चक्रवाती तूफान 'मुरासु' ने आंध्र तट पर दी दस्तक: 120 किमी/घंटा की रफ्तार से चलीं हवाएं, कई जिलों में भारी बारिश और तबाही
बंगाल की खाड़ी में बने गहरे दबाव के बाद उठे भीषण चक्रवाती तूफान 'मुरासु' (Severe Cyclonic Storm Murasu) ने मंगलवार तड़के दक्षिणी आंध्र प्रदेश के तटीय इलाकों में जोरदार दस्तक दे दी है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, चक्रवात के लैंडफॉल की प्रक्रिया देर रात करीब 1:00 बजे शुरू हुई, जिसके दौरान समुद्र में विकराल रूप देखने को मिला। तूफान जब तट से टकराया, उस समय 100 से 110 किलोमीटर प्रति घंटे की निरंतर रफ्तार से तेज हवाएं चल रही थीं, जबकि हवा के झोंकों (गस्टिंग) की गति 120 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच गई। इस भीषण प्राकृतिक आपदा के चलते तटीय इलाकों में पेड़ों के उखड़ने, बिजली के खंभे गिरने और व्यापक स्तर पर भारी बारिश का सिलसिला जारी है। उल्लेखनीय है कि पिछले सप्ताह आए चक्रवात 'अर्नब' के बाद पूर्वी तट पर एक हफ्ते के भीतर यह दूसरा बड़ा चक्रवाती हमला है।
ओंगोल, बापटला और नेल्लोर में भारी तबाही और जलभराव
मौसम विभाग के ताजा बुलेटिन के अनुसार, तूफान का केंद्र नेल्लोर और नरसापुर के बीच ओंगोल व बापटला के निकटवर्ती तटीय क्षेत्र में केंद्रित रहा। तेज रफ्तार समुद्री हवाओं के साथ हुई मूसलाधार बारिश ने बापटला, प्रकाशम, कृष्णा और नेल्लोर जिलों के जनजीवन को पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है। समुद्र में सामान्य से 1 से 1.5 मीटर तक ऊंची तूफानी लहरें उठने से निचले इलाकों में समुद्र का पानी घुस गया है, जिससे कई बस्तियों में भारी जलभराव की स्थिति बन गई है। चिराला और ओंगोल में दर्जनों विशालकाय पेड़ सड़कों और रिहायशी कॉलोनियों में गिर पड़े, जिससे यातायात अवरुद्ध हो गया और बिजली आपूर्ति ठप पड़ गई। जिला प्रशासन की टीमें जेसीबी और कटर मशीनों की मदद से सड़कों से गिरे हुए पेड़ों को हटाने में जुटी हुई हैं।
लाखों लोग सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट, 18 से अधिक उड़ानें रद्द
चक्रवात के विकराल खतरे को देखते हुए आंध्र प्रदेश और पड़ोसी राज्य ओडिशा के संवेदनशील इलाकों से पहले ही बड़े पैमाने पर लोगों को निकालकर राहत शिविरों में पहुंचाया गया। आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ आपातकालीन समीक्षा बैठक कर चौबीसों घंटे हाई अलर्ट पर रहने के निर्देश दिए हैं। स्थिति से निपटने के लिए राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) और राज्य आपदा मोचन बल (SDRF) की कई टीमों को सबसे ज्यादा प्रभावित जिलों में तैनात किया गया है। चक्रवात के चलते हवाई और रेल यातायात पर भी बुरा असर पड़ा है। खराब मौसम और तेज हवाओं के कारण विजयवाड़ा, विशाखापट्टनम और तिरुपति हवाई अड्डों से 18 से अधिक उड़ानें रद्द कर दी गई हैं, जबकि कई ट्रेनों को एहतियातन नियंत्रित गति से चलाया जा रहा है या रद्द किया गया है।
तमिलनाडु, ओडिशा और तेलंगाना में भी अलर्ट जारी
चक्रवात 'मुरासु' का असर केवल आंध्र प्रदेश तक सीमित नहीं है, बल्कि तमिलनाडु, पुडुचेरी, रायलसीमा, तेलंगाना और दक्षिणी ओडिशा में भी तेज बारिश दर्ज की जा रही है। चेन्नई और पड़ोसी तटीय जिलों में एहतियात के तौर पर स्कूलों में अवकाश घोषित किया गया था और भारी बारिश के कारण कई इलाकों में पेड़ गिरे हैं। मौसम विभाग ने अगले 12 से 24 घंटों के लिए तटीय आंध्र प्रदेश और रायलसीमा के कई इलाकों में अत्यधिक भारी बारिश की चेतावनी (रेड अलर्ट) बरकरार रखी है। मछुआरों को समुद्र में न जाने की सख्त हिदायत दी गई है। चक्रवात के धीरे-धीरे कमजोर होकर गहरे दबाव में बदलने की उम्मीद है, लेकिन अंदरूनी इलाकों में अगले दो दिनों तक तेज बारिश का खतरा मंडरा रहा है।