केरल के पूर्व सीएम पी विजयन और उनके परिजनों पर कसेगा शिकंजा, हाई कोर्ट के निर्देश के बाद 12 अक्टूबर को दर्ज होगी विजिलेंस FIR
दक्षिण भारतीय राज्य केरल की राजनीति में एक बहुत बड़ा भूचाल आ गया है। केरल हाई कोर्ट के एक सख्त निर्देश के बाद राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री पी. विजयन (P. Vijayan) और उनके परिवार की मुश्किलें काफी बढ़ने वाली हैं। सीएमआरएल-एक्सालाजिक (CMRL-Exalogic) मासिक भुगतान विवाद मामले में केरल के गृह मंत्री रमेश चेन्निथला ने शनिवार को एक बड़ा बयान देते हुए घोषणा की है कि आने वाले 12 अक्टूबर को पूर्व मुख्यमंत्री और उनके परिजनों के खिलाफ विजिलेंस द्वारा आधिकारिक रूप से एफआईआर (FIR) दर्ज कर ली जाएगी। इस कानूनी कार्रवाई से राज्य की सियासत मेंवान हलचल पैदा हो गई है।
केरल हाई कोर्ट के आदेश और प्रवर्तन निदेशालय की जांच
यह पूरा कानूनी शिकंजा प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा अदालत में पेश किए गए ठोस साक्ष्यों और दस्तावेजों के आधार पर कसा गया है। केरल हाई कोर्ट ने अपने हालिया आदेश में विजिलेंस को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (Prevention of Corruption Act) के तहत मामला दर्ज करके इसकी गहराई से जांच करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने इसके साथ ही अपराध शाखा की एसआईटी (SIT) को भी भंग कर दिया है। ईडी का मुख्य आरोप है कि सीएमआरएल कंपनी द्वारा वर्ष 2017 से 2019 के बीच पूर्व सीएम की बेटी टी. वीणा की कंपनी 'एक्सालाजिक' को बिना किसी वास्तविक सेवा के 3.28 करोड़ रुपये का भारी-भरकम भुगतान किया गया था।
किस-किस के नाम शामिल हैं इस विवाद में
सामने आई जानकारी के मुताबिक, इस मामले में केवल पूर्व मुख्यमंत्री पी. विजयन ही नहीं, बल्कि उनके परिवार के अन्य सदस्य और करीबी भी कानूनी घेरे में आ गए हैं। एफआईआर में पूर्व सीएम के दामाद एवं पूर्व मंत्री पी.ए. मोहम्मद रियास और उनकी बेटी टी. वीणा के अलावा कुछ अन्य नाम भी शामिल हैं। गृह मंत्री रमेश चेन्निथला ने स्पष्ट किया है कि राज्य सरकार अदालत के इन निर्देशों का पूरी तरह सम्मान करते हुए कानूनी प्रक्रिया को आगे बढ़ाएगी और इस आदेश के खिलाफ किसी भी प्रकार की ऊपरी अपील करने की आवश्यकता महसूस नहीं की जा रही है।
अदालत ने डिजिटल साक्ष्य और दस्तावेज सौंपने के दिए निर्देश
केरल हाई कोर्ट ने अपनी सुनवाई के दौरान यह भी निर्देश दिया है कि ईडी और अब तक जांच कर रही एसआईटी के पास मौजूद तमाम दस्तावेज, फाइलें और डिजिटल साक्ष्य तुरंत विजिलेंस विभाग को सौंप दिए जाएं ताकि जांच प्रक्रिया में किसी भी तरह की देरी न हो। अदालत के इस कड़े रुख के बाद माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस हाई-प्रोफाइल मामले में पूछताछ और कानूनी शिकंजा और अधिक कस सकता है। विपक्षी दलों द्वारा लगातार उठाए जा रहे भ्रष्टाचार के इन गंभीर मुद्दों पर अब अदालत की निगरानी में होने वाली यह विजिलेंस जांच बेहद निर्णायक साबित हो सकती है।