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April 18 2026 06:40 am

Nari Shakti Vandan : लोकसभा में महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी 181 सीटें, यूपी-बिहार में बदलेगा सियासी समीकरण

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News India Live, Digital Desk: केंद्र सरकार द्वारा लागू किए गए 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' ने देश की सियासत में हलचल तेज कर दी है। महिला आरक्षण कानून के प्रभावी होते ही भारतीय राजनीति का चेहरा पूरी तरह बदल जाएगा। वर्तमान में 543 सदस्यों वाली लोकसभा में जल्द ही 33 प्रतिशत यानी 181 सीटों पर केवल महिला उम्मीदवार ही चुनाव लड़ती नजर आएंगी। सबसे दिलचस्प बदलाव देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश और बिहार में देखने को मिलेगा, जहां महिलाओं की भागीदारी में ऐतिहासिक उछाल आने वाला है।

उत्तर प्रदेश में महिलाओं का दबदबा: 80 में से 27 सीटें होंगी आरक्षित

देश की सत्ता का रास्ता तय करने वाले उत्तर प्रदेश में महिला आरक्षण का सबसे व्यापक असर पड़ेगा। वर्तमान में यूपी में लोकसभा की 80 सीटें हैं, जिनमें से नए कानून के तहत 27 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित की जाएंगी। इसका सीधा मतलब यह है कि अब यूपी की राजनीति में आधी आबादी का दखल सिर्फ नारों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि संसद में उनकी आवाज और बुलंद होगी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस कदम से राज्य में महिला वोट बैंक को साधने की होड़ और तेज हो जाएगी।

बिहार और महाराष्ट्र में भी मचेगी सियासी हलचल

यूपी के बाद बिहार और महाराष्ट्र जैसे प्रमुख राज्यों में भी सीटों का गणित पूरी तरह बदलने वाला है। बिहार की 40 लोकसभा सीटों में से 13 से 14 सीटें महिलाओं के खाते में जा सकती हैं। वहीं, 48 सीटों वाले महाराष्ट्र में करीब 16 सीटें महिला सांसदों के लिए सुरक्षित होंगी। अगर भविष्य में परिसीमन (Delimitation) लागू होता है और लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ती है, तो यह आंकड़ा और भी ऊपर जा सकता है। अनुमान के मुताबिक, परिसीमन के बाद यूपी में महिलाओं के पास 40 और बिहार में करीब 20 सीटें हो सकती हैं।

परिसीमन के बाद क्या होगा नया गणित?

महिला आरक्षण का पूर्ण क्रियान्वयन जनगणना और परिसीमन की प्रक्रिया पर निर्भर है। यदि 2026 के बाद होने वाले परिसीमन में लोकसभा सीटों की कुल संख्या बढ़कर 848 हो जाती है, तो महिला आरक्षण के तहत कुल आरक्षित सीटों की संख्या 282 तक पहुंच सकती है। ऐसी स्थिति में उत्तर प्रदेश की हिस्सेदारी बढ़कर 120 (कुल सीटों का अनुमान) हो सकती है, जिसमें से 40 सीटें महिलाओं के लिए होंगी। इसी तरह बिहार में 60 सीटों के अनुमानित आंकड़े में से 20 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित हो जाएंगी।

क्यों खास है 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम'?

यह कानून न केवल संसद बल्कि राज्य विधानसभाओं में भी महिलाओं को 33 प्रतिशत प्रतिनिधित्व की गारंटी देता है। लंबे समय से लंबित इस विधेयक को ऐतिहासिक बहुमत के साथ पारित किया गया था। विशेषज्ञों का कहना है कि इससे नीति निर्धारण में महिलाओं की सक्रिय भूमिका बढ़ेगी और जमीनी स्तर पर महिलाओं से जुड़े मुद्दों को अधिक प्राथमिकता मिलेगी। हालांकि, विपक्षी दल इसे जल्द से जल्द लागू करने की मांग कर रहे हैं, जबकि सरकार इसे संवैधानिक प्रक्रिया (जनगणना और परिसीमन) के पूरा होने के बाद प्रभावी बनाने की तैयारी में है