Mahabharata Facts: धृतराष्ट्र के वो 5 पाप जिनकी वजह से नष्ट हो गया पूरा कुरु वंश, जानें कैसे हुई थी हस्तिनापुर के महाराज की मृत्यु?
News India Live, Digital Desk: महाभारत की कथा में महाराज धृतराष्ट्र को एक ऐसे पात्र के रूप में देखा जाता है, जिनका 'पुत्र मोह' पूरे कुरुवंश के विनाश का कारण बना। आँखों से अंधे धृतराष्ट्र मन से भी अपने पुत्रों (कौरवों) के प्रति इतने आसक्त थे कि उन्होंने धर्म और न्याय को ताक पर रख दिया। लेकिन क्या आप जानते हैं कि उनके किन 5 बड़े पापों ने उन्हें इतिहास का सबसे विवादास्पद राजा बना दिया और उनका अंत कैसे हुआ?
धृतराष्ट्र के 5 बड़े पाप (The 5 Sins):
कुल का विनाशक मोह: धृतराष्ट्र जानते थे कि दुर्योधन अधर्म की राह पर है, फिर भी उन्होंने उसे कभी नहीं रोका। उनका यही पुत्र मोह कुरुक्षेत्र के युद्ध की सबसे बड़ी वजह बना।
पांडवों के साथ अन्याय: पांडु की मृत्यु के बाद, धृतराष्ट्र ने पांडवों को उनका पैतृक अधिकार (इंद्रप्रस्थ) देने में हमेशा आनाकानी की और शकुनि की चालों का मूक समर्थन किया।
चीर हरण पर चुप्पी: भरी सभा में जब द्रौपदी का अपमान हो रहा था, तब कुल के मुखिया होने के नाते धृतराष्ट्र चुप रहे। यह उनके जीवन का सबसे अक्षम्य अपराध माना जाता है।
भीम को मारने का प्रयास: युद्ध के बाद, जब पांडव उनसे मिलने आए, तो धृतराष्ट्र ने भीम को गले लगाने के बहाने अपनी फौलादी ताकत से कुचलने की कोशिश की थी।
विदुर और भीष्म की अनदेखी: धृतराष्ट्र ने हमेशा महात्मा विदुर और पितामह भीष्म की न्यायोचित सलाह के ऊपर दुर्योधन की जिद को प्राथमिकता दी।
कैसे हुआ धृतराष्ट्र का अंत? (The End of Dhritarashtra) कुरुक्षेत्र के युद्ध के 15 साल बाद, धृतराष्ट्र अपनी पत्नी गांधारी, कुंती और विदुर के साथ वानप्रस्थ (संन्यास) के लिए वन में चले गए। वे उत्तराखंड के घने जंगलों में तपस्या कर रहे थे। एक दिन वन में भीषण दावानल (जंगल की आग) लग गई।
वृद्धावस्था और तपस्या के कारण धृतराष्ट्र, गांधारी और कुंती भागने में असमर्थ थे। उन्होंने भागने के बजाय ईश्वर का ध्यान करते हुए उसी अग्नि में अपने प्राण त्यागने का निश्चय किया। इस प्रकार, पुत्र मोह में डूबे हस्तिनापुर के उस शक्तिशाली महाराज का अंत जंगल की आग में भस्म होकर हुआ।