Narasimha Dwadashi 2026 : शत्रुओं पर विजय और संकटों से मुक्ति दिलाता है भगवान नृसिंह का यह व्रत, जानें पूजा विधि और मंत्र
News India Live, Digital Desk: भगवान विष्णु का नृसिंह अवतार (आधा शेर और आधा मनुष्य) अधर्म के विनाश और अटूट भक्ति की जीत का प्रतीक है। मान्यता है कि जो व्यक्ति नरसिंह द्वादशी के दिन श्रद्धापूर्वक पूजन करता है, उसे असाध्य रोगों, कोर्ट-कचहरी के मामलों और गुप्त शत्रुओं से मुक्ति मिलती है।
1. नरसिंह द्वादशी 2026: तिथि और मुहूर्त
द्वादशी तिथि प्रारंभ: 27 फरवरी 2026 को दोपहर 12:44 बजे से।
द्वादशी तिथि समाप्त: 28 फरवरी 2026 को दोपहर 01:21 बजे तक।
व्रत की तारीख: उदयातिथि के अनुसार 28 फरवरी 2026 (शनिवार) को व्रत रखा जाएगा।
2. भगवान नृसिंह के शक्तिशाली मंत्र (Powerful Mantras)
नृसिंह देव को उग्र देवता माना जाता है, उनकी पूजा में इन मंत्रों का जाप विशेष फलदायी होता है:
नृसिंह गायत्री मंत्र:
"ॐ उग्रनृसिंहाय विद्महे वज्रनखाय धीमहि तन्नो नृसिंह: प्रचोदयात्॥"
संकट मुक्ति के लिए:
"ॐ नृं नृं नृं नरसिंहाय नमः"
बीज मंत्र:
"क्ष्रौं" (इस मंत्र का जाप मानसिक शांति और शक्ति प्रदान करता है)
3. पूजा विधि (Puja Vidhi)
ब्रह्म मुहूर्त में स्नान: सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और भगवान विष्णु एवं नृसिंह देव का ध्यान कर व्रत का संकल्प लें।
पूजा स्थल: मंदिर में भगवान नृसिंह और माता लक्ष्मी की मूर्ति या चित्र स्थापित करें।
अभिषेक: भगवान को गंगाजल, पंचामृत और सुगंधित इत्र से स्नान कराएं।
अर्पण: पीले पुष्प, पीले वस्त्र, चंदन और अक्षत अर्पित करें। भगवान नृसिंह को लाल फूल भी प्रिय हैं।
भोग: उन्हें दूध से बनी मिठाई या फलों का भोग लगाएं।
आरती और पाठ: नृसिंह चालीसा या नृसिंह स्तोत्र का पाठ करें और अंत में घी के दीपक से आरती करें।
4. इस दिन क्या करें और क्या न करें?
क्रोध न करें: चूंकि भगवान नृसिंह का अवतार क्रोध शांत करने के लिए भी जाना जाता है, इसलिए व्रत के दौरान शांत रहें।
गरीबों की मदद: इस दिन अन्न और जल का दान करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
ब्रह्मचर्य: व्रत के दौरान ब्रह्मचर्य का पूर्ण पालन करें।
5. नरसिंह द्वादशी का फल
नृसिंह द्वादशी का व्रत करने से व्यक्ति के भीतर के भय का नाश होता है। विशेषकर शनि की ढैया या साढ़ेसाती से परेशान लोगों के लिए यह व्रत रामबाण माना गया है क्योंकि इस बार यह शनिवार को पड़ रहा है।