BREAKING:
April 15 2026 10:25 am

US-Iran War 2026: अमेरिका ने हिंद महासागर में डुबोया ईरानी युद्धपोत 'IRIS डेना', मौत से पहले नाविक ने पिता को किया था आखिरी कॉल

Post

कोलंबो/वॉशिंगटन। अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा महायुद्ध अब खाड़ी देशों की सरहदों को पार कर हिंद महासागर तक पहुंच गया है। एक बेहद चौंकाने वाले घटनाक्रम में, अमेरिकी नौसेना की एक पनडुब्बी (Submarine) ने श्रीलंका के दक्षिणी तट के पास ईरान के एक प्रमुख युद्धपोत 'IRIS डेना' (IRIS Dena) को टॉरपीडो हमले में डुबो दिया है। यह ईरानी फ्रिगेट भारतीय नौसेना के साथ एक सैन्य अभ्यास में हिस्सा लेने के बाद विशाखापत्तनम से वापस अपने देश लौट रहा था। इस हमले ने पूरी दुनिया में खलबली मचा दी है, क्योंकि द्वितीय विश्व युद्ध के बाद यह पहली बार है जब किसी अमेरिकी पनडुब्बी ने दुश्मन के युद्धपोत को सीधे हमले में डुबोया है।

हमले से पहले की खौफनाक दास्तान: पिता को आखिरी कॉल

ईरान इंटरनेशनल की रिपोर्ट के अनुसार, इस हमले से ठीक पहले जहाज पर भारी अफरातफरी और बगावत का माहौल था। एक नाविक ने डूबने से कुछ समय पहले अपने पिता को फोन कर बताया था कि उन पर अमेरिकी टॉरपीडो का हमला होने वाला है।

अमेरिकी नौसेना की चेतावनी: हमले से पहले अमेरिकी सेना ने 'IRIS डेना' के क्रू को जहाज खाली करने के लिए दो बार स्पष्ट चेतावनी दी थी।

कमांडर से बगावत: खतरे के बावजूद जहाज के ईरानी कमांडर ने क्रू को जहाज छोड़ने की अनुमति नहीं दी। इस फैसले पर नाविकों और कमांडर के बीच तीखी बहस हुई।

जान बचाने वाले बागी निकले: हमले में बचे 32 नाविकों में से ज्यादातर वही थे, जिन्होंने कमांडर के आदेश को दरकिनार कर दिया और खुद ही लाइफबोट के जरिए समंदर में कूद गए।

4 मार्च का वह खौफनाक मंजर: कैसे डूबा 'डेना'?

यह घटना 4 मार्च 2026 की सुबह घटी। श्रीलंकाई नौसेना को जब 'डिस्ट्रेस कॉल' (मदद का संदेश) मिला और उनकी रेस्क्यू टीम मौके पर पहुंची, तब तक जहाज का नामोनिशान मिट चुका था। समंदर की सतह पर सिर्फ तेल की मोटी परत, खाली लाइफ राफ्ट और कुछ नाविक तैरते हुए मिले।

घटना के मुख्य बिंदुजानकारी
युद्धपोत का नामIRIS डेना (ईरानी नौसेना का फ्रिगेट)
हमलावर पनडुब्बीUSS शार्लेट (लॉस एंजिल्स क्लास)
इस्तेमाल हथियारमार्क-48 (Mark-48) टॉरपीडो
हमले का सटीक स्थानश्रीलंका के गाले बंदरगाह से 19 नॉटिकल मील दूर
कुल क्रू मेंबरलगभग 180

अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ की पुष्टि: "द्वितीय विश्व युद्ध के बाद यह पहली बार है जब अमेरिकी नौसेना की किसी पनडुब्बी ने दुश्मन के युद्धपोत को डुबोने की कार्रवाई की है।"

मौतों का आंकड़ा और कूटनीतिक तनाव

ईरानी युद्धपोत पर लगभग 180 नाविक सवार थे। अब तक समंदर से 87 शव बरामद किए जा चुके हैं, जबकि श्रीलंका की नौसेना ने 32 नाविकों की जान बचा ली है। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने पुष्टि की है कि यह हमला उनके तट से करीब 3,000 किलोमीटर दूर हुआ है।

अमेरिका का श्रीलंका को सख्त संदेश:

रॉयटर्स की एक आंतरिक रिपोर्ट के अनुसार, वॉशिंगटन ने श्रीलंका सरकार से कड़े शब्दों में अनुरोध किया है कि 'IRIS डेना' के 32 और एक अन्य ईरानी जहाज 'IRIS बूशहर' से बचाए गए 208 ईरानी नाविकों को तुरंत वापस तेहरान न भेजा जाए। अमेरिका इस मामले में बचे हुए नाविकों से पूछताछ या युद्धबंदी के नियमों के तहत कार्रवाई कर सकता है।