MP Civil Judge Eligibility : सिविल जज बनने का रास्ता हुआ आसान, सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, मध्य प्रदेश के युवाओं को मिली राहत

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News India Live, Digital Desk:  MP Civil Judge Eligibility : मध्य प्रदेश में सिविल जज बनने का सपना देख रहे युवाओं के लिए सुप्रीम कोर्ट से एक बड़ी राहत वाली खबर आई है! सर्वोच्च न्यायालय ने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के उस फैसले को रद्द कर दिया है, जिसमें सिविल जज भर्ती के लिए वकीलों के लिए कम से कम तीन साल की वकालत का अनुभव अनिवार्य कर दिया गया था. सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से अब उन तमाम युवा कानून स्नातकों (लॉ ग्रेजुएट्स) और वकीलों को मौका मिलेगा जिनके पास तीन साल का अनुभव नहीं है.

अगर आप मध्य प्रदेश में सिविल जज बनने का सपना देख रहे हैं और कानूनी पढ़ाई पूरी कर चुके हैं, तो आपके लिए सुप्रीम कोर्ट से एक बहुत अच्छी खबर आई है. हाल ही में, सर्वोच्च न्यायालय ने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के एक फैसले को पलट दिया है, जिसके तहत सिविल जज भर्ती के लिए वकीलों को कम से कम तीन साल तक सक्रिय वकालत का अनुभव होना ज़रूरी कर दिया गया था. अब इस शर्त को खत्म कर दिया गया है, जिसका सीधा फायदा उन हज़ारों युवा लॉ ग्रेजुएट्स और जूनियर वकीलों को मिलेगा, जिनके पास अभी तक तीन साल का वकालत का अनुभव नहीं था.

क्या था मामला और क्यों बदला नियम?

दरअसल, मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने न्यायिक सेवा (भर्ती एवं सेवा की शर्तें) नियम, 2023 में एक संशोधन किया था. इस संशोधन के तहत सिविल जज के लिए आवेदन करने वाले वकीलों के लिए यह ज़रूरी कर दिया गया कि उनके पास कम से कम तीन साल का सक्रिय वकालत का अनुभव होना चाहिए. यह नियम पहले उन लोगों के लिए नहीं था जो सीधे कानून की पढ़ाई के बाद न्यायिक सेवाओं में जाना चाहते थे. कई उम्मीदवारों और वकीलों ने इसे मनमाना और असंवैधानिक बताते हुए सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी. उनका कहना था कि यह नियम ताजे कानून स्नातकों (fresh law graduates) और जूनियर वकीलों को प्रतियोगिता से बाहर कर देगा.

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई के बाद कहा कि मध्य प्रदेश हाई कोर्ट का यह संशोधन "असीमित शक्ति का मनमाना प्रयोग" था. सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा कि इस तरह के नियम सिर्फ कार्यपालिका के एक फरमान (executive fiat) के तौर पर नहीं थोपे जा सकते. न्यायालय ने यह भी बताया कि जब मौजूदा नियमों में पहले से ही 'वकीलों को योग्य' माना गया है और तीन साल के अनुभव की कोई शर्त नहीं है, तो नया नियम बनाना सही नहीं है. सुप्रीम कोर्ट का मानना था कि कानून में एक नया 'काल्पनिक विचार' (deeming fiction) जोड़ना, खासकर बिना किसी उचित विधायी आधार के, सही प्रक्रिया नहीं है. इस तरह, सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के आदेश को खारिज करते हुए उन सभी उम्मीदवारों को राहत दी है जो इस शर्त की वजह से परेशान थे.

किन्हें मिलेगा फायदा?

इस फैसले के बाद, मध्य प्रदेश सिविल जज भर्ती परीक्षा में अब उन उम्मीदवारों को भी आवेदन करने का मौका मिल जाएगा, जिन्होंने अभी-अभी कानून की पढ़ाई पूरी की है या जिनके पास तीन साल से कम का वकालत का अनुभव है. यह फैसला न्यायिक सेवा में करियर बनाने की इच्छा रखने वाले कई युवा वकीलों के लिए एक बड़ी उम्मीद बनकर आया है. उम्मीद है कि अब भर्ती प्रक्रिया पुराने नियमों के हिसाब से ही आगे बढ़ेगी और ज़्यादा से ज़्यादा योग्य उम्मीदवार अपनी किस्मत आजमा पाएंगे.