IND vs PAK : आखिर क्यों 10 दिन में ही टूट गई पाकिस्तान की अकड़? ICC की Financial सर्जिकल स्ट्राइक के आगे पस्त हुआ PCB, जानें अंदर की बात

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News India Live, Digital Desk: टी20 वर्ल्ड कप 2026 के सबसे प्रतीक्षित मुकाबले 'भारत बनाम पाकिस्तान' को लेकर चल रहा हाई-वोल्टेज ड्रामा आखिरकार खत्म हो गया है। जो पाकिस्तान 1 फरवरी तक भारत के खिलाफ मैच के बहिष्कार (Boycott) की कसमें खा रहा था, उसने मात्र 10 दिनों के भीतर पूरी तरह 'U-Turn' ले लिया है। अब 15 फरवरी को कोलंबो के आर. प्रेमदासा स्टेडियम में दोनों टीमें आमने-सामने होंगी। लेकिन सवाल यह है कि आखिर पाकिस्तान को झुकने पर किसने मजबूर किया?

1. ICC की 'आर्थिक' घेराबंदी

पाकिस्तान ने भारत के खिलाफ मैच न खेलने के लिए 'फोर्स मेज्योर' (Force Majeure) क्लॉज का हवाला दिया था, जिसे ICC ने सिरे से खारिज कर दिया। आईसीसी ने साफ चेतावनी दी कि यदि पाकिस्तान मैच छोड़ता है, तो उसे ब्रॉडकास्टर्स (Jio-Star) को होने वाले करोड़ों के नुकसान की भरपाई अपनी जेब से करनी होगी। इसके अलावा, पाकिस्तान के वार्षिक रेवेन्यू शेयर पर भी रोक लगाने की धमकी दी गई थी।

2. 'ब्लैकलिस्ट' होने का डर

सिर्फ जुर्माना ही नहीं, ICC ने PCB को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग करने का मन बना लिया था। बहिष्कार की स्थिति में पाकिस्तान पर आगामी द्विपक्षीय सीरीज और भविष्य के ICC टूर्नामेंट्स से प्रतिबंध लगने का खतरा मंडरा रहा था। विश्व क्रिकेट में अपनी साख बचाने के लिए पाकिस्तान के पास घुटने टेकने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा था।

3. मित्र देशों और BCB का दबाव

दिलचस्प बात यह है कि जिस बांग्लादेश (BCB) के समर्थन में पाकिस्तान ने बहिष्कार का नाटक रचा था, उसी बांग्लादेश ने पाकिस्तान से मैच खेलने का अनुरोध किया। श्रीलंका और यूएई जैसे मित्र देशों ने भी पाकिस्तान को समझाया कि इस कदम से एशियाई क्रिकेट का भारी आर्थिक नुकसान होगा। श्रीलंका के राष्ट्रपति ने खुद पाकिस्तानी पीएम शहबाज शरीफ से फोन पर बात कर गतिरोध खत्म करने की अपील की।

4. 'सॉफ्ट सरेंडर' या कूटनीतिक जीत?

PCB चीफ मोहसिन नकवी ने इसे 'खेल की भावना' की जीत बताया है, लेकिन हकीकत यह है कि आईसीसी ने पाकिस्तान की द्विपक्षीय सीरीज या हाइब्रिड मॉडल वाली किसी भी शर्त को नहीं माना है। पाकिस्तान को बिना किसी ठोस रियायत के ही मैदान पर उतरना पड़ रहा है।