Mohammad Rafi's son : इस उम्र में थोड़ी शर्म करो,- आशा भोसले के दावे पर बुरी तरह भड़के मोहम्मद रफी के बेटे शाहिद

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News India Live, Digital Desk: संगीत की दुनिया के दो सबसे बड़े नाम, मोहम्मद रफी और आशा भोसले, के बीच का एक पुराना विवाद एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। इस बार इस आग को हवा दी है आशा भोसले के एक हालिया बयान ने, जिस पर मोहम्मद रफी के बेटे शाहिद रफी बुरी तरह भड़क उठे हैं। उन्होंने आशा भोसले पर न सिर्फ झूठे दावे करने का आरोप लगाया है, बल्कि यहां तक कह दिया है कि "इस उम्र में उन्हें थोड़ी शर्म करनी चाहिए।"

आशा भोसले ने ऐसा क्या कह दिया?

यह पूरा विवाद रॉयल्टी के मुद्दे से जुड़ा है, जो सालों पहले मोहम्मद रफी और लता मंगेशकर के बीच हुआ था। हाल ही में एक इंटरव्यू में आशा भोसले ने दावा किया कि रॉयल्टी को लेकर हुए विवाद के बाद मोहम्मद रफी साहब ने लता मंगेशकर को एक चिट्ठी लिखकर माफी मांगी थी। उन्होंने कहा कि रफी साहब ने अपनी चिट्ठी में लिखा था कि "मैं चाहता हूं कि आप मेरे साथ गाएं। मुझसे गलती हो गई थी।"

"कोई अपने बाप के खिलाफ कैसे सुन सकता है?" - शाहिद रफी

आशा भोसले का यही दावा शाहिद रफी के गुस्से का कारण बना। उन्होंने एक इंटरव्यू में पलटवार करते हुए कहा, "यह सरासर बकवास है। अगर उन्होंने ऐसा कहा है, तो उन्हें इस उम्र में थोड़ी शर्म आनी चाहिए। मेरे पिता का देहांत हुए 44 साल हो चुके हैं और अब इन सब बातों का क्या मतलब है?"

शाहिद ने बेहद भावुक होकर कहा, "कोई भी इंसान अपने पिता के खिलाफ ऐसी बातें कैसे बर्दाश्त कर सकता है? वह (आशा भोसले) बहुत बड़ी गायिका हैं, मैं उनकी इज्जत करता हूं। लेकिन उन्हें ऐसी बातें नहीं कहनी चाहिए। मेरे पिता ने कभी किसी से माफी नहीं मांगी। वह बहुत बड़े दिल वाले इंसान थे, लेकिन उनका स्वाभिमान भी था।"

क्या था रॉयल्टी का पूरा विवाद?

यह मामला 60 के दशक का है, जब लता मंगेशकर ने गायकों के लिए गाने की रॉयल्टी में हिस्से की मांग उठाई थी। उनका कहना था कि जब तक गाना बिकता है, गायक को उसका हिस्सा मिलना चाहिए। लेकिन मोहम्मद रफी का मानना था कि जब गायक को एक गाने के लिए उसकी फीस मिल गई, तो उसके बाद उसका उस पर कोई हक नहीं होना चाहिए। इसी बात को लेकर दोनों के बीच मतभेद इतना बढ़ गया था कि दोनों ने कुछ सालों तक एक-दूसरे के साथ गाना बंद कर दिया था।

शाहिद रफी ने साफ किया कि उनके पिता माफी मांगने वालों में से नहीं थे। अगर उन्हें कुछ सही नहीं लगता था, तो वह उस पर अडिग रहते थे। शाहिद के इस बयान ने दशकों पुराने इस विवाद को एक बार फिर से जिंदा कर दिया है और संगीत की दुनिया में एक नई बहस छेड़ दी है।