Ashutosh Rana Sangharsh Iconic Scene: 'संघर्ष' का वो खौफनाक सीन! न कोई रिहर्सल थी, न स्क्रिप्ट में लिखा था; सेट पर अचानक जीभ हिलाकर चीख पड़े थे आशुतोष राणा, कांप गया था पूरा क्रू
भारतीय सिनेमा के इतिहास में जब भी सबसे खौफनाक, रोंगटे खड़े कर देने वाले और मनोरोगी (Psychopathic) खलनायकों की सूची बनती है, तो साल 1999 में रिलीज हुई फिल्म 'संघर्ष' (Sangharsh) के विलेन 'लज्जा शंकर पांडे' का नाम हमेशा शीर्ष पर रहता है। लाल साड़ी, माथे पर बड़ा सा सिंदूर, आंखों में वहशीपन और हाथ में त्रिशूल लिए मासूम बच्चों की बलि चढ़ाने वाले उस किरदार को अभिनेता आशुतोष राणा ने इस कदर जीवंत कर दिया था कि सिनेमाघरों में बैठे दर्शक सचमुच सिहर उठे थे।
इस फिल्म का एक सीन आज भी बॉलीवुड के सबसे आइकॉनिक दृश्यों में गिना जाता है—जब पुलिस कस्टडी में हथकड़ी पहने लज्जा शंकर पांडे अचानक कैमरे की ओर घूरते हुए अपनी जीभ को तेजी से बाहर निकालकर एक अजीब और दिल दहला देने वाली आवाज में चीखता है। लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि यह दृश्य न तो फिल्म की बाउंड स्क्रिप्ट में लिखा गया था और न ही इसके लिए कोई पहले से रिहर्सल की गई थी।
न स्क्रिप्ट में था, न रिहर्सल: सेट पर अचानक क्या हुआ था?
फिल्म की निर्देशक तनुजा चंद्रा और निर्माता-लेखक महेश भट्ट ने उस सीन को बेहद सामान्य तरीके से प्लान किया था। सीन यह था कि सीआईडी ऑफिसर रीत ओबेरॉय (प्रीति जिंटा) लज्जा शंकर पांडे से पूछताछ करने और उसे कोर्ट ले जाने के लिए पुलिस वैन के पास पहुंचती हैं। स्क्रिप्ट के अनुसार, आशुतोष राणा को केवल खिड़की से प्रीति जिंटा को एक खतरनाक और ठंडी मुस्कान के साथ घूरना था ताकि हीरोइन के मन में बैठा डर बाहर आ सके।
लेकिन कैमरे का रोल शुरू होते ही आशुतोष राणा के भीतर का मेथड एक्टर पूरी तरह जाग उठा:
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जैसे ही तनुजा चंद्रा ने 'एक्शन' बोला, आशुतोष राणा ने सीधे प्रीति जिंटा की आंखों में देखा।
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उन्होंने बिना किसी पूर्व सूचना के अपनी जीभ को मुंह से बाहर निकाला, उसे तेजी से दाएं-बाएं हिलाया और गले से एक भयानक उल्लूक ध्वनि (Ululation—एक तरह की धार्मिक व तांत्रिक चीख) निकाली।
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वह आवाज इतनी तेज, कर्कश और अस्वाभाविक थी कि सेट पर मौजूद लाइटमैन, कैमरामैन और अन्य क्रू मेंबर्स के हाथ-पैर सुन्न पड़ गए।
प्रीति जिंटा सच में सहम गईं, सन्नाटे में डूब गया था पूरा सेट
उस पल सेट पर क्या हुआ, इसका जिक्र खुद आशुतोष राणा और तनुजा चंद्रा कई साक्षात्कारों में कर चुके हैं। सामने खड़ी अभिनेत्री प्रीति जिंटा को इस बात का जरा भी इल्म नहीं था कि आशुतोष ऐसा कुछ करने वाले हैं।
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आशुतोष के उस अप्रत्याशित और हिंसक रूप को देखकर प्रीति जिंटा कैमरे के सामने सचमुच दहशत में आ गईं और दो कदम पीछे हट गईं।
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कैमरे के पीछे बैठे निर्देशक और तकनीशियन इतने स्तब्ध थे कि कुछ पलों के लिए किसी के मुंह से 'कट' तक नहीं निकला।
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जब शॉट पूरा हुआ और कट बोला गया, तो पूरे सेट पर कई सेकंड तक श्मशान जैसा सन्नाटा पसरा रहा। सभी लोग एक-दूसरे का मुंह ताक रहे थे कि आखिर यह हुआ क्या था।
कहां से आया था जीभ हिलाकर चीखने का यह विचार?
आशुतोष राणा ने बाद में खुलासा किया कि यह आइडिया उनके दिमाग में उनके गृह राज्य मध्य प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में होने वाले पारंपरिक धार्मिक अनुष्ठानों से आया था:
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भारत के कई ग्रामीण और जनजातीय इलाकों में महिलाएं या तांत्रिक किसी विशेष पूजा या देवी जागरण के दौरान अपनी जीभ को तेजी से हिलाते हुए एक विशेष लयबद्ध ध्वनि (जिसे लोकभाषा में 'हूल' या 'उलू-ध्वनि' कहते हैं) निकालते हैं।
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आशुतोष राणा ने सोचा कि लज्जा शंकर पांडे कोई साधारण अपराधी या माफिया नहीं है, बल्कि वह अंधविश्वास, तंत्र-मंत्र और मानसिक विक्षिप्तता की पराकाष्ठा पर खड़ा व्यक्ति है।
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एक तांत्रिक और साइकोपैथ के पागलपन को बिना कोई लंबा डायलॉग बोले केवल एक भाव से पर्दे पर उतारने के लिए उन्होंने सहज रूप से (Impromptu) यह प्रयोग किया, जो सिनेमा के इतिहास में अमर हो गया।
जब महेश भट्ट ने गले लगाकर कहा था— 'तुमने कमाल कर दिया'
शॉट खत्म होने के बाद जब टीम ने मॉनिटर पर वह टेक दोबारा देखा, तो महेश भट्ट और तनुजा चंद्रा खुशी से झूम उठे। महेश भट्ट ने तुरंत आशुतोष राणा को गले लगा लिया और कहा कि इस एक सेकंड के इम्प्रोवाइजेशन ने फिल्म के उस दृश्य को साधारण से उठाकर कल्ट बना दिया है।
इस फिल्म के लिए आशुतोष राणा को वर्ष 1999 के फिल्मफेयर बेस्ट विलेन अवॉर्ड से नवाजा गया था (इससे ठीक एक साल पहले 1998 में वह फिल्म 'दुश्मन' के लिए भी यह अवॉर्ड जीत चुके थे)। आज ढाई दशक बीत जाने के बाद भी जब दर्शक 'संघर्ष' के उस सीन को देखते हैं, तो आशुतोष राणा की वह खौफनाक चीख आज भी रीढ़ की हड्डी में सिहरन पैदा कर देती है।