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April 10 2026 01:53 am

Middle East Crisis: क्या टूट जाएगा सीजफायर? लेबनान को लेकर ट्रंप और ईरान में छिड़ी रार, पाकिस्तान के दावे ने बढ़ाया सस्पेंस

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वाशिंगटन/तेहरान: मिडिल ईस्ट में शांति की उम्मीदों के बीच एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ कर दिया है कि ईरान के साथ प्रस्तावित संघर्ष-विराम (Ceasefire) की बातचीत में लेबनान शामिल नहीं है। ट्रंप का यह बयान उन दावों के बिल्कुल उलट है, जो ईरान और इस समझौते में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे पाकिस्तान की ओर से किए जा रहे थे। पेंटागन की ब्रीफिंग के बाद ट्रंप ने जोर देकर कहा कि लेबनान में इजरायली सैन्य अभियान इस समझौते के दायरे से बाहर हैं और इसे हिज्बुल्लाह की गतिविधियों के कारण अलग रखा गया है।

ट्रंप का दो टूक जवाब: लेबनान के लिए कोई डील नहीं

राष्ट्रपति ट्रंप ने स्पष्ट किया कि लेबनान में जारी संघर्ष को वह एक 'अलग झड़प' मानते हैं। उन्होंने कहा, "हमें ईरान से 10-सूत्रीय प्रस्ताव मिला है, जो बातचीत के लिए एक व्यावहारिक आधार है, लेकिन लेबनान को इस सीजफायर डील में शामिल नहीं किया गया है।" ट्रंप के इस रुख का इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी समर्थन किया है। नेतन्याहू कार्यालय ने स्पष्ट कर दिया है कि इजरायल ईरान के साथ सीधे टकराव को रोकने का तो पक्षधर है, लेकिन लेबनान में हिज्बुल्लाह के खिलाफ उसकी लड़ाई जारी रहेगी।

ईरान की चेतावनी: 'लेबनान पर हमला हुआ तो समझौता रद्द'

ईरान ने अमेरिका के इस रुख पर कड़ी आपत्ति जताई है। तेहरान के अधिकारियों का कहना है कि उनके 10-सूत्रीय शांति प्रस्ताव में लेबनान में हिज्बुल्लाह पर इजरायली हमलों को रोकना और ईरान पर दोबारा हमले न होने की गारंटी शामिल है। ईरानी विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने सख्त लहजे में कहा, "अमेरिका को सीजफायर या इजरायल के जरिए युद्ध, इनमें से किसी एक को चुनना होगा।" ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने भी चेतावनी दी है कि अगर लेबनान पर हमले नहीं रुके, तो वे इस समझौते से पीछे हट सकते हैं और जवाबी कार्रवाई करेंगे।

पाकिस्तान के बयान से पैदा हुआ भ्रम

इस पूरे विवाद में पाकिस्तान की भूमिका ने 'आग में घी' का काम किया है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने सार्वजनिक रूप से घोषणा की थी कि यह सीजफायर "लेबनान समेत पूरे क्षेत्र" में लागू होगा। ईरानी विदेश मंत्री ने शरीफ के इसी बयान का स्क्रीनशॉट साझा करते हुए अमेरिका को घेरा है। अब जब वाशिंगटन और तेल अवीव ने इस दावे को खारिज कर दिया है, तो पाकिस्तान की विश्वसनीयता और समझौते के भविष्य पर सवालिया निशान लग गए हैं।

संकट की जड़: एक समझौता, दो अलग व्याख्याएं

फिलहाल स्थिति यह है कि किसी भी अंतिम समझौते पर हस्ताक्षर नहीं हुए हैं। वाशिंगटन जहां इसे केवल ईरान और अमेरिका के बीच का तनाव कम करने का जरिया मान रहा है, वहीं ईरान और पाकिस्तान इसे पूरे मिडिल ईस्ट के लिए एक व्यापक शांति योजना के रूप में देख रहे हैं। लेबनान अब इस विवाद की मुख्य जड़ बन चुका है। अगर आने वाले दिनों में लेबनान पर इजरायली हमले जारी रहते हैं, तो यह नवजात सीजफायर समझौता औपचारिक रूप से शुरू होने से पहले ही दम तोड़ सकता है।