Ebola Outbreak 2026: क्या कोरोना के बाद इबोला बन रहा है अगली वैश्विक महामारी? 4 महीनों में 3,000 से अधिक मौतों से दुनिया में हड़कंप, WHO ने बताई संक्रमण फैलने की असली वजह

Ebola Outbreak 2026: क्या कोरोना के बाद इबोला बन रहा है अगली वैश्विक महामारी? 4 महीनों में 3,000 से अधिक मौतों से दुनिया में हड़कंप, WHO ने बताई संक्रमण फैलने की असली वजह

कोरोना महामारी के खौफनाक दौर से अभी दुनिया पूरी तरह उबर भी नहीं पाई थी कि एक और जानलेवा वायरस ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खतरे की घंटी बजा दी है। मध्य अफ्रीकी देश डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (DRC) में इबोला वायरस का प्रकोप अब तक के सबसे घातक और अनियंत्रित रूप में तब्दील हो चुका है। स्वास्थ्य विभाग और विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के नवीनतम आंकड़ों के मुताबिक, बीते चार महीनों के भीतर संक्रमण के 6,186 से अधिक पुष्ट मामले सामने आ चुके हैं, जबकि इस जानलेवा बीमारी से 3,007 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा इसे 'पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी ऑफ इंटरनेशनल कंसर्न' (PHEIC) घोषित किए जाने के बाद अब यह आशंका जताई जा रही है कि यदि समय रहते इसे नहीं रोका गया, तो यह 2014-2016 के पश्चिम अफ्रीकी इबोला संकट (जिसमें 11,000 से ज्यादा जानें गई थीं) का रिकॉर्ड भी तोड़ सकता है।

दुर्लभ 'बुंडिबुग्यो' स्ट्रेन: वैक्सीन और इलाज का अभाव बना सबसे बड़ा संकट

विशेषज्ञों की सबसे बड़ी चिंता इस बार इबोला का स्ट्रेन है। यह मौजूदा प्रकोप इबोला के दुर्लभ बुंडिबुग्यो वायरस (Bundibugyo virus) स्ट्रेन के कारण फैला है।

  • बाजार में पहले से मौजूद अनुमोदित टीके और मोनोक्लोनल एंटीबॉडी उपचार मुख्य रूप से इबोला के 'जायर' (Zaire) स्ट्रेन के खिलाफ प्रभावी रहे हैं।

  • बुंडिबुग्यो स्ट्रेन के लिए फिलहाल कोई विशिष्ट स्वीकृत टीका (Vaccine) या सटीक एंटीवायरल दवा उपलब्ध नहीं है। हालांकि, स्वास्थ्यकर्मियों को एहतियातन 'एरवेबो' (Ervebo) वैक्सीन दी जा रही है ताकि क्रॉस-प्रोटेक्शन मिल सके, लेकिन आम जनता के लिए इसका सुरक्षा कवच अभी सीमित है।

  • इस प्रकोप में मृत्यु दर (Fatality Rate) करीब 45 से 50 प्रतिशत तक बनी हुई है, और 4 वर्ष से कम उम्र के बच्चों में यह दर 60 प्रतिशत तक दर्ज की जा रही है।

WHO ने क्या बताई बीमारी तेजी से फैलने की 4 मुख्य वजहें?

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के महानिदेशक डॉ. टेड्रोस एडनॉम घेब्रेयेसस और सीडीसी (CDC) की रिपोर्ट के अनुसार, इस वायरस के जंगल की आग की तरह फैलने के पीछे कई जटिल जमीनी कारण हैं:

  • 1. सर्विलांस और कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग का टूटना: डब्ल्यूएचओ के अनुसार, लगभग 60 प्रतिशत मौतें अस्पतालों या उपचार केंद्रों के बाहर (घरों और जंगलों में) हो रही हैं। केवल 15 से 20 प्रतिशत नए मरीज ही ज्ञात संपर्कों से ट्रेस हो पा रहे हैं, यानी वायरस की अधिकांश ट्रांसमिशन चेन स्वास्थ्य अधिकारियों की रडार से बाहर चल रही हैं।

  • 2. पूर्वी कांगो में गृहयुद्ध और हिंसा: जिस क्षेत्र (इतुरी और उत्तरी किवु प्रांत) में बीमारी सबसे भीषण है, वहां विद्रोही गुटों और मिलिशिया के बीच लगातार सशस्त्र संघर्ष चल रहा है। हिंसा के चलते स्वास्थ्यकर्मियों पर हमले हो रहे हैं, जिसके कारण मेडिकल टीमें प्रभावित गांवों तक नहीं पहुंच पा रही हैं।

  • 3. खनिकों और आबादी का भारी विस्थापन: सोने और कोलटन की खदानों में काम करने वाले प्रवासी खनिक और हिंसा से भागे लाखों विस्थापित लोग लगातार एक प्रांत से दूसरे प्रांत जा रहे हैं, जिससे वायरस छह अलग-अलग प्रांतों में फैल चुका है।

  • 4. पारंपरिक अंतिम संस्कार और अंधविश्वास: स्थानीय समुदायों में मृतकों के शवों को पारंपरिक रूप से धोने और छूने की परंपरा है। इबोला से मरे व्यक्ति के शरीर और तरल पदार्थों में वायरस की सघनता सबसे अधिक होती है, जिससे अंतिम संस्कार के दौरान बड़ी संख्या में लोग एक साथ संक्रमित हो रहे हैं।

इबोला के लक्षण क्या हैं और यह शरीर पर कैसे वार करता है?

इबोला एक वायरल रक्तस्रावी बुखार (Viral Hemorrhagic Fever) है। इसका इनक्यूबेशन पीरियड 2 से 21 दिनों का होता है:

  • शुरुआती लक्षण: अचानक तेज बुखार, कंपकंपी, तेज सिरदर्द, गले में खराश और अत्यधिक शारीरिक कमजोरी।

  • गंभीर लक्षण: उल्टी, दस्त, पेट में असहनीय दर्द, स्किन रैशेज और लिवर-किडनी का फेल होना।

  • अंतिम चरण (Hemorrhagic Phase): मसूड़ों, नाक, कान, मल-मूत्र और त्वचा के भीतरी अंगों से आंतरिक और बाहरी रक्तस्राव (Bleeding) शुरू हो जाता है, जिससे मल्टी-ऑर्गन फेलियर के कारण मरीज की मृत्यु हो जाती है।

  • संक्रमण का माध्यम: यह हवा से नहीं फैलता, बल्कि संक्रमित व्यक्ति के रक्त, पसीने, उल्टी, लार, वीर्य या दूषित सुइयों और कपड़ों के सीधे संपर्क से फैलता है।

भारत पर कितना खतरा? स्वास्थ्य मंत्रालय ने बढ़ाई सतर्कता

भारत में अभी तक इबोला का कोई भी पुष्ट मामला सामने नहीं आया है, लेकिन वैश्विक जोखिम को देखते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय और नागरिक उड्डयन विभाग ने पहले ही सतर्कता बढ़ा दी है:

  • अफ्रीकी देशों और विशेष रूप से कांगो, युगांडा या रवांडा की यात्रा करके आने वाले अंतरराष्ट्रीय यात्रियों के लिए 'Air Suvidha 2.0' पोर्टल पर डिजिटल हेल्थ डिक्लेरेशन अनिवार्य किया गया है।

  • दिल्ली, मुंबई, चेन्नई और बेंगलुरु जैसे अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों पर थर्मल स्क्रीनिंग और संदिग्ध लक्षण (बुखार/रैशेज) दिखने पर अलग आइसोलेशन की व्यवस्था की गई है।

  • विशेषज्ञों का कहना है कि इबोला कोरोना की तरह हवा (Airborne) से नहीं फैलता, इसलिए इसका विश्वव्यापी लॉकडाउन जैसी स्थिति में बदलना बेहद मुश्किल है, लेकिन इसकी अत्यधिक उच्च मृत्यु दर इसे दुनिया का सबसे खौफनाक पैथोजन बनाती है।