Jagan Mohan Reddy की नजरें प्रशांत किशोर के पूर्व सहयोगी Kapil Sahu पर, 2029 चुनाव के लिए बन सकती है बड़ी रणनीति

Jagan Mohan Reddy की नजरें प्रशांत किशोर के पूर्व सहयोगी Kapil Sahu पर, 2029 चुनाव के लिए बन सकती है बड़ी रणनीति

आंध्र प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर से सरगर्मी तेज हो गई है। राज्य की सत्ता से बेदखल होने के बाद मुख्य विपक्षी दल वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (YSRCP) अब अपनी खोई हुई जमीन को वापस पाने और साल 2029 के आम तथा विधानसभा चुनावों में धमाकेदार वापसी के लिए पूरी ताकत झोंक रही है। पार्टी के भीतर संगठन को मजबूत करने और चुनावी मशीनरी को नए सिरे से धार देने के लिए रणनीतिक स्तर पर बड़े बदलावों की तैयारी चल रही है। इस बीच सबसे बड़ा और सनसनीखेज राजनीतिक घटनाक्रम यह सामने आया है कि वाईएसआरसीपी के अध्यक्ष और आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री वाईएस जगनमोहन रेड्डी आगामी चुनावों के लिए एक नए और बेहद तेज-तर्रार राजनीतिक रणनीतिकार की तलाश में हैं। इस सिलसिले में सबसे आगे जो नाम चल रहा है, वह किसी और का नहीं बल्कि देश के जाने-माने राजनीतिक रणनीतिकार प्रशांत किशोर के पूर्व करीबी सहयोगी और दिग्गज रणनीतिकार कपिल साहू का है। पार्टी के भीतर चल रही सुगबुगाहट के मुताबिक, जगनमोहन रेड्डी 2029 की चुनावी वैतरणी पार करने के लिए कपिल साहू को पार्टी की मुख्य कैंपेन स्ट्रैटेजी और प्रचार-प्रसार की कमान सौंप सकते हैं।

हाल ही में राजनीतिक हलकों में इस बात की चर्चा बहुत तेज हो गई है कि कपिल साहू ने तमिलनाडु के लोकप्रिय तमिल अभिनेता से राजनेता बने थलापति विजय और उनकी नवगठित पार्टी 'तमिलगा वेत्री कझगम' (TVK) के लिए जिस प्रकार की शानदार और आक्रामक प्रचार रणनीति तैयार की थी, उसने सभी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। साहू की कुशल रणनीति और डिजिटल आउटरीच के दम पर ही हालिया राजनीतिक घटनाक्रमों में विजय को अपनी पार्टी को मजबूत करने और तमिलनाडु की राजनीति में एक नया विकल्प के रूप में उभरने में भारी मदद मिली। इसी सफलता ने देश के अन्य दिग्गज नेताओं का भी ध्यान कपिल साहू की ओर आकर्षित किया है। वाईएसआरसीपी के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर मीडिया को यह जानकारी दी है कि वाईएस जगनमोहन रेड्डी ने कुछ हफ्ते पहले ही आंध्र प्रदेश में अगले चुनावों का ताना-बाना बुनने और पार्टी की चुनावी रणनीति तैयार करने के लिए कपिल साहू के साथ शुरुआती दौर की महत्वपूर्ण बातचीत की है। हालांकि अभी तक आधिकारिक तौर पर किसी नाम पर अंतिम मुहर नहीं लगी है, लेकिन जगनमोहन रेड्डी द्वारा साहू के शुरुआती प्रेजेंटेशन और उनके विजन की काफी सराहना की जा रही है।

कौन हैं कपिल साहू और क्या रहा है उनका राजनीतिक सफर?

कपिल साहू का नाम मौजूदा समय में भारतीय चुनावी रणनीतिकारों की सूची में काफी तेजी से ऊपर आया है। साहू ने साल 2024 तक देश की प्रतिष्ठित राजनीतिक कंसल्टेंसी फर्म 'इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी' यानी I-PAC के साथ लंबे समय तक काम किया था। प्रशांत किशोर के नेतृत्व में उन्होंने कई बड़े राज्यों के चुनावों में अपनी तकनीकी और प्रबंधकीय क्षमता का लोहा मनवाया था। हालांकि, बाद में वे I-PAC से अलग हो गए और अपने 12 चुनिंदा सहयोगियों की एक मजबूत टीम के साथ इस कंपनी का दामन छोड़ दिया। I-PAC से अलग होने के बाद उन्होंने अपनी खुद की स्वतंत्र पॉलिटिकल कंसल्टिंग टीम खड़ी की, जिसके जरिए उन्होंने दिल्ली और सिक्किम समेत देश के कई अन्य राजनीतिक संगठनों और नेताओं के साथ काम किया। राजनीतिक रणनीतिकारों के बीच उनकी पहचान एक ऐसे विशेषज्ञ के रूप में है जो डिजिटल आउटरीच, डेटा एनालिटिक्स, मजबूत कैंपेन मैसेजिंग और पब्लिक एंगेजमेंट अभियानों को बेहद पेशेवर तरीके से संचालित करने में माहिर हैं।

तमिलनाडु में अभिनेता विजय की पार्टी टीवीके के साथ कपिल साहू के सफल जुड़ाव ने उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर एक बार फिर से सुर्खियों में ला दिया है। साहू की कोर टीम ने जिस प्रकार से सोशल मीडिया कैंपेन, जनता के बीच सीधा संवाद और विभिन्न वर्गों के मतदाताओं के बीच विजय की अपील को बढ़ाने के लिए काम किया, उसकी सफलता ने दक्षिण भारत की राजनीति में एक नया संदेश दिया है। यही कारण है कि आंध्र प्रदेश के पूर्व सीएम जगनमोहन रेड्डी जैसे बड़े नेता भी अब उनकी कार्यशैली और चुनावी समझ से काफी प्रभावित नजर आ रहे हैं। जगनमोहन रेड्डी ने अभी तक हालांकि अपने मन की बात पूरी तरह से जाहिर नहीं की है और न ही किसी एक रणनीतिक नाम को अंतिम रूप से फाइनल किया है, लेकिन उन्होंने साहू के साथ हुई अपनी बैठकों में जिस तरह की गहरी दिलचस्पी दिखाई है, उससे यह साफ अंदाजा लगाया जा रहा है कि आने वाले दिनों में वे वाईएसआरसीपी के मुख्य रणनीतिकार के तौर पर अपनी भूमिका निभाते नजर आ सकते हैं।

जगनमोहन रेड्डी और I-PAC का पुराना और दिलचस्प चुनावी इतिहास

वाईएस जगनमोहन रेड्डी और राजनीतिक रणनीतिकार फर्म I-PAC का इतिहास काफी पुराना और उतार-चढ़ाव भरा रहा है। जगन ने अपनी राजनीतिक यात्रा के दौरान अब तक I-PAC के साथ दो अलग-अलग नेतृत्व के दौर में दो बड़े चुनावी प्रयोग किए हैं, जिनके परिणाम भी बिल्कुल अलग-अलग रहे हैं। सबसे पहले बात करें साल 2019 के ऐतिहासिक विधानसभा चुनावों की, तो उस दौरान प्रशांत किशोर खुद सीधे तौर पर मैदान में उतरे थे और उन्होंने जगनमोहन रेड्डी की पूरी चुनावी नैया को अपने कंधों पर संभाला था। प्रशांत किशोर की इनोवेटिव कैंपेन स्ट्रैटेजी, जमीन से जुड़े मुद्दों की सटीक पहचान और जगनमोहन रेड्डी की बहुचर्चित 'पदयात्रा' के डिजाइन ने आंध्र प्रदेश की राजनीति में एक ऐसा भूचाल लाया कि वाईएसआरसीपी ने राज्य की कुल 175 विधानसभा सीटों में से रिकॉर्ड 151 सीटों पर ऐतिहासिक और प्रचंड जीत दर्ज की थी। उस चुनाव में प्रशांत किशोर और उनकी टीम की रणनीति ने जगन को राज्य की सत्ता के सर्वोच्च शिखर पर बैठा दिया था।

हालांकि, समय के साथ परिस्थितियां बदलीं। जब प्रशांत किशोर I-PAC के सक्रिय प्रबंधन से अलग हो गए, तब इस कंपनी की कमान ऋषिराज सिंह और उनकी टीम के हाथों में आ गई। साल 2024 के विधानसभा चुनावों के दौरान भी जगनमोहन रेड्डी ने I-PAC के साथ अपना सहयोग जारी रखा और ऋषिराज सिंह की टीम पर भरोसा जताया। इस बार सिंह और उनकी टीम ने राज्य के प्रशासनिक ढांचे, विशेष रूप से गांवों और वार्डों में बनाए गए सचिवालय सिस्टम के कामकाज की देखरेख और जमीनी क्रियान्वयन में अपनी मुख्य भूमिका निभाई। लेकिन इस चुनाव में समीकरण पूरी तरह उल्टे पड़ गए। पार्टी के भीतर और वरिष्ठ नेताओं के स्तर पर यह गंभीर आरोप लगाए जाने लगे कि ऋषिराज सिंह और उनकी टीम ने पार्टी संगठन के आंतरिक कामकाज पर लगभग पूरा नियंत्रण या कब्जा सा कर लिया है। यहाँ तक कि पार्टी के उम्मीदवारों के चयन में भी इस कंसल्टेंसी टीम का अत्यधिक दखल होने की बात सामने आई, जिससे पार्टी के जमीनी नेताओं में गहरी नाराजगी फैल गई। नतीजतन, वाईएसआरसीपी साल 2024 के चुनावों में भारी हार का सामना करना पड़ा और पार्टी सत्ता से बाहर हो गई।

2029 की बड़ी लड़ाई के लिए YSRCP को मजबूत करने की कवायद

साल 2024 की करारी हार के बाद से ही वाईएसआरसीपी सुप्रीमो जगनमोहन रेड्डी फूंक-फूंक कर कदम रख रहे हैं। वे अपनी पुरानी चूकों और रणनीतिक कमियों को बहुत ही बारीकी से परख रहे हैं। पार्टी के भीतर कपिल साहू को शामिल करने की संभावनाओं पर विचार किए जाने को साल 2029 के विधानसभा चुनावों से पहले पार्टी की संपूर्ण चुनावी मशीनरी को नए सिरे से पुनर्जीवित करने और एक लंबी अवधि की अचूक राजनीतिक रणनीति तैयार करने की दिशा में एक बहुत बड़ा और गंभीर कदम माना जा रहा है। पार्टी के विश्लेषकों का मानना है कि यदि जगनमोहन रेड्डी कपिल साहू जैसे पेशेवर और स्वतंत्र सोच वाले रणनीतिकार को अपने पाले में लाने में सफल हो जाते हैं, तो इससे पार्टी को बूथ स्तर से लेकर डिजिटल प्लेटफॉर्म तक एक नई धार मिलेगी।

राजनीतिक जानकारों का यह भी कहना है कि I-PAC के पुराने अनुभवों से सबक लेते हुए जगन इस बार किसी एक पारंपरिक कंसल्टेंसी पर आंख मूंदकर भरोसा करने के बजाय एक ऐसी स्वतंत्र रणनीति चाहते हैं जो सीधे जनता की नब्ज को पकड़ सके। कपिल साहू की कार्यशैली और उनकी युवा टीम का अनुभव इस कसौटी पर पार्टी के लिए काफी मुफीद साबित हो सकता है। साहू की विशेषज्ञता विशेष रूप से डिजिटल कैंपेनिंग, नैरेटिव सेटिंग और आक्रामक राजनीतिक विपक्षी घेराबंदी में मानी जाती है, जिसकी जरूरत इस समय वाईएसआरसीपी को टीडीपी (TDP) सरकार के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाने के लिए सबसे ज्यादा है। कुल मिलाकर देखा जाए तो आंध्र प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर से चुनावी रणनीतिकारों का खेल शुरू हो चुका है और आने वाले दिनों में कपिल साहू की भूमिका को लेकर कोई बहुत बड़ा आधिकारिक राजनीतिक ऐलान देखने को मिल सकता है, जो 2029 के सियासी रण की दिशा तय करेगा।