वीरमणि केस में सीएम थलपति विजय का स्टालिन पर सीधा हमला: पूछा- DMK और AIADMK की क्या डील हुई थी

वीरमणि केस में सीएम थलपति विजय का स्टालिन पर सीधा हमला: पूछा- DMK और AIADMK की क्या डील हुई थी

दक्षिण भारतीय राजनीति के केंद्र तमिलनाडु में एक संवेदनशील आपराधिक मामले को लेकर जबरदस्त सियासी घमासान छिड़ गया है। राज्य के मुख्यमंत्री और तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) के प्रमुख थलपति विजय ने बहुचर्चित वीरमणि यौन शोषण मामले को लेकर द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन पर सीधा और तीखा हमला बोला है। एक सार्वजनिक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए सीएम विजय ने सीधे स्टालिन का नाम लेते हुए सार्वजनिक मंच से ललकारा और कहा कि पूरा तमिलनाडु आज यह जानना चाहता है कि आखिर वीरमणि और द्रमुक के शीर्ष नेतृत्व के बीच क्या गुप्त संबंध थे। उन्होंने तल्ख लहजे में कहा कि 'स्टालिन सर, अब चुप्पी तोड़िए और कुछ बोलिए।' मुख्यमंत्री विजय ने आरोप लगाया कि पिछली डीएमके सरकार के कार्यकाल के दौरान इस जघन्य अपराध की औपचारिक शिकायत दर्ज कराई गई थी, लेकिन राजनीतिक रसूख और सांठगांठ के चलते मामले में कोई ठोस कानूनी कार्रवाई नहीं होने दी गई और पूरे इतिहास को दबाने की सुनियोजित कोशिश की गई।

उपचुनाव प्रचार में गूंजा वीरमणि मामला: क्या दोनों पारंपरिक दलों की मिलीभगत है

यह राजनीतिक टकराव ऐसे नाजुक समय पर सामने आया है जब तमिलनाडु की राजनीति 6 अक्टूबर को होने वाले महत्वपूर्ण विधानसभा उपचुनाव को लेकर गरमाई हुई है। के. मरगथम कुमारवेल के विधानसभा से इस्तीफे के बाद खाली हुई इस सीट पर प्रचार अभियान के दौरान मुख्यमंत्री विजय ने विपक्षी खेमे को पूरी तरह बैकफुट पर धकेल दिया है। जनसभा में उमड़े हजारों समर्थकों के सामने विजय ने सवाल दागा कि जब एक नाबालिग बच्ची के साथ हुए बर्बर अपराध का मामला सामने था, तब तत्कालीन सरकार ने आरोपी को बचाने के लिए क्या गुप्त समझौता किया था। उन्होंने विपक्षी दल अन्नाद्रमुक (AIADMK) को भी लपेटे में लेते हुए कहा कि आज इस गंभीर मुद्दे पर द्रमुक के साथ-साथ अन्नाद्रमुक भी पूरी तरह रहस्यमयी चुप्पी साधे बैठी है। उन्होंने जनता से मुखातिब होते हुए पूछा कि क्या दोनों पारंपरिक राजनीतिक दल आपस में अंदरूनी समझौता करके बैठे हैं और क्या जनता के सामने इंसाफ की गुहार लगाने वाली बेटियों के दर्द पर यूं ही पर्दा डाला जाता रहेगा।

पिछली सरकार में क्लोजर रिपोर्ट: सबूतों के अभाव का बहाना बनाकर बंद की गई थी फाइल

तमिलनाडु पुलिस और जांच एजेंसियों से जुड़े सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, वीरमणि के खिलाफ गंभीर आरोपों के तहत प्राथमिकी (FIR) तो दर्ज की गई थी, लेकिन तत्कालीन डीएमके शासनकाल के दौरान उसकी गिरफ्तारी तक नहीं की गई। उस समय के जांच अधिकारियों ने मामले को बेहद कमजोर बताते हुए और पर्याप्त सबूतों के अभाव का तकनीकी हवाला देकर अदालत में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल कर दी थी, जिससे मामला ठंडे बस्ते में चला गया था। सत्ता परिवर्तन के बाद जब इस प्रकरण की कानूनी समीक्षा की गई, तो यह बात सामने आई कि मामले की जांच को जानबूझकर भटकाया गया था। मुख्यमंत्री विजय ने आरोप लगाया कि सत्ता के संरक्षण के बिना इतने गंभीर पोक्सो (POCSO) मामले में किसी आरोपी को खुली छूट मिलना और जांच को बंद करा देना संभव ही नहीं था।

TVK सरकार का एक्शन: स्पेशल पोक्सो कोर्ट ने खारिज की क्लोजर रिपोर्ट, आरोपी सलाखों के पीछे

राज्य में नई सरकार के गठन के बाद इस पूरे मामले में कानूनी मोड़ तब आया जब विशेष पोक्सो अदालत (Special POCSO Court) ने पिछली पुलिस जांच द्वारा पेश की गई क्लोजर रिपोर्ट को पूरी तरह खारिज कर दिया। अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए स्वतंत्र और निष्पक्ष अतिरिक्त जांच के कड़े आदेश दिए। अदालत के निर्देश पर गठित नई विशेष जांच टीम ने तेजी से कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपी वीरमणि और उसके दो सहयोगियों को 29 अगस्त को धर दबोचा। इसके बाद अदालत के आदेश पर तीनों आरोपियों को सीधे चेन्नई की पुझल सेंट्रल जेल (Puzhal Central Jail) की सलाखों के पीछे भेज दिया गया। नए सिरे से की गई इस त्वरित जांच के दौरान पुलिस ने न केवल मूल पीड़ित नाबालिग लड़की का पता लगा लिया, बल्कि अदालत के सक्षम मजिस्ट्रेट के समक्ष दंड प्रक्रिया संहिता के तहत उसके बयान भी विधिवत दर्ज करवाए।

पेन ड्राइव में मिले आपत्तिजनक वीडियो से खुला था राज: कई और पीड़ित युवतियों की पहचान

पुलिस जांच के अनुसार, इस पूरे सनसनीखेज कांड की शुरुआत अक्टूबर 2025 में हुई थी जब एक जागरूक बाल अधिकार कार्यकर्ता ने अपराध से जुड़े साक्ष्य लेकर एंटी-वाइस स्क्वाड (AVS) से संपर्क किया था। कार्यकर्ता को एक गुप्त यूएसबी (USB) ड्राइव मिली थी, जिसमें मौजूद वीडियो क्लिप में मुख्य आरोपी वीरमणि को एक नाबालिग लड़की का गंभीर यौन शोषण करते हुए साफ देखा जा सकता था। पुलिस की फॉरेंसिक और फील्ड जांच में यह खुलासा हुआ कि जिस समय यह अपराध कारित किया गया था, वह वर्ष 2019 का समय था और उस दौरान पीड़िता वास्तव में नाबालिग थी। इसके अलावा, अदालत में पेश की गई ताजा स्टेटस रिपोर्ट में पुलिस ने यह भी सनसनीखेज जानकारी दी है कि जांच के दायरे को बढ़ाते हुए कई अन्य महिलाओं की भी पहचान कर ली गई है, जो अपराध के समय नाबालिग थीं और उनके बयान भी दर्ज किए गए हैं।

हवाला और बिचौलियों का नेटवर्क: क्या जांच को प्रभावित करने के लिए हुआ था बड़ा वित्तीय लेन-देन

इस मामले में अब केवल यौन अपराध ही नहीं, बल्कि जांच को प्रभावित करने के लिए किए गए वित्तीय भ्रष्टाचार की भी परतें खुलने लगी हैं। राज्य पुलिस की विशेष टीम अब इस गंभीर पहलू की गहनता से पड़ताल कर रही है कि क्या पिछली सरकार के समय जांच अधिकारियों को प्रभावित करने, पीड़ित पक्ष पर दबाव बनाने या क्लोजर रिपोर्ट दाखिल कराने के लिए किसी संदिग्ध वित्तीय लेन-देन, हवाला नेटवर्क या प्रभावशाली राजनीतिक बिचौलियों का इस्तेमाल किया गया था। जांच एजेंसियों का मानना है कि यदि पैसों के लेन-देन और सबूतों को मिटाने की साजिश की पुष्टि होती है, तो इस मामले में कई पूर्व नौकरशाहों और राजनीतिक पदाधिकारियों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं, जिससे आने वाले दिनों में तमिलनाडु का राजनीतिक तापमान और अधिक चढ़ना तय माना जा रहा है।