NASA की जादुई न्यूक्लियर बैटरी 5 पीढ़ियों तक नहीं होगी खत्म, 433 सालों तक लगातार देगी पावर
News India Live, Digital Desk: अंतरिक्ष विज्ञान की दुनिया में नासा (NASA) ने एक ऐसी क्रांतिकारी उपलब्धि हासिल की है, जो भविष्य की ऊर्जा जरूरतों को हमेशा के लिए बदल सकती है। नासा ने एक ऐसी 'न्यूक्लियर बैटरी' विकसित की है, जो बिना रुके या बिना चार्ज किए अगले 433 सालों तक बिजली पैदा कर सकती है। सरल शब्दों में कहें तो यह बैटरी इंसान की 5 पीढ़ियों के जीवनकाल से भी ज्यादा समय तक सक्रिय रहेगी। इस खोज ने न केवल अंतरिक्ष मिशनों बल्कि पृथ्वी पर भी ऊर्जा के स्रोतों को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
क्या है इस परमाणु बैटरी की ताकत?
नासा की इस नई तकनीक को 'रेडियोआइसोटोप थर्मोइलेक्ट्रिक जेनरेटर' (RTG) के एक उन्नत संस्करण के रूप में देखा जा रहा है। यह बैटरी प्लूटोनियम-238 जैसे रेडियोधर्मी तत्वों के प्राकृतिक क्षय (Decay) से निकलने वाली गर्मी को बिजली में बदलती है। इस प्रक्रिया में किसी भी तरह के बाहरी ईंधन या सौर ऊर्जा की जरूरत नहीं होती, जिससे यह गहरे अंतरिक्ष के उन हिस्सों में भी काम कर सकती है जहां सूरज की रोशनी बिल्कुल नहीं पहुंचती। 433 वर्षों की लंबी उम्र इसे अब तक का सबसे टिकाऊ ऊर्जा स्रोत बनाती है।
अंतरिक्ष मिशनों के लिए गेम-चेंजर साबित होगी यह तकनीक
अब तक के अंतरिक्ष मिशनों में सबसे बड़ी चुनौती पावर बैकअप की होती थी। मंगल ग्रह पर चलने वाले रोवर हों या सौर मंडल के बाहर जाने वाले 'वॉयेजर' जैसे यान, उनकी उम्र उनकी बैटरी पर निर्भर करती है। नासा की यह न्यूक्लियर बैटरी भविष्य के इंटरस्टेलर मिशनों (एक तारे से दूसरे तारे के बीच की यात्रा) के लिए मील का पत्थर साबित होगी। 433 साल तक चलने वाली पावर सप्लाई का मतलब है कि अब इंसान ब्रह्मांड के उन सुदूर कोनों तक भी अपने उपकरण भेज सकेगा, जहां पहुंचने में सदियां लग जाती हैं।
क्या पृथ्वी पर भी होगा इस बैटरी का इस्तेमाल?
इस खबर के वायरल होते ही लोगों के मन में यह सवाल उठ रहा है कि क्या आने वाले समय में हमारे स्मार्टफोन या इलेक्ट्रिक गाड़ियां भी ऐसी ही बैटरी से चलेंगी? विशेषज्ञों का कहना है कि हालांकि यह तकनीक अभी बहुत महंगी और रेडियोधर्मी सुरक्षा मानकों के अधीन है, लेकिन इसका उपयोग बेहद दुर्गम इलाकों, जैसे समुद्र की गहराइयों में लगे सेंसर्स या अंटार्कटिका जैसे बर्फीले क्षेत्रों के पावर स्टेशनों में किया जा सकता है। फिलहाल, नासा का मुख्य ध्यान इसे ब्रह्मांड की अनसुलझी गुत्थियां सुलझाने वाले मिशनों में इस्तेमाल करने पर है।
सुरक्षा और रेडिएशन का खतरा कितना?
न्यूक्लियर नाम सुनते ही सुरक्षा को लेकर चिंता होना स्वाभाविक है। हालांकि, नासा ने स्पष्ट किया है कि इन बैटरियों को कई सुरक्षा परतों (Layers) में कैद किया जाता है, जो किसी भी तरह के रेडिएशन रिसाव को रोकती हैं। ये बैटरियां बेहद कठोर परिस्थितियों, जैसे तेज धमाकों या अत्यधिक दबाव को भी झेलने में सक्षम हैं। विज्ञान की यह प्रगति दर्शाती है कि हम एक ऐसे युग की ओर बढ़ रहे हैं जहां 'बैटरी लो' जैसी समस्या इतिहास बन जाएगी।