दिल्ली पहुंचे पुतिन, PM मोदी संग महाबैठक में Su-57 और S-400 पर लग सकती है मुहर; ब्रिक्स समिट में नया 'पावर गेम' शुरू
18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन (BRICS Summit 2026) के औपचारिक आगाज से ठीक पहले वैश्विक कूटनीति का केंद्र बिंदु नई दिल्ली बन चुका है। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल के साथ तीन दिवसीय आधिकारिक दौरे पर राष्ट्रीय राजधानी पहुंच चुके हैं। फरवरी 2022 के बाद रूस की सीमा से बाहर किसी ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में पुतिन की यह पहली व्यक्तिगत भागीदारी है। एयरपोर्ट पर विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया।
भारत मंडपम में आयोजित होने वाले मुख्य शिखर सम्मेलन से पहले आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति पुतिन के बीच ऐतिहासिक द्विपक्षीय वार्ता (Bilateral Summit) होने जा रही है। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव के अनुसार, दोनों नेताओं की इस सीधी बातचीत में व्यापार, ऊर्जा सहयोग, नेशनल करेंसी पेमेंट्स और सबसे अहम सैन्य-तकनीकी रक्षा सहयोग एजेंडे के शीर्ष पर रहेंगे।
क्या भारत खरीदेगा 5th Gen सुखोई Su-57? रूस ने टेबल पर रखा बड़ा रक्षा प्रस्ताव
इस द्विपक्षीय बैठक का सबसे सनसनीखेज पहलू रूस की तरफ से भारत को दिया गया पांचवीं पीढ़ी के स्टील्थ फाइटर जेट Su-57 (सुखोई-57) का मेगा ऑफर है। क्रेमलिन ने आधिकारिक तौर पर पुष्टि की है कि Su-57 विमानों की संभावित बिक्री और भारत के साथ इसके संयुक्त निर्माण व तकनीकी हस्तांतरण (Technology Transfer) का मसौदा वार्ता की मेज पर शामिल है:
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अत्याधुनिक स्टील्थ और एवियोनिक्स: Su-57 मल्टी-रोल सुपरक्रूज़ फाइटर जेट है, जो रडार से पूरी तरह ओझल रहने (Stealth), आंतरिक हथियार बे और सुपर-मैन्युवरेबिलिटी से लैस है।
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मेक इन इंडिया का पहलू: रूस केवल सीधे विमान बेचने तक सीमित नहीं है, बल्कि हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) के जरिए भारत में इसके उत्पादन और संवेदनशील एवियोनिक्स व इंजन तकनीक को साझा करने का विकल्प भी पेश कर रहा है।
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भारतीय वायुसेना की जरूरत: भारतीय वायुसेना (IAF) में लड़ाकू विमानों के घटते स्क्वाड्रन और चीन के J-20 फिफ्थ-जनरेशन फाइटर जेट्स की चुनौती के बीच Su-57 डील पर भारत का रुख दोनों देशों के रणनीतिक समीकरणों को एक नया मोड़ दे सकता है।
S-400 एयर डिफेंस की बाकी यूनिट्स और ब्रह्मोस मिसाइल अपग्रेड पर फैसला
बातचीत में भारत के हवाई सुरक्षा कवच को और अधिक अभेद्य बनाने पर भी मुहर लग सकती है:
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S-400 ट्रायम्फ की शेष डिलीवरी: भारत ने 2018 में रूस के साथ पांच S-400 मिसाइल स्क्वाड्रन का ऐतिहासिक सौदा किया था। इनमें से तीन रेजीमेंट पहले ही तैनात हो चुकी हैं, जबकि यूक्रेन संघर्ष और लॉजिस्टिक्स के चलते बची हुई दो यूनिट्स की आपूर्ति में देरी हुई थी। रूस ने संकेत दिया है कि शेष सिस्टम्स की तय डिलीवरी टाइमलाइन को अंतिम रूप दे दिया जाएगा।
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ब्रह्मोस सुपरसोनिक मिसाइल अपग्रेड: भारत और रूस की संयुक्त साझेदारी का सबसे सफल प्रतीक 'ब्रह्मोस' (BrahMos) मिसाइल सिस्टम है। दोनों देश अब इसकी मारक क्षमता, सटीकता और रेंज को बढ़ाने के साथ-साथ मित्र देशों को इसके रक्षा निर्यात के दायरे को और विस्तृत करने पर विचार कर रहे हैं।
ब्रिक्स में नया 'पावर गेम': डॉलर के विकल्प और नए व्यापारिक गलियारे
पश्चिम एशिया के संकट और वैश्विक प्रतिबंधों के दौर में भारत में हो रहा यह ब्रिक्स सम्मेलन आर्थिक संप्रभुता के लिहाज से भी अभूतपूर्व है:
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राष्ट्रीय मुद्राओं में लेन-देन: क्रेमलिन के अनुसार, रूस का ब्रिक्स देशों के साथ 90% से अधिक व्यापार अब उनकी स्थानीय मुद्राओं (रुपया-रूबल) में हो रहा है। पीएम मोदी और पुतिन के बीच द्विपक्षीय ट्रेड डेफिसिट को पाटने और भारतीय कंपनियों के लिए रूसी बाजार में निवेश बढ़ाने पर मंथन होगा।
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ऊर्जा सुरक्षा और असैन्य परमाणु ऊर्जा: रूस भारत को लगातार रियायती दरों पर कच्चे तेल की आपूर्ति कर रहा है। बैठक में नए परमाणु ऊर्जा संयंत्रों की स्थापना और कुडनकुलम परियोजना के विस्तार पर भी नए सहमति पत्रों (MoUs) पर हस्ताक्षर हो सकते हैं।
राष्ट्रपति पुतिन की यह दिल्ली यात्रा और पीएम मोदी के साथ यह महाबैठक यह साफ संदेश देती है कि पश्चिम के दबावों के बावजूद नई दिल्ली और मॉस्को की 'विशेष एवं विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी' अटूट है और आने वाले दिनों में यह साझेदारी रक्षा, ऊर्जा और भू-राजनीतिक मोर्चे पर और गहरी होने जा रही है।