देश की राजनीति के एक युग का अंत, 94 वर्ष की उम्र में दिग्गज कांग्रेस नेत्री मोहसिना किदवई का निधन
News India Live, Digital Desk: भारतीय राजनीति की एक सशक्त आवाज और कांग्रेस की वरिष्ठतम नेताओं में शुमार मोहसिना किदवई अब हमारे बीच नहीं रहीं। 94 वर्ष की आयु में उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर से राजनीतिक गलियारे में शोक की लहर दौड़ गई है। मोहसिना किदवई न केवल एक दिग्गज नेता थीं, बल्कि वे महिला सशक्तिकरण और गंगा-जमुनी तहजीब की एक मिसाल भी मानी जाती थीं।
पांच दशक लंबा रहा शानदार राजनीतिक सफर
मोहसिना किदवई का जन्म 1932 में उत्तर प्रदेश के बाराबंकी में हुआ था। उन्होंने अपना राजनीतिक जीवन उत्तर प्रदेश से शुरू किया और धीरे-धीरे राष्ट्रीय राजनीति में अपनी जगह बनाई। वे उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री रहने के साथ-साथ केंद्र में भी कई महत्वपूर्ण मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभाल चुकी थीं। इंदिरा गांधी से लेकर सोनिया गांधी तक, उन्होंने कांग्रेस के कई उतार-चढ़ाव देखे और हर परिस्थिति में पार्टी के प्रति वफादार रहीं।
आजमगढ़ उपचुनाव और 'सियासी चमत्कार'
मोहसिना किदवई के नाम राजनीति का एक ऐसा अध्याय दर्ज है जिसने इंदिरा गांधी की वापसी की राह आसान की थी। 1978 के आजमगढ़ लोकसभा उपचुनाव में उनकी जीत ने तत्कालीन जनता पार्टी सरकार के खिलाफ कांग्रेस के पुनरुद्धार का बिगुल फूंका था। इस जीत ने साबित कर दिया था कि कांग्रेस की पकड़ अभी भी जमीनी स्तर पर मजबूत है।
संसदीय अनुभव और महत्वपूर्ण पद
वे राज्यसभा और लोकसभा दोनों सदनों की सदस्य रहीं। इसके अलावा, वे अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) की महासचिव और कई राज्यों की प्रभारी के रूप में भी कार्य कर चुकी थीं। उन्हें उनकी सादगी, स्पष्टवादिता और प्रशासनिक कौशल के लिए जाना जाता था। उनके निधन पर प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और विभिन्न दलों के बड़े नेताओं ने गहरा दुख व्यक्त किया है और इसे भारतीय राजनीति के लिए एक अपूरणीय क्षति बताया है।