बिहार-बंगाल के बाद अब तेलंगाना पर 'भगवा' फोकस: BJP ने बिछाया जीत का जाल, नितिन नबीन का 'मिशन 2028' शुरू

बिहार-बंगाल के बाद अब तेलंगाना पर 'भगवा' फोकस: BJP ने बिछाया जीत का जाल, नितिन नबीन का 'मिशन 2028' शुरू

तेलंगाना में भाजपा का 'संकल्प केंद्र' अभियान बिहार, पश्चिम बंगाल और दिल्ली जैसी राजनीतिक सफलताओं के बाद अब भारतीय जनता पार्टी की नजरें दक्षिण भारत के तेलंगाना पर टिक गई हैं। पार्टी के वरिष्ठ नेता नितिन नबीन ने तेलंगाना में भाजपा की संगठनात्मक नींव को मजबूत करने के लिए मोर्चा संभाल लिया है। राज्य के विभिन्न जिलों—रंगारेड्डी ग्रामीण, आदिलाबाद, आसिफाबाद, निर्मल, कामारेड्डी, सिद्धिपेट, मेडक, वनपर्थी और नागरकुरनूल में एक ही दिन में 9 नए जिला कार्यालयों का उद्घाटन करना पार्टी की बढ़ती सक्रियता का बड़ा संकेत है। नबीन ने स्पष्ट किया कि ये कार्यालय केवल प्रशासनिक इमारतें नहीं, बल्कि जनता की सेवा के लिए 'संकल्प केंद्र' के रूप में काम करेंगे।

मिशन 2028: नगर निगम से विधानसभा तक का रोडमैप पार्टी की रणनीति अब पूरी तरह से 'मिशन 2028' पर केंद्रित है, जिसमें राज्य के आगामी नगर निगम चुनाव भी भाजपा के लिए महत्वपूर्ण पड़ाव हैं। नितिन नबीन ने कार्यकर्ताओं में जोश भरते हुए आह्वान किया कि राजनीति का असली अर्थ सत्ता नहीं, बल्कि समाज सेवा है। उन्होंने कांग्रेस की राज्य सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि जनता की अपेक्षाओं को पूरा करने में मौजूदा सरकार नाकाम रही है। नबीन का मानना है कि तेलंगाना की वास्तविक क्षमता का लाभ तभी जनता को मिल पाएगा जब राज्य में भाजपा की 'डबल इंजन' सरकार बनेगी। उन्होंने संगठन के मूल मंत्र 'राष्ट्र प्रथम, पार्टी द्वितीय और स्वयं अंत में' को अपनाकर कार्यकर्ताओं को धरातल पर जुड़ने का निर्देश दिया।

दक्षिण में चुनौती और भाजपा की नई रणनीति भाजपा की यह सक्रियता ऐसे समय में देखने को मिल रही है जब पड़ोसी राज्य कर्नाटक में पार्टी को हालिया विधान परिषद चुनावों में राजनीतिक चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। कर्नाटक में क्रॉस वोटिंग के कारण कांग्रेस की बढ़त ने भाजपा नेतृत्व को सतर्क कर दिया है। इसी के मद्देनजर, तेलंगाना में भाजपा अपनी संगठनात्मक खामियों को दूर करने और कार्यकर्ताओं की जड़ें मजबूत करने पर विशेष जोर दे रही है। दिवंगत नेता सुषमा स्वराज और तेलंगाना आंदोलन के शहीदों को याद करते हुए, नबीन ने दावा किया कि तेलंगाना के विकास का सपना केवल भाजपा के सत्ता में आने के बाद ही पूर्ण रूप से साकार होगा। अब देखना दिलचस्प होगा कि भाजपा की यह आक्रामक रणनीति तेलंगाना की क्षेत्रीय राजनीति में कितना बड़ा बदलाव लाती है।

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