Major Action in UP: जब खाकी वालों पर ही चल गया कानून का डंडा, 15 पुलिसकर्मियों के खिलाफ कोर्ट ने दिए आदेश

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News India Live, Digital Desk : हम अक्सर फिल्मों में डायलॉग सुनते हैं कि "कानून के हाथ बहुत लंबे होते हैं" और "कानून से ऊपर कोई नहीं होता।" लेकिन असल ज़िंदगी में जब ऐसा कुछ घटता है, तो आम जनता का भरोसा न्याय व्यवस्था पर और भी गहरा हो जाता है। उत्तर प्रदेश के संभल (Sambhal) और मुरादाबाद इलाके से एक ऐसी ही खबर आई है जिसने पुलिस विभाग और राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है।

खबर यह है कि चर्चित पुलिस अधिकारी (DSP) और अंतरराष्ट्रीय पहलवान रहे अनुज चौधरी (Anuj Chaudhary) समेत 15 पुलिसवालों के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज करने का आदेश हुआ है।

मामला क्या है? (What is the matter?)

दरअसल, यह मामला आज का नहीं, बल्कि थोड़ा पुराना है, जब स्थानीय चुनावों के दौरान पुलिस और समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) के कार्यकर्ताओं के बीच तीखी झड़प हुई थी। आरोप है कि उस वक्त पुलिस ने बर्बरता दिखाई थी और सपा कार्यकर्ताओं और नेताओं के साथ कथित तौर पर मारपीट की थी।

अब कोर्ट ने इस मामले को गंभीरता से लिया है। कोर्ट के आदेश पर 15 पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। इसमें सबसे बड़ा नाम सीओ (CO) अनुज चौधरी का है।

सांसद बर्क ने दी तीखी प्रतिक्रिया

जैसे ही यह खबर सामने आई, संभल से समाजवादी पार्टी के सांसद जियाउर्रहमान बर्क (Ziaur Rehman Barq) ने इस पर अपनी चुप्पी तोड़ी। उन्होंने बहुत ही सधे हुए शब्दों में, लेकिन कड़ा संदेश दिया है।

बर्क ने कहा कि इस देश में संविधान और कानून से ऊपर कोई नहीं है—चाहे वो कोई बड़ा नेता हो या वर्दी वाला अधिकारी। उन्होंने कहा, "जिसने जैसा किया है, उसे वैसा भरना पड़ेगा।"

सांसद बर्क का कहना है कि पुलिस का काम जनता की रक्षा करना है, न कि सत्ता के नशे में चूर होकर किसी पार्टी विशेष के इशारे पर विपक्ष को दबाना। उन्होंने इसे न्याय की जीत बताया है और कहा है कि कोर्ट का यह फैसला साबित करता है कि अगर आप वर्दी पहनकर भी गलत करेंगे, तो कानून आपको छोड़ेगा नहीं।

पुलिस वालों की मुश्किलें क्यों बढ़ीं?

आमतौर पर पुलिस विभाग पर मुकदमा दर्ज होना आसान नहीं होता। लेकिन जब कोर्ट (Court) बीच में आ जाए, तो मामला संगीन हो जाता है। धारा 156(3) के तहत कोर्ट ने यह आदेश दिया था, जिसके बाद मुरादाबाद के एक थाने में यह मुकदमा दर्ज हुआ है। इसमें मारपीट, डकैती और बलवा जैसी गंभीर धाराएं लगाई गई हैं।

आम जनता के लिए संदेश

यह घटना सिर्फ पुलिस और नेताओं की लड़ाई नहीं है, बल्कि यह आम आदमी के लिए भी एक संदेश है। यह बताता है कि अगर आपके साथ गलत हुआ है और आप सही रास्ते से लड़ाई लड़ते हैं, तो देर से ही सही, लेकिन सुनवाई जरूर होती है। वर्दी ताकत का प्रतीक है, लेकिन अगर उसका गलत इस्तेमाल हुआ, तो कानून अपना काम करेगा।

फिलहाल, देखना यह होगा कि जांच में क्या निकलता है, लेकिन इतना तय है कि इस एफआईआर ने कई पुलिस अधिकारियों की नींद उड़ा दी है।