अविमुक्तेश्वरानंद की अग्रिम जमानत पर हाईकोर्ट में सुनवाई मेडिकल रिपोर्ट और 164 के बयानों से बढ़ा कानूनी शिकंजा
News India Live, Digital Desk : स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पर दो बटुकों (एक नाबालिग और एक बालिग) द्वारा यौन शोषण के आरोप लगाए गए हैं। मामला माघ मेला 2025 और 2026 के दौरान उनके शिविर में हुई कथित घटनाओं से जुड़ा है।
1. इलाहाबाद हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत (Anticipatory Bail)
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने गिरफ्तारी से बचने के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।
दलील: उनके वकीलों का दावा है कि यह FIR एक "सुनियोजित साजिश" है और शिकायतकर्ता आशुतोष ब्रह्मचारी का पुराना आपराधिक रिकॉर्ड (इतिहास-शीटर) है।
सुनवाई: कोर्ट ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस से अब तक की जांच का ब्यौरा मांगा है। फिलहाल उन्हें कोई अंतरिम राहत (Interim Stay) नहीं मिली है।
2. पीड़ितों का मेडिकल और आयु परीक्षण (Age Test)
पुलिस जांच के तहत पीड़ितों की मेडिकल जांच और उम्र के सत्यापन की प्रक्रिया पूरी की जा रही है:
फॉेंसिक अपडेट: सूत्रों के अनुसार, मेडिकल परीक्षण में कुछ ऐसे संकेत मिले हैं जो आरोपों की गंभीरता को बढ़ाते हैं। हालांकि, विस्तृत फॉरेंसिक रिपोर्ट का अभी इंतजार है।
उम्र का पेच: आरोपी पक्ष का दावा है कि मार्कशीट के आधार पर बच्चे उन तारीखों पर वहां मौजूद नहीं थे, जबकि पुलिस उनके बोन-एज टेस्ट (Bone Age Test) और अन्य दस्तावेजों के जरिए उनकी नाबालिग स्थिति की पुष्टि कर रही है।
3. धारा 164 CrPC के तहत बयान
दोनों पीड़ितों ने मजिस्ट्रेट के सामने अपने बयान दर्ज करा दिए हैं।
महत्व: कानून की नजर में मजिस्ट्रेट के सामने दिए गए बयान (164) अत्यंत विश्वसनीय माने जाते हैं। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यदि इन बयानों में यौन शोषण की पुष्टि होती है, तो POCSO एक्ट के तहत गिरफ्तारी की संभावनाएं काफी बढ़ जाती हैं।
4. नया मोड़: वकील को बम से उड़ाने की धमकी
26 फरवरी को वाराणसी कोर्ट परिसर में सुरक्षा बढ़ा दी गई जब स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के वरिष्ठ अधिवक्ता श्रीनाथ त्रिपाठी को उनके मोबाइल पर बम से उड़ाने की धमकी मिली। पुलिस इस मामले की भी अलग से जांच कर रही है।
5. स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का रुख
स्वामी जी ने इन सभी आरोपों को 'सनतन धर्म के खिलाफ साजिश' बताया है। उन्होंने कहा है कि वे जांच में पूरा सहयोग करेंगे, लेकिन उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि जब बच्चे कभी उनके गुरुकुल में पढ़े ही नहीं, तो शोषण का सवाल ही नहीं उठता।