डॉक्टर डिलीवरी पार्टनर नहीं! एग्रीगेटर ऐप्स के खिलाफ हुआ FAIMA, ऑन-डिमांड सर्विस पर जताई चिंता, सुरक्षा पर सवाल
देश के डॉक्टरों के प्रमुख संगठन फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन यानी फैमा (FAIMA) ने डिजिटल एग्रीगेटर ऐप्स के जरिए शुरू की जा रही ऑन-डिमांड डॉक्टर सेवा पर कड़ा विरोध दर्ज कराया है. संगठन की तरफ से देश भर के सभी डॉक्टरों को लेटर लिखकर ऐसे कमर्शियल प्लेटफॉर्म्स से जुड़ने में भारी सावधानी बरतने की सलाह दी गई है.
फैमा का साफ कहना है कि मेडिकल पेशे को किसी फूड डिलीवरी या कैब सर्विस की तरह नहीं चलाया जा सकता, जहां सिर्फ एक क्लिक पर डॉक्टर को मरीज के घर भेज दिया जाए. इससे न केवल मरीजों की क्लिनिकल सुरक्षा को गंभीर खतरा पैदा हो रहा है, बल्कि डॉक्टरों की गरिमा भी प्रभावित हो रही है. संगठन ने नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय से इस मॉडल की जांच कर अक्टूबर 2026 तक राष्ट्रीय गाइडलाइंस बनाने की मांग की है.
मरीज का घर अस्पताल का विकल्प नहीं
डॉक्टरों के संगठन ने अपने आधिकारिक पत्र में यह साफ किया है कि होम विजिट गलत नहीं है. बुजुर्गों, बिस्तर पर पड़े लाचार मरीजों, दिव्यांगों और पैलिएटिव केयर की जरूरत वाले मरीजों के घर जाकर देखना हमेशा से संवेदनशील मेडिकल प्रैक्टिस का हिस्सा रहा है. लेकिन चिंता इस बात की है कि इस सेवा को कुछ प्राइवेट कंपनियां कमर्शियल ऑन-डिमांड बिजनेस मॉडल में बदल रही हैं.
फैमा के अनुसार, किसी मरीज का घर कभी भी अस्पताल, क्लिनिक या आईसीयू का विकल्प नहीं हो सकता. कई चिकित्सीय स्थितियों में मरीज को तुरंत ईसीजी, ब्लड टेस्ट, लगातार मॉनिटरिंग, ऑक्सीजन सपोर्ट, जीवनरक्षक दवाओं और इमरजेंसी रेफरल की जरूरत होती है. घर पर इन जरूरी सुविधाओं की कमी के चलते किसी गंभीर मरीज की जान पर बन सकती है. संगठन ने दो टूक कहा है कि केवल आराम या सुविधा के नाम पर क्लिनिकल सेफ्टी से कोई समझौता नहीं किया जा सकता.
डॉक्टरों को डिलीवरी स्टाफ बनाने का विरोध
फैमा ने इस बात पर भी कड़ा ऐतराज जताया है कि डिजिटल कंपनियां डॉक्टरों को सस्ते ऑन-डिमांड डिलीवरी स्टाफ के रूप में पेश कर रही हैं. ये ऐप्स खुद ही डॉक्टरों की कंसल्टेशन फीस, उनकी उपलब्धता और काम की शर्तें तय कर रहे हैं. संगठन का कहना है कि बरसों की कठिन पढ़ाई, ट्रेनिंग और अनुभव के बाद डॉक्टरों की प्रोफेशनल वैल्यू को किसी ऐप पर सबसे सस्ती कीमत तक सीमित नहीं किया जाना चाहिए.
कई खामियां हैं इसमें
संगठन ने एग्रीगेटर मॉडल में कई गंभीर कमियों को सामने रखा है:
क्लिनिकल ट्रायेज की कमी: कोई भी मोबाइल ऐप यह तय नहीं कर सकता कि मरीज को सामान्य दवा की जरूरत है या उसे तुरंत इमरजेंसी में भर्ती कराना चाहिए.
मेडिको-लीगल जवाबदेही: अगर घर पर इलाज के दौरान मरीज की तबीयत बिगड़ती है, तो गलत प्रिस्क्रिप्शन और कानूनी विवाद की जिम्मेदारी किसकी होगी, यह बिल्कुल साफ नहीं है.
डॉक्टरों की सुरक्षा: किसी अनजान घर में जाने वाले डॉक्टरों, खासकर महिला डॉक्टरों की सुरक्षा की कोई पुख्ता व्यवस्था इन प्लेटफॉर्म्स के पास नहीं है.
डेटा प्रोटेक्शन का अभाव: मरीजों के निजी मेडिकल रिकॉर्ड और बीमारियों का संवेदनशील डेटा प्राइवेट कंपनियों के सर्वर पर सुरक्षित रहने की कोई गारंटी नहीं है.
पारंपरिक होम केयर बनाम 2026 का एग्रीगेटर मॉडल
पारंपरिक व्यवस्था में फैमिली डॉक्टर मरीज के पूरे परिवार की मेडिकल हिस्ट्री जानते थे और क्लिनिकल जरूरत के आधार पर ही घर जाते थे. वह किसी गंभीर स्थिति में तुरंत मरीज को बड़े अस्पताल भेजने का फैसला लेते थे. लेकिन 2026 के इस दौर में डिजिटल एग्रीगेटर्स कॉरपोरेट टारगेट, इंसेंटिव और एल्गोरिदम के दबाव में डॉक्टरों को भेज रहे हैं. यह अंतर सीधे तौर पर इलाज की गुणवत्ता को चोट पहुंचाता है.