NHAI का बड़ा फैसला: अब हाईवे के गड्ढों की होगी AI से निगरानी, 40,000 किमी नेटवर्क पर तैनात होगा हाई-टेक सिस्टम
सड़क यात्रा के दौरान अचानक आने वाले गड्ढे न केवल गाड़ी का संतुलन बिगाड़ते हैं, बल्कि जानलेवा दुर्घटनाओं का कारण भी बनते हैं। लेकिन अब भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने देश भर के नेशनल हाईवे को सुरक्षित और गड्ढा-मुक्त बनाने के लिए एक क्रांतिकारी कदम उठाया है। अब सड़कों की टूटी सतह और अवैध अतिक्रमण की पहचान इंसानों के बजाय आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) करेगी। NHAI ने अपने 40,000 किलोमीटर के हाईवे नेटवर्क पर AI-आधारित डैशकैम और अत्याधुनिक सर्वे सिस्टम तैनात करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
कैसे काम करेगा NHAI का 'AI-सर्वे' सिस्टम
इस हाई-टेक सिस्टम का मुख्य आधार 'नेटवर्क सर्वे व्हीकल' (NSV) हैं, जो 3D लेजर तकनीक और हाई-रिजॉल्यूशन कैमरों से लैस हैं। ये वाहन जब हाईवे पर चलेंगे, तो ये सड़क की सतह का एक सटीक डिजिटल नक्शा (Digital Mapping) तैयार करेंगे। इन कैमरों से प्राप्त फुटेज का AI विश्लेषण करेगा और सड़क की 30 से अधिक अलग-अलग प्रकार की कमियों को तुरंत चिन्हित कर लेगा।
10 दिन में तैयार होगी सर्वे रिपोर्ट
तकनीकी रूप से यह सिस्टम कितना एडवांस है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पहले जो सर्वे रिपोर्ट तैयार करने में 4 से 6 महीने का लंबा समय लगता था, वह अब मात्र 10 दिनों में बनकर तैयार हो जाएगी। एक अकेला NSV वाहन प्रतिदिन लगभग 300 किलोमीटर तक की सड़क का सर्वे करने में सक्षम है, जो NHAI की कार्यक्षमता को कई गुना बढ़ा देगा।
सड़कों की लाइफ और सेफ्टी होगी बेहतर
इस निगरानी व्यवस्था का सबसे बड़ा लाभ 'रियल-टाइम मॉनिटरिंग' है। मामूली खराबी या शुरुआत हो रहे गड्ढे भी AI की पकड़ में आ जाएंगे, जिससे समय रहते मरम्मत (Maintenance) करना संभव होगा। अमेरिका, ब्रिटेन, चीन, जापान और ऑस्ट्रेलिया जैसे विकसित देशों में पहले से ही यह तकनीक सफल रही है। भारत में इसके लागू होने से न केवल सड़कों की क्वालिटी और उम्र (Life) बढ़ेगी, बल्कि सड़क हादसों (Road Accidents) में भी भारी गिरावट आने की उम्मीद है।
सफर होगा सुहाना और सुरक्षित
नेशनल हाईवे देश के माल और यात्री परिवहन की जीवन रेखा हैं। AI निगरानी से सड़कों का रखरखाव अब डेटा-आधारित होगा, न कि अनुमान-आधारित। यह कदम न केवल यात्रियों के लिए यात्रा को सुगम बनाएगा, बल्कि सड़क सुरक्षा मानकों को वैश्विक स्तर पर ले जाने की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर साबित होगा।