जैसी हाई-सिकিউরিটি जोन में सरेआम एक व्यक्ति पर जानलेवा हमला किया गया और उसके सबूत भी सोशल मीडिया पर खुलेआम घूम रहे हैं, तो पुलिस को इतनी ढिलाई बरतने की आवश्यकता क्यों पड़ी। फिलहाल, बुलंदशहर से आरोपी की हिरासत के बाद इस हाई-वोल्टेज मामले में कई नए खुलासे होने की पूरी संभावना जताई जा रही है।