मणिपुर के कामजोंग में म्यांमार सीमा पर उग्रवादियों का खूनी तांडव: तंगखुल नागा समुदाय के 4 लोगों को गोलियों से भूना

मणिपुर के कामजोंग में म्यांमार सीमा पर उग्रवादियों का खूनी तांडव: तंगखुल नागा समुदाय के 4 लोगों को गोलियों से भूना

पूर्वोत्तर राज्य मणिपुर में लंबे समय से सुलग रही जातीय हिंसा और सीमा पार से सक्रिय उग्रवादी गतिविधियों के बीच एक अत्यंत हृदयविदारक और चिंताजनक वारदात सामने आई है। भारत-म्यांमार अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे संवेदनशील कामजोंग जिले के पिलोंग गांव के समीप हथियारबंद उग्रवादियों ने घात लगाकर तंगखुल नागा समुदाय के चार निर्दोष ग्रामीणों की बर्बरतापूर्वक गोली मारकर हत्या कर दी। इस खूनी वारदात ने पूरे सीमावर्ती पहाड़ी क्षेत्र में भारी दहशत और आक्रोश का माहौल पैदा कर दिया है। शुक्रवार तड़के करीब 1:30 बजे राज्य पुलिस, असम राइफल्स और स्थानीय नागा ग्रामीणों द्वारा चलाए गए संयुक्त सघन तलाशी अभियान के दौरान चारों युवकों के क्षत-विक्षत शव एक घने और सुनसान पहाड़ी इलाके से बरामद किए गए। शवों को देखकर यह स्पष्ट हो रहा था कि हमलावरों ने अत्यंत नजदीक से अंधाधुंध गोलियां बरसाईं, जिससे चारों पीड़ितों को संभलने या भागने का कोई मौका नहीं मिल सका।

मृतकों की हुई पहचान: पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भेजे गए शव

स्थानीय पुलिस और प्रशासनिक सूत्रों से मिली आधिकारिक जानकारी के अनुसार, इस नृशंस गोलीबारी में जान गंवाने वाले चारों व्यक्तियों की पहचान वारेइशिम जाजो, फामी जाजो, बेटरसन जाजो और निंगथेम कशाक के रूप में की गई है। चारों मृतक स्थानीय ग्रामीण थे जो रोजमर्रा की गतिविधियों के सिलसिले में सीमावर्ती इलाके की तरफ गए थे। फॉरेंसिक जांच और प्रारंभिक निरीक्षण में सभी शवों पर ऑटोमैटिक हथियारों की गोलियों के गहरे और कई निशान पाए गए हैं। पुलिस ने चारों शवों का पंचनामा भरकर उन्हें कानूनी प्रक्रियाओं और पोस्टमार्टम परीक्षण के लिए कामजोंग जिला अस्पताल के शवगृह में भेज दिया है। घटना के बाद से ही पूरे गांव और आसपास की बस्तियों में मातम पसरा हुआ है तथा पीड़ित परिवारों के विलाप से माहौल गमगीन हो गया है।

म्यांमार सीमा पार कर आए उग्रवादियों की करतूत: जीवित बचे ग्रामीण ने खोला राज

स्थानीय ग्रामीणों और प्रत्यक्षदर्शियों का आरोप है कि गुरुवार को हथियारों से लैस उग्रवादियों का एक दस्ता म्यांमार की खुली और दुर्गम सीमा को अवैध रूप से पार कर भारतीय सीमा क्षेत्र में दाखिल हुआ था। इन उग्रवादियों ने पिलोंग गांव के पास पांच स्थानीय तंगखुल नागा ग्रामीणों के एक समूह को घेर लिया और बिना किसी चेतावनी के स्वचालित बंदूकों से उन पर फायरिंग शुरू कर दी। इस अचानक हुए जानलेवा हमले में चार ग्रामीण मौके पर ही लहूलुहान होकर गिर पड़े और उन्होंने दम तोड़ दिया। सौभाग्यवश, समूह में शामिल पांचवां ग्रामीण किसी तरह घने जंगलों और पहाड़ी खाइयों का सहारा लेकर जान बचाकर भागने में सफल रहा। उसी चश्मदीद ग्रामीण ने गांव पहुंचकर स्थानीय नागरिक संगठनों और सुरक्षा एजेंसियों को इस बर्बर नरसंहार की पूरी जानकारी दी, जिसके बाद सुरक्षा बलों ने तुरंत इलाके की घेराबंदी कर सर्च ऑपरेशन शुरू किया।

कुकी नेशनल आर्मी पर लगा आरोप: नगा पीपल्स फ्रंट ने की कड़ी निंदा

इस कायराना और घातक हमले की खबर फैलते ही राज्य के राजनीतिक और सामाजिक गलियारों में तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। नागा पीपल्स फ्रंट (NPF) के राज्य अध्यक्ष अवांगबो न्यूमाई ने इस नृशंस हत्याकांड की कड़े से कड़े शब्दों में निंदा की है। उन्होंने सार्वजनिक रूप से दावा किया कि म्यांमार सीमा के पास निर्दोष तंगखुल नागा नागरिकों को निशाना बनाने वाले इस सुनियोजित हमले के पीछे कुकी नेशनल आर्मी (KNA) से जुड़े उग्रवादी कैडर्स का हाथ है। न्यूमाई ने इस घटना को शांति बहाली के प्रयासों पर गंभीर आघात बताते हुए सभी समुदायों और उनके प्रतिनिधियों से हिंसा, प्रतिशोध और सशस्त्र टकराव का रास्ता तत्काल छोड़कर शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व की राह पर लौटने की भावुक अपील की है। साथ ही उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार से मांग की है कि सीमावर्ती क्षेत्रों में निर्दोष नागरिकों की जान-माल की रक्षा के लिए ठोस और निर्णायक कदम उठाए जाएं।

कुकी और नागा तनाव की पृष्ठभूमि: हिंसा के चक्र में झुलसता राज्य

कामजोंग जिले में घटी यह ताजा घटना किसी एकाकी विवाद का परिणाम नहीं है, बल्कि यह मणिपुर में फरवरी माह से शुरू हुए नागा और कुकी समुदायों के बीच के नए जातीय व क्षेत्रीय तनाव का ही एक खूनी विस्तार मानी जा रही है। फरवरी में उखरुल जिले से भड़की छिटपुट झड़पों और भूमि विवादों ने धीरे-धीरे संगठित घात लगाकर किए जाने वाले हमलों और लक्षित नागरिक हत्याओं का बेहद खतरनाक स्वरूप धारण कर लिया है। हाल के दिनों में इस जातीय विद्वेष की आग कई जिलों तक फैल चुकी है। बीते 13 सितंबर को तामेंगलोंग और नोनी जिलों के विभिन्न हिस्सों में हुए हिंसक हमलों में कुकी समुदाय के चार ग्रामीणों की मौत हो गई थी, जिसके जवाब में नागा बस्तियों पर जवाबी हमले किए गए और एक नागा किशोर की जान ले ली गई। इसके कुछ ही समय बाद कांगपोकपी जिले में कुकी समुदाय से ताल्लुक रखने वाले एक 36 वर्षीय लाइनमैन की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी, जिसके बाद सीमावर्ती नागा बस्तियों पर लगातार फायरिंग और उपद्रव की खबरें सामने आई थीं। यह खूनी चक्र लगातार एक समुदाय से दूसरे समुदाय के बीच प्रतिशोध की आग को भड़का रहा है।

भारी सुरक्षा बलों की मौजूदगी के बावजूद चुनौती: म्यांमार सीमा की दुर्गमता

मणिपुर के मौजूदा हालात को सामान्य बनाए रखने के लिए भारतीय सेना, असम राइफल्स, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ), बीएसएफ और राज्य पुलिस की भारी टुकड़ियां लगभग सभी संवेदनशील इलाकों और बफर जोन्स में चौबीसों घंटे तैनात हैं। इसके बावजूद दुर्गम पहाड़ी जंगलों और म्यांमार की पोरस सीमा का फायदा उठाकर हथियारबंद उग्रवादी समूह लगातार सुरक्षा तंत्र को चकमा देकर वारदातों को अंजाम दे रहे हैं। भारत और म्यांमार के बीच की सीमा पर घने जंगल, गहरी खाइयां और बुनियादी निगरानी ढांचे की कमी उग्रवादियों के लिए घुसपैठ और हमले के बाद सुरक्षित ठिकानों में छिपने का आसान जरिया बन जाती है। इस ताजा नरसंहार के बाद सुरक्षा बलों ने कामजोंग, उखरुल और आसपास के सभी सीमावर्ती इलाकों में अतिरिक्त सैन्य कंपनियां तैनात कर दी हैं और जंगल में ड्रोन कैमरों और ट्रैकर डॉग्स की मदद से सघन कॉम्बिंग ऑपरेशन चलाया जा रहा है ताकि इस खूनी खेल को अंजाम देने वाले उग्रवादियों को जल्द से जल्द कानून के शिकंजे में लाया जा सके।