Matru Navami Puja 2025: पितृ पक्ष का वह ख़ास दिन, जब माँ और सुहागिन पितरों को मिलता है सम्मान
News India Live, Digital Desk: Matru Navami Puja 2025: पितृ पक्ष हमारे पूर्वजों को याद करने और उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करने का एक विशेष समय होता है। इन 16 दिनों में पड़ने वाली नवमी तिथि को "मातृ नवमी" के रूप में जाना जाता है, जिसका अपना एक बहुत गहरा और ख़ास महत्व है। यह दिन मुख्य रूप से परिवार की सभी दिवंगत माताओं, दादियों और सुहागिन महिलाओं को समर्पित होता है।
क्यों मनाई जाती है मातृ नवमी?
ऐसी मान्यता है कि जिस तरह हम अपने जीवित माता-पिता की सेवा करते हैं, उसी तरह हमारा कर्तव्य है कि हम उन पितरों के प्रति भी अपना सम्मान प्रकट करें जो अब इस दुनिया में नहीं हैं। मातृ नवमी का दिन विशेष रूप से उन सुहागिन महिलाओं के श्राद्ध के लिए होता है, जिनका निधन उनके पति से पहले हो गया हो। इस दिन पूरे विधि-विधान से श्राद्ध और तर्पण करने से घर की सभी दिवंगत महिला पितरों की आत्मा को शांति मिलती है और वे प्रसन्न होकर अपने बच्चों को सुख, सौभाग्य और समृद्धि का आशीर्वाद देती हैं।
मातृ नवमी 2025 की तिथि और शुभ मुहूर्त
पंचांग के अनुसार, इस साल 2025 में मातृ नवमी का श्राद्ध सोमवार, 15 सितंबर को किया जाएगा। इस दिन पूजा और तर्पण के लिए कुछ विशेष मुहूर्त होते हैं, जिनमें किया गया कर्म पितरों तक सीधे पहुंचता है।
- कुतुप मुहूर्त: सुबह 11:51 से दोपहर 12:41 तक।
कैसे करें मातृ नवमी का श्राद्ध?
मातृ नवमी पर श्राद्ध करने की विधि बहुत ही सरल और भक्तिपूर्ण है:
- सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि करके साफ कपड़े पहनें।
- घर की दक्षिण दिशा में एक साफ जगह पर चौकी लगाएं और उस पर अपने पितरों की तस्वीर रखें।
- इसके बाद हाथ में जल, कुश, तिल, जौ और सफेद फूल लेकर उन सभी माताओं और सुहागिन महिलाओं का ध्यान करें जिनका निधन हो चुका है।
- इस दिन ब्राह्मण भोजन में किसी सुहागिन ब्राह्मणी को भोजन कराना बहुत ही पुण्यकारी माना जाता है। उन्हें आदर के साथ भोजन कराएं और अपनी श्रद्धा के अनुसार सुहाग की सामग्री (जैसे- बिंदी, चूड़ी, सिंदूर) और वस्त्र भेंट करें।
- भोजन का कुछ हिस्सा गाय, कौवे और कुत्ते के लिए भी अवश्य निकालें, क्योंकि माना जाता है कि इन रूपों में पितर भोजन ग्रहण करने आते हैं।
मातृ नवमी का दिन सिर्फ एक परंपरा नहीं, बल्कि अपनी जड़ों से जुड़ने और उन माताओं के प्रति आभार व्यक्त करने का एक मौका है, जिन्होंने हमारे जीवन को संवारा है।