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April 15 2026 05:42 am

Middle East War Impact: ईरान युद्ध की आग पहुंची बांग्लादेश! पेट्रोल पंपों पर हाहाकार, नई सरकार के सामने बड़ा ऊर्जा संकट

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ढाका। अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच चल रहे विनाशकारी युद्ध का असर अब मिडिल ईस्ट की सरहदों को पार कर दक्षिण एशिया तक पहुंच गया है। खाड़ी देशों से तेल की सप्लाई बाधित होने और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) बंद होने की धमकियों के बीच बांग्लादेश में भयंकर ईंधन संकट (Fuel Crisis) पैदा हो गया है। हालात इतने बेकाबू हैं कि ढाका सहित कई शहरों में पेट्रोल पंपों पर वाहनों की मीलों लंबी कतारें लग गई हैं और लोग बूंद-बूंद तेल के लिए रतजगा करने को मजबूर हैं।

पैनिक बाइंग और लागू हुआ 'राशनिंग सिस्टम'

ईरान पर 28 फरवरी को हुए हमलों के बाद से ही वैश्विक तेल बाजार में अफरातफरी का माहौल है। बांग्लादेश में ईंधन खत्म होने के डर से लोगों ने 'पैनिक बाइंग' (घबराहट में जरूरत से ज्यादा खरीदारी) शुरू कर दी है।

राशनिंग लागू: एसोसिएटेड प्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, संकट को देखते हुए बांग्लादेश सरकार ने तेल की बिक्री पर राशनिंग सिस्टम लागू कर दिया है। इसके तहत अब वाहनों को एक तय और सीमित मात्रा में ही फ्यूल दिया जा रहा है।

जनता में भारी आक्रोश: रात-रात भर लाइन में लगने के बावजूद कई पंपों पर फ्यूल पूरी तरह खत्म हो चुका है। आम जनता इस बात से भी नाराज है कि सरकारी और वीआईपी गाड़ियों को तेल दिया जा रहा है, लेकिन आम कार मालिकों और ड्राइवरों को दोपहर 2 बजे तक इंतजार करने को कहा जा रहा है।

बांग्लादेश क्यों हुआ इस संकट का सबसे बड़ा शिकार?

हाल ही में बनी ढाका की नई सरकार के लिए यह ऊर्जा संकट एक बड़ी अग्निपरीक्षा बन गया है। इसके पीछे के मुख्य कारण इस प्रकार हैं:

आयात पर भारी निर्भरता: बांग्लादेश अपनी कुल जरूरत का 95% फ्यूल ऑयल और 70% गैस विदेशों (मुख्यतः खाड़ी देशों) से आयात करता है। मिडिल ईस्ट में तनाव का सीधा मतलब है बांग्लादेश की लाइफलाइन का कटना।

फर्टिलाइजर फैक्ट्रियां बंद: गैस की भारी किल्लत के कारण देश की 6 में से 5 प्रमुख उर्वरक (Fertilizer) फैक्ट्रियों को 18 मार्च तक के लिए पूरी तरह बंद कर दिया गया है। इसका सीधा असर आने वाले समय में कृषि और किसानों पर पड़ेगा।

अर्थव्यवस्था और गारमेंट इंडस्ट्री पर मंडराया खतरा

दुनिया के समुद्र के रास्ते होने वाले तेल व्यापार का पांचवां हिस्सा होर्मुज स्ट्रेट से गुजरता है। ईरान की इसे बंद करने की चेतावनी ने वैश्विक तेल की कीमतों में आग लगा दी है।

विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव: तेल की बढ़ती कीमतों के कारण बांग्लादेश का आयात बिल (Import Bill) तेजी से बढ़ रहा है, जिससे देश के फॉरेन एक्सचेंज रिजर्व पर भारी दबाव आ गया है।

गारमेंट सेक्टर को नुकसान: अगर यह ऊर्जा आपूर्ति में रुकावट लंबी खिंचती है, तो दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी कपड़ा (Garment) इंडस्ट्री वाले इस देश के कारखाने ठप पड़ सकते हैं। इससे न केवल निर्यात गिरेगा, बल्कि लाखों लोगों का रोजगार भी छिन सकता है।