दलित-आदिवासी आत्मसम्मान बैठक में हल्द्वानी शुद्धीकरण घटना की निंदा, सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित
नई दिल्ली, 29 सितंबर:कांग्रेस ने मंगलवार को नई दिल्ली के कॉन्स्टीट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया के मावलंकर हॉल में ‘दलित-आदिवासी आत्मसम्मान बैठक’ आयोजित की। बैठक में विभिन्न राज्यों से आए अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के नेताओं ने दलितों और आदिवासियों की गरिमा, सुरक्षा तथा संवैधानिक अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर चिंता जताई।
बैठक में कांग्रेस के एससी एवं एसटी सांसद मंच की ओर से हल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की सभा के बाद हुई कथित ‘शुद्धीकरण’ घटना की निंदा का प्रस्ताव रखा गया। प्रस्ताव में दलितों और आदिवासियों की गरिमा, छुआछूत के खात्मे, कानून के सामने समानता, भेदभाव से सुरक्षा और आवश्यक सार्वजनिक सेवाओं तक समान पहुंच को संवैधानिक जिम्मेदारी बताया गया। प्रस्ताव को बैठक में मौजूद कांग्रेस एससी एवं एसटी सांसद मंच के सदस्यों ने सर्वसम्मति से अपनाया।
प्रस्ताव में कहा गया कि मंच इन मुद्दों को उचित संसदीय, संवैधानिक और लोकतांत्रिक मंचों पर उठाएगा तथा संबंधित सरकारों और अधिकारियों से जवाबदेही तय करने की मांग करेगा। बैठक में मुकुल वासनिक, अलका लांबा, मल्लू भट्टी विक्रमार्का, के. राजू, सुखदेव भगत, राजेंद्र पाल गौतम, नेहा शिल्पी तिर्की, बंधु तिर्की, राजेश कच्छप, रामेश्वर उरांव, सुरेश बैठा और नमन विक्सल कोंगाड़ी समेत अन्य नेता शामिल हुए।
कांग्रेस सांसद मल्लू रवि ने कहा कि बैठक का उद्देश्य यह दिखाना है कि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति से जुड़े सांसद, विधायक, मंत्री, विधान परिषद सदस्य और अन्य जनप्रतिनिधि मल्लिकार्जुन खरगे के साथ हुए कथित भेदभाव और हल्द्वानी में हुए शुद्धीकरण अनुष्ठान के खिलाफ एकजुट हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इस घटना के जरिए खरगे, कांग्रेस और पूरे एससी एवं एसटी समुदाय का अपमान करने की कोशिश की गई।
रवि ने कहा कि भारत पिछले 76 वर्षों से संविधान के अनुसार संचालित हो रहा है और इस तरह का शुद्धीकरण अनुष्ठान संविधान की भावना के अनुरूप नहीं है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ने घटना की विस्तृत जांच और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है, लेकिन उनके अनुसार अब तक दोषियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई है। रवि ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इस मुद्दे पर अब तक कोई बयान नहीं दिया है।
कांग्रेस के उत्तर प्रदेश प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने आम आदमी पार्टी सांसद संजय सिंह के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वह संजय सिंह को गंभीरता से नहीं लेते। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी और कांग्रेस मिलकर चुनाव लड़ेंगी और संजय सिंह को इस मुद्दे पर टिप्पणी नहीं करनी चाहिए। गौतम ने आम आदमी पार्टी पर दलित, आदिवासी और पिछड़े वर्गों के खिलाफ होने तथा सामाजिक न्याय के मुद्दों से दूर रहने का आरोप लगाया।
गौतम ने जाति के आधार पर सार्वजनिक जिम्मेदारियों को देखने के मुद्दे पर भी टिप्पणी की। समाज में जाति व्यवस्था और छुआछूत के मामले सामने आते हैं, लेकिन बड़ी जिम्मेदारी निभाने वाले व्यक्ति को जाति के आधार पर बयान नहीं देना चाहिए। हर पार्टी में अलग-अलग जातियों के लोग हैं, लेकिन अन्याय को जाति के आधार पर नहीं देखा जाना चाहिए। उनके अनुसार कुछ मामलों में जाति व्यवस्था और छुआछूत होती है, लेकिन हल्द्वानी के मामले को इस आधार पर देखने के बजाय घटना और उससे जुड़े कथित अन्याय पर ध्यान दिया जाना चाहिए।