बंगाल में ममता को लगा बड़ा झटका भ्रष्टाचारियों के साथ नहीं रह सकता, पूर्व TMC विधायक ने थामा भाजपा का दामन
News India Live, Digital Desk: पश्चिम बंगाल की राजनीति में दलबदल का सिलसिला एक बार फिर तेज हो गया है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के कद्दावर नेताओं में शुमार रहे और पूर्व विधायक ने ममता बनर्जी का साथ छोड़कर भारतीय जनता पार्टी (BJP) का झंडा थाम लिया है। भाजपा कार्यालय में आयोजित एक भव्य कार्यक्रम के दौरान उन्होंने पार्टी की सदस्यता ली। इस दौरान उन्होंने अपनी पुरानी पार्टी पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाते हुए साफ कहा कि अब टीएमसी में ईमानदार कार्यकर्ताओं के लिए कोई जगह नहीं बची है।
भ्रष्टाचार के आरोपों ने बढ़ाई टीएमसी की मुश्किलें
भाजपा में शामिल होने के तुरंत बाद पूर्व विधायक ने मीडिया से रूबरू होते हुए टीएमसी नेतृत्व पर तीखे प्रहार किए। उन्होंने कहा, "मैं एक ऐसी पार्टी के साथ और अधिक समय तक नहीं रह सकता जो आकंठ भ्रष्टाचार में डूबी हुई है। बंगाल की जनता की गाढ़ी कमाई को लूटने वालों के साथ खड़े रहना अब मेरे स्वाभिमान के खिलाफ था।" उनके इस बयान ने बंगाल की सियासी गलियारों में हलचल पैदा कर दी है, क्योंकि चुनाव से ठीक पहले इस तरह का पलायन पार्टी की छवि को नुकसान पहुँचा सकता है।
भाजपा के 'मिशन बंगाल' को मिलेगी नई ताकत
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस दिग्गज नेता के भाजपा में आने से पार्टी को संबंधित क्षेत्र में मजबूत पकड़ बनाने में मदद मिलेगी। भाजपा के प्रदेश नेतृत्व ने उनका स्वागत करते हुए कहा कि राज्य के लोग अब टीएमसी के 'कुशासन' से तंग आ चुके हैं और वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकास कार्यों में विश्वास जता रहे हैं। भाजपा का दावा है कि आने वाले दिनों में कई और बड़े चेहरे पार्टी का हिस्सा बन सकते हैं।
ममता बनर्जी के लिए बड़ी चुनौती
एक के बाद एक नेताओं का साथ छोड़ना टीएमसी के लिए चिंता का विषय बनता जा रहा है। विशेष रूप से भ्रष्टाचार के मुद्दों पर घिरी पार्टी के लिए अपने कैडर को एकजुट रखना अब एक बड़ी चुनौती है। जहाँ टीएमसी इसे 'अवसरवाद' करार दे रही है, वहीं भाजपा इसे 'न्याय की लड़ाई' बताकर जनता के बीच ले जा रही है। अब देखना यह होगा कि इस दलबदल का असर आने वाले चुनावों के नतीजों पर किस तरह पड़ता है।